अपने दम पर 12 गांव वालों ने खड़ा कर दिया 3000 एकड़ का जंगल, तालाब लबालब, फसलों का उत्पादन बढ़ा

1990 के दशक में कर्नाटक के दावणगेरे, शिमोगा और हनोली जिलों के 12 गांव सूखे की चपेट में थे. एक बंजर पहाड़ी पर 1 करोड़ से अधिक पौधे लगाए, जिससे 3,000 एकड़ क्षेत्र जंगल में बदल गया. वन विभाग के सहयोग से सिद्धेश्वर विलेज फॉरेस्ट कमेटी बनाई गई, जो अवैध कटाई पर जुर्माना लगाती थी. आइए जानते हैं कि कैसे जलवायु परिवर्तन की मार झेल रही दुनिया के लिए कर्नाटक के तीन जिले मिसाल बनकर उभरे.

4,500 लोगों ने खड़ा कर दिया 3,000 एकड़ में जंगल Image Credit: Canva/ Money9

जलवायु परिवर्तन की मार झेल रही दुनिया के लिए कर्नाटक के तीन जिले मिसाल बनकर उभरे. इन जिलों के 12 गांव कभी सूखे की चपेट में थे, लेकिन गांव वालों के सामूहिक प्रयास से इलाके की तीन हजार एकड़ जमीन जंगल में बदल गई. आज स्थिति ऐसी है कि क्षेत्र के तालाब, कुंए और बोरवेल्स में फिर से पानी का लौट आया. आइए जानते हैं कि गांव वालों ने ऐसा कैसे किया.

सूखा पड़ा तो जीने का तरीका बदला

दावणगेरे, शिमोगा और हनोली. ये हैं कर्नाटक के तीन जिले. इन जिलों के 12 गांव 1990 के दशक में सूखे की मार झेल रहे थे. सूखे का समाधान निकालने के लिए गांव वालों ने जीने का तरीका ही बदल लिया. उन्होंने पेड़ काटना बंद कर दिया. दैनिक भास्कर में छपी खबर के अनुसार, गुड़ादमदापुरम गांव के किसान करीबसवप्पा कागिनेले की पहल एक बंजर पहाड़ी पर लोगों ने 1 करोड़ से अधिक पौधे लगाए. इससे इलाके का 3,000 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल जंगल में बदल गया. इन 3,000 एकड़ जंगल में 86 प्रजातियों के करीब 1 करोड़ पौधे, पेड़ बन गए.

सूखे पड़े तालाब में जीवन लौटा

गांव वालों के इस प्रयास से इलाके के तालाब फिर से जिंदा हो गए. अब इन तीन जिलों के 12 तालाबों का जल स्तर फिर से बढ़ गया है. 50 कुओं और सालों से सूखे बोरवेल्स में फिर से पानी आ गया है.

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पेड़ काटने पर जुर्माना

गांव वालों ने वन विभाग के सहयोग से सिद्धेश्वर विलेज फॉरेस्ट कमेटी बनाई थी. पैट्रोलिंग टीम बनाकर जंगल की रखवाली की जाती थी. जंगल में अवैध रूप से लकड़ी काटते और शिकार करते पकड़े जाने पर जुर्माना लगया जाता है. जुर्माने से जमा हुए पैसे का इस्तेमाल जंगल के विकास पर खर्च किया जाता है.  

पौधे लगाने के पीछे वैज्ञानिक सोच

दैनिक भास्कर को वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गांव वालों ने वैसे ही पौधे लगाए जिसके बढ़ने की गति औसत से कहीं अधिक थी. यहां तक कि कई पौधे जो इलाके में विलुप्त हो गए थे दोबारा बड़ी संख्या में पनपे. इससे जंगल बहुत जल्दी तैयार हो गया. इसके साथ ही इस इलाके में खत्म हो गए कीट और दूसरे जीवों ने भी जंगल पनपने के बाद इसे अपना बसेरा बना लिया.

देश में 33 फीसदी होने जाहिए जंगल


भारत में, राष्ट्रीय वन नीति 1988 के अनुसार, देश के कम से कम 33 प्रतिशत क्षेत्र पर जंगल या वृक्ष आवरण होना चाहिए. वन स्थित रिपोर्ट 2023 के अनुसार देश में 25.17 फीसदी क्षेत्रफल पर ही वन है. अपने लक्ष्य से लगभग 8 फीदी पीछे.

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