कार में लगा यह छोटा सा बटन बचाएगा फ्यूल, मिनटों में ठंडा कर सकता है केबिन; जानें सही इस्तेमाल
गर्मी के मौसम में कार का AC तेजी से ठंडक दे और फ्यूल की खपत भी कम हो, इसके लिए एयर रीसर्कुलेशन मोड का सही इस्तेमाल बेहद जरूरी है. डैशबोर्ड पर मौजूद यह छोटा सा बटन केबिन की पहले से ठंडी हवा को दोबारा सर्कुलेट करता है, जिससे कूलिंग तेज होती है और AC कंप्रेसर पर दबाव कम पड़ता है. इसका असर फ्यूल एफिशिएंसी पर भी पड़ सकता है.
Car AC Tips: गर्मी के मौसम में कार चलाते समय AC का इस्तेमाल लगभग हर ड्राइवर करता है. हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि उनकी कार में मौजूद एक छोटा सा बटन AC की कूलिंग को तेज करने के साथ-साथ फ्यूल की खपत भी कम कर सकता है. यह बटन डैशबोर्ड पर बने कार के निशान और उसके अंदर घूमते हुए तीर के चिन्ह के रूप में दिखाई देता है. इसे एयर रीसर्कुलेशन बटन कहा जाता है. इस बटन का सही इस्तेमाल न केवल कार के केबिन को जल्दी ठंडा करता है, बल्कि AC सिस्टम पर पड़ने वाला दबाव भी कम करता है. इससे इंजन पर अतिरिक्त भार घटता है और लंबे समय में फ्यूल की बचत भी हो सकती है.
कैसे काम करता है एयर रीसर्कुलेशन मोड
जब ड्राइवर एयर रीसर्कुलेशन बटन को ऑन करता है, तो कार का AC सिस्टम बाहर की हवा को अंदर लेना बंद कर देता है. इसके बजाय, यह केबिन के अंदर मौजूद हवा को दोबारा AC सिस्टम के जरिए ठंडा करके सर्कुलेट करता रहता है. सामान्य फ्रेश एयर मोड में AC को लगातार बाहर से आने वाली गर्म हवा को ठंडा करना पड़ता है.
यदि बाहर का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस है, तो AC हर बार उसी गर्म हवा को ठंडा करने में ऊर्जा खर्च करता है. इससे कूलिंग की प्रक्रिया धीमी हो जाती है. वहीं, रीसर्कुलेशन मोड में एक बार जब केबिन का तापमान कम होने लगता है, तो AC पहले से ठंडी हो चुकी हवा को और ठंडा करता रहता है. इससे केबिन बहुत तेजी से आरामदायक तापमान तक पहुंच जाता है.
कूलिंग क्यों हो जाती है तेज
विशेषज्ञ बताते हैं कि AC वास्तव में ठंडी हवा नहीं बनाता, बल्कि हवा से गर्मी को बाहर निकालता है. ऐसे में, जब सिस्टम को पहले से ठंडी हवा मिलती है, तो उसे कम मेहनत करनी पड़ती है. उदाहरण के लिए, यदि बाहर का तापमान 35 डिग्री है और कार के अंदर का तापमान AC चलने के बाद 25 डिग्री तक आ चुका है, तो रीसर्कुलेशन मोड में सिस्टम 25 डिग्री वाली हवा को और ठंडा करेगा. अगली बार वही हवा और ठंडी होकर सिस्टम में पहुंचेगी. इस प्रक्रिया से कूलिंग काफी तेजी से होती है.
फ्यूल की खपत पर भी पड़ता है असर
कार का AC कंप्रेसर इंजन से जुड़ा होता है और बेल्ट की मदद से चलता है. जब AC को लगातार बाहर की गर्म हवा को ठंडा करना पड़ता है, तब कंप्रेसर अधिक मेहनत करता है. इसका असर सीधे इंजन पर पड़ता है और फ्यूल की खपत बढ़ सकती है. लेकिन रीसर्कुलेशन मोड में AC का काम कम हो जाता है.
आधुनिक कारों में इस्तेमाल होने वाले वेरिएबल डिस्प्लेसमेंट कंप्रेसर्स तापमान कम होने पर स्वतः कम एनर्जी का उपयोग करते हैं. इससे इंजन पर दबाव घटता है और फ्यूल एफिशिएंसी बेहतर हो सकती है. हालांकि, एक-दो सफर में इसका बड़ा अंतर दिखाई नहीं देता, लेकिन पूरे गर्मी के मौसम में रोजाना इस्तेमाल करने पर फ्यूल की अच्छी-खासी बचत संभव है.
कब करना चाहिए इस्तेमाल
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्म धूप में खड़ी कार में बैठते ही सबसे पहले रीसर्कुलेशन मोड ऑन करना चाहिए. इसके अलावा, भारी ट्रैफिक में भी यह मोड फायदेमंद रहता है क्योंकि इससे बाहर का धुआं, धूल और प्रदूषण केबिन के अंदर नहीं आता. हालांकि, इस मोड का लगातार कई घंटों तक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
यदि कार में कई लोग बैठे हैं, तो लंबे समय तक बंद केबिन में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का स्तर बढ़ सकता है. इससे हवा बासी महसूस होने लगती है और यात्रियों को थकान या सुस्ती महसूस हो सकती है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर 20 से 30 मिनट में कुछ समय के लिए फ्रेश एयर मोड का इस्तेमाल करना बेहतर रहता है.
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