E20 पेट्रोल पर चलने वाली पुरानी कार की वारंटी नहीं होगी रद्द, ऑटो कंपनियों ने दिया भरोसा
भारत में E20 पेट्रोल को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता अब काफी हद तक खत्म हो गई है. ऑटोमोबाइल कंपनियों ने भरोसा दिलाया है कि E20 ईंधन पर चलने वाले पुराने वाहनों की वारंटी रद्द नहीं होगी. पहले केवल E5 और E10 ईंधन के लिए डिजाइन किए गए वाहनों को भी इसमें शामिल किया गया है. इस घोषणा से उन वाहन मालिकों को राहत मिली है, जो कम माइलेज और इंजन समस्याओं को लेकर परेशान थे.
Ethanol blending: भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग ने एक बड़ी चिंता को दूर करते हुए पुष्टि की है कि कार निर्माता कंपनियां उन पुराने वाहनों की वारंटी जारी रखेंगी, जो E20 ईंधन का इस्तेमाल कर रहे हैं. ये वे वाहन हैं जिन्हें मूल रूप से E5 (5 फीसदी इथेनॉल) या E10 (10 फीसदी इथेनॉल) वाले ईंधन के लिए ही डिजाइन किया गया था. देश के प्रमुख ऑटोमोबाइल उद्योग समूह ने यह जानकारी रॉयटर्स को दी है. इस घोषणा ने उपभोक्ताओं के बीच फैली उस अनिश्चितता को काफी हद तक दूर कर दिया है, जो पिछले कुछ महीनों में E20 ईंधन (20 फीसदी इथेनॉल वाले पेट्रोल) के रोलआउट के बाद पैदा हुई थी.
कई वाहन मालिकों ने कम माइलेज और संभावित इंजन समस्याओं की शिकायत की थी, जिसके बाद यह सवाल उठने लगा था कि क्या कंपनियां ऐसे वाहनों की वारंटी को मान्यता देंगी.
निर्माता डीलरों को दे रहे हैं दिशा-निर्देश
ऑटो इंडस्ट्री लॉबी के अनुसार, अब कार निर्माता अपने-अपने डीलर नेटवर्क को E20 ईंधन के इस्तेमाल और संबंधित दिशा-निर्देशों के बारे में आधिकारिक तौर पर सूचित करने की प्रक्रिया में जुटे हुए हैं. इसका मतलब यह है कि ग्राहकों को अपने वाहनों की देखभाल और संभावित समस्याओं के समाधान के लिए एक स्पष्ट रोडमैप मिलने की उम्मीद है.
हाल के महीनों में, पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले एक से अधिक ईंधन विकल्पों की पुरानी व्यवस्था को बदलकर कार निर्माताओं ने अपनी नई गाड़ियों को E20 ईंधन के अनुकूल बना दिया है. हालांकि, सड़कों पर चल रहे लाखों पुराने वाहनों को लेकर चिंता बनी हुई थी.
सरकार का लक्ष्य
इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर बहस तब और तेज हो गई जब केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की कि सरकार जल्द ही पेट्रोल में 27 फीसदी इथेनॉल ब्लेंडिंग (E27) के लिए दिशा-निर्देश जारी करेगी. सरकार का मानना है कि इथेनॉल युक्त ईंधन तेल आयात बिल को कम करने और कार्बन उत्सर्जन को घटाने में मददगार है. सरकार ने यह भी स्वीकार किया है कि E20 के इस्तेमाल से पुराने वाहनों की ईंधन एफिशिएंसी में मामूली गिरावट आ सकती है.
वहीं, रेयर अर्थ मैगनेट की कमी और मंद पड़ती कार सेल से जूझ रहे ऑटो निर्माताओं ने पुराने वाहनों में E20 के इस्तेमाल को लेकर शुरुआत में मिली-जुली प्रतिक्रिया दी थी, जिससे कई उपभोक्ताओं में निराशा और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी. साथ ही, ईंधन में इथेनॉल ब्लेंडिंग की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे थे.
सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
इस पूरे मामले ने एक कानूनी मोड़ ले लिया है. E20 ईंधन के अनिवार्य इस्तेमाल को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (1 सितंबर) को सुनवाई होनी है. याचिका में इस नीतिगत बदलाव और इसके उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभाव से जुड़े मुद्दों को उठाया गया है.
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