पावरफुल परफॉर्मेंस का स्टार है टर्बो, लेकिन लापरवाही पड़ेगी महंगी! जानें कैसे करें देखभाल
टर्बोचार्ज्ड कारें पावरफुल परफॉर्मेंस और बेहतर ड्राइविंग अनुभव देती हैं, लेकिन उनकी सही देखभाल बेहद जरूरी है. ठंडे इंजन पर तेज पिक-अप न करना, लंबी ड्राइव के बाद इंजन तुरंत बंद न करना, सही आरपीएम बनाए रखना और हमेशा सही ग्रेड का इंजन ऑयल इस्तेमाल करना टर्बो की लाइफ को बढ़ाता है. गलत देखभाल से टर्बोचार्जर को गंभीर नुकसान हो सकता है.

Turbocharger care: आजकल पेट्रोल और डीजल दोनों ही तरह की कारों में टर्बोचार्जर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. यह टेक्नोलॉजी छोटे इंजन से भी अधिक पावर और बेहतर परफॉर्मेंस देती है. लेकिन, अगर आपके पास भी टर्बो इंजन वाली गाड़ी है और आप उसे लंबे समय तक बिना किसी बड़ी परेशानी के चलाना चाहते हैं, तो कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है. तो चलिए आपको बताते हैं कि टर्बोचार्ज्ड कारों की देखभाल कैसे कर सकते हैं.
क्यों होता है टर्बोचार्जर?
कंपनियों की ओर से पेट्रोल और डीजल इंजन से ज्यादा ताकत लेने के लिए ही कार में टर्बोचार्जर लगाया जाता है. यह एक बेहद महंगा कंपोनेंट है, जिसकी कीमत 18 हजार रुपये से शुरू होकर लाखों रुपये तक जा सकती है. यह कीमत कार के इंजन की क्षमता और टर्बो के टाइप पर निर्भर करती है. टर्बोचार्जर का मुख्य काम कंप्रेस्ड हवा को इंजन के चैंबर तक पहुंचाना है. इससे इंजन का टॉर्क बढ़ता है और परफॉर्मेंस के दौरान उसे ज्यादा ऑक्सीजन मिलती है, जिससे इंजन अधिक पावर जेनरेट कर पाता है.
इन बातों का रखें खास ख्याल
ठंडे इंजन पर न दें तेज पिक-अप: लंबे समय (जैसे रातभर या कई घंटों) के बाद गाड़ी स्टार्ट करने के तुरंत बाद कभी भी तेजी से एक्सलरेट न करें. कार को स्टार्ट करने के बाद कम से कम 30-60 सेकंड तक का इंतजार जरूर करें. इससे इंजन का तेल (इंजन ऑयल) पूरे सिस्टम में सर्कुलेट होकर टर्बोचार्जर जैसे महत्वपूर्ण पार्ट्स तक पहुंच जाता है और उन्हें पर्याप्त लुब्रिकेशन मिल जाता है. ऐसा न करने पर टर्बोचार्जर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है.
इंजन तुरंत बंद न करें: लंबी ड्राइव के बाद, खासकर जब आप हाईवे से आए हों या इंजन ने जोरदार परफॉर्मेंस दी हो, तो गाड़ी को तुरंत बंद न करें. ऐसा करने पर टर्बोचार्जर के अंदर की गर्म हवा फंसी रह जाती है, जो धीरे-धीरे उसकी क्षमता और लाइफ को कम कर देती है. सही तरीका यह है कि इंजन को बंद करने से पहले कुछ देर (लगभग 1-2 मिनट) उसे आइडल (idle) पर चलने दें. इससे टर्बो ठंडा हो जाएगा और उसकी लाइफ बढ़ेगी.
आरपीएम का रखें ध्यान: ठंडे इंजन पर आरपीएम को हमेशा कम रखना चाहिए. वहीं, दूसरी ओर, एक बार जब इंजन पूरी तरह से ऑपरेटिंग टेम्परेचर पर गर्म हो जाए, तो उसे बहुत लो आरपीएम पर भी नहीं चलाना चाहिए. लगातार बहुत कम आरपीएम पर चलाने से इंजन अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पाता और कार्बन जमाव जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. अपनी कार के मैनुअल में दिए गए आरपीएम रेंज के अनुसार ही गाड़ी चलाना सबसे उचित रहता है.
सही ग्रेड के इंजन ऑयल का इस्तेमाल जरूरी: यह शायद सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है. टर्बोचार्ज्ड कारों में हमेशा और सिर्फ सही ग्रेड वाला ही इंजन ऑयल इस्तेमाल करना चाहिए. गंदा, मिलावटी या गलत ग्रेड का तेल इंजन और टर्बो दोनों के लिए बेहद नुकसानदेह है. मिलावटी तेल ठीक से नहीं जलता, जिससे इंजन में अजीब आवाजें आने लगती हैं और टर्बो को सही ढंग से काम करने में दिक्कत होती है.
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