म्यूचुअल फंड और डिविडेंड निवेशकों को झटका, ब्याज कटौती का टैक्स फायदा खत्म, 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे नए नियम

बजट 2026 में म्यूचुअल फंड और डिविडेंड से कमाई करने वालों के लिए टैक्स नियम बदलने का प्रस्ताव है. पहले डिविडेंड या म्यूचुअल फंड इनकम पर ब्याज खर्च की सीमित कटौती मिलती थी. अब नए नियम के तहत ऐसी किसी भी ब्याज कटौती की अनुमति नहीं होगी. यह बदलाव एक अप्रैल 2026 से लागू होगा.

म्यूचुअल फंड से कमाई करने वालों के लिए टैक्स नियम बदलने का प्रस्ताव है. Image Credit:

Mutual Fund Taxation: अगर आप म्यूचुअल फंड या शेयरों से डिविडेंड कमाते हैं तो यह खबर आपके लिए जरूरी है. बजट 2026 में सरकार ने टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है. अब डिविडेंड और म्यूचुअल फंड यूनिट्स से होने वाली इनकम पर ब्याज खर्च की कटौती नहीं मिलेगी. पहले इस इनकम पर सीमित छूट मिलती थी. नया नियम एक अप्रैल 2026 से लागू होगा. इसका सीधा असर उन निवेशकों पर पड़ेगा जो उधार लेकर निवेश करते हैं.

पहले क्या था नियम

अब तक इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 93 के तहत डिविडेंड या म्यूचुअल फंड से होने वाली इनकम पर ब्याज खर्च की कटौती मिलती थी. यह कटौती कुल इनकम के एक तय हिस्से तक सीमित थी. अगर किसी निवेशक ने ब्याज देकर पैसा उधार लिया और उससे डिविडेंड कमाया तो वह आंशिक छूट ले सकता था. इससे टैक्स बोझ कुछ हद तक कम हो जाता था.

पुराने नियम के अनुसार ब्याज खर्च की कटौती डिविडेंड या म्यूचुअल फंड आय के बीस फीसदी तक मिलती थी. उदाहरण के तौर पर अगर किसी को एक लाख रुपये का डिविडेंड मिला और ब्याज खर्च 25 हजार रुपये था तो 20 हजार रुपये तक की कटौती मान्य होती थी. इससे टैक्स योग्य इनकम कम हो जाती थी.

बजट 2026 में क्या बदला

बजट 2026 में सरकार ने इस नियम को पूरी तरह खत्म करने का प्रस्ताव रखा है. नए नियम के तहत डिविडेंड या म्यूचुअल फंड यूनिट्स से होने वाली इनकम पर किसी भी तरह के ब्याज खर्च की कटौती नहीं मिलेगी. चाहे निवेश उधार के पैसों से किया गया हो या किसी और तरीके से.

नया नियम कब से लागू होगा

यह नया टैक्स नियम एक अप्रैल 2026 से लागू होगा. इसके बाद डिविडेंड और म्यूचुअल फंड से होने वाली इनकम को बिना किसी ब्याज कटौती के जोड़ा जाएगा. यह नियम सभी टैक्सपेयर्स पर लागू होगा, चाहे वे व्यक्तिगत निवेशक हों या कोई अन्य असेसी.

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निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा

इस बदलाव के बाद निवेशकों का टैक्स बोझ बढ़ सकता है. खासकर उन लोगों पर असर पड़ेगा जो लोन लेकर निवेश करते हैं. अब उन्हें डिविडेंड या म्यूचुअल फंड इनकम पर पूरा टैक्स देना होगा. इससे टैक्स प्लानिंग की रणनीति भी बदलनी पड़ेगी.

निवेश से पहले क्या समझना जरूरी

नए नियमों के बाद निवेशकों को यह समझना होगा कि अब ब्याज खर्च का कोई टैक्स लाभ नहीं मिलेगा. इसलिए निवेश से पहले जोखिम और टैक्स प्रभाव का आकलन जरूरी हो जाएगा. बजट 2026 का यह बदलाव निवेशकों को ज्यादा सतर्क और योजनाबद्ध बनने की दिशा में ले जा सकता है.

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