Infosys, TCS, Wipro, HCL में 1300000 कर्मचारी, व्हाइट कॉलर पर खतरा, दुनिया में छाया Mega Layoff का डर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने IT सेक्टर की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है. Anthropic के नए एंटरप्राइज AI टूल, Microsoft के AI चीफ की चेतावनी और HSBC की रिपोर्ट ने व्हाइट कॉलर नौकरियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. Infosys, TCS, Wipro और HCL Tech में काम करने वाले 13 लाख से ज्यादा कर्मचारियों के बीच अनिश्चितता बढ़ रही है. क्या AI के दौर में आपकी नौकरी सुरक्षित है?
देर रात तक लैपटॉप पर एक्सेल शीट्स खंगालना, बार-बार प्रोजेक्ट प्रपोजल के ड्राफ्ट बनाना या क्लाइंट के लिए रिपोर्ट तैयार करना, अब तक यही व्हाइट कॉलर नौकरी की पहचान थी. लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रफ्तार ने इस तस्वीर को तेजी से बदलना शुरू कर दिया है. माइक्रोसॉफ्ट के AI चीफ मुस्तफा सुलेमान का दावा है कि अगले 12 से 18 महीनों में ज्यादातर रूटीन कंप्यूटर-आधारित व्हाइट कॉलर काम AI अपने हाथ में ले सकता है. इसी बीच Anthropic के नए एंटरप्राइज AI टूल और HSBC की ताजा रिपोर्ट ने IT सेक्टर में काम करने वालों की चिंता और बढ़ा दी है. सवाल सीधा है- क्या भारत की बड़ी IT कंपनियों में मेगा लेऑफ का खतरा मंडरा रहा है?
भारत के IT दिग्गजों में कितने लोग काम करते हैं
भारत की चार सबसे बड़ी IT सर्विस कंपनियों, Infosys, TCS, Wipro और HCL Tech में मिलाकर 13 लाख से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे हैं. कंपनियों के तीसरी तिमाही नतीजों के मुताबिक Infosys का कुल हेडकाउंट करीब 3.37 लाख, TCS में 5.82 लाख, Wipro में 2.42 लाख और HCL Tech में 2.26 लाख से ज्यादा लोग हैं. इनमें बड़ी संख्या ऐसे प्रोफेशनल्स की है जिनका काम रिपोर्टिंग, डॉक्यूमेंटेशन, डेटा एनालिसिस, कंप्लायंस चेक और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट जैसे रूटीन टास्क पर टिका है. यही वो क्षेत्र हैं जहां AI सबसे तेजी से पैर जमा रहा है.
Anthropic का नया टूल क्यों मचा रहा है हाहाकार
AI कंपनी Anthropic ने अपनी एंटरप्राइज AI टूल में एक नया ऑटोमेशन लेयर जोड़ी है. यह टूल सलाह देने या मदद करने के अलावा पूरा बिजनेस वर्कफ्लो खुद संभाल सकते है.
यह AI लीगल डॉक्यूमेंट रिव्यू कर सकता है, कंप्लायंस और फाइनेंशियल रिकंसिलिएशन देख सकता है, सेल्स प्लानिंग और मार्केटिंग एनालिसिस कर सकता है, यहां तक कि SQL रिपोर्टिंग और डेटा विजुअलाइजेशन भी.
आसान शब्दों में कहें तो, जो काम पहले अलग-अलग सॉफ्टवेयर और टीमों से होता था, वह अब एक ही AI प्लेटफॉर्म कर सकता है. इससे कंपनियों का खर्च घट सकता है, लेकिन कर्मचारियों की जरूरत भी कम हो सकती है.
Microsoft और AI की बड़ी रणनीति
मुस्तफा सुलेमान के बयान को एक चेतावानी के तौर पर लेने की जरूरत है. क्योंकि इसके पीछे माइक्रोसॉफ्ट की बड़ी रणनीति है. कंपनी “प्रोफेशनल-ग्रेड AGI” पर काम कर रही है, ऐसा AI जो लगभग हर तरह के प्रोफेशनल कंप्यूटर टास्क को संभाल सके.
माइक्रोसॉफ्ट धीरे-धीरे OpenAI पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है और खुद के AI मॉडल तैयार कर रहा है. मकसद साफ है- एंटरप्राइज ग्राहकों को जल्दी से जल्दी अपने AI सिस्टम से जोड़ना, ताकि भविष्य में कंपनियां सीधे इंसानों की बजाय AI पर भरोसा करें.
HSBC की रिपोर्ट क्या कहती है
HSBC की ग्लोबल इनवेस्टमेंट रिसर्च रिपोर्ट एक अहम बात पर जोर देती है. रिपोर्ट के मुताबिक AI सॉफ्टवेयर को पूरी तरह खत्म नहीं करेगा, बल्कि सॉफ्टवेयर के अंदर ही “एम्बेड” होकर काम करेगा. यानी AI खुद फैसले लेने वाला दिमाग होगा और सॉफ्टवेयर उसे लागू करने वाली मशीन.
लेकिन रिपोर्ट यह भी मानती है कि एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर में AI एजेंट्स आने से कई हाई-वैल्यू लेकिन रूटीन टास्क ऑटोमेट हो जाएंगे. इसका सीधा असर उन नौकरियों पर पड़ेगा, जहां काम का बड़ा हिस्सा तय प्रक्रिया और डेटा पर आधारित है.
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क्या सच में व्हाइट कॉलर जॉब खत्म हो जाएंगी?
Anthropic, Microsoft और HSBC की बातों को जोड़कर देखें तो तस्वीर डरावनी जरूर लगती है, लेकिन पूरी तरह निराशाजनक नहीं. AI उन कामों को सबसे पहले प्रभावित करेगा जो बार-बार, तय नियमों के हिसाब से और कम मानवीय जजमेंट के साथ होते हैं.
वहीं जिन नौकरियों में इंसानी समझ, क्रिएटिव सोच, क्लाइंट से रिश्ता और जटिल फैसले लेने की जरूरत है, वहां AI अभी इंसान की जगह नहीं ले सकता. खुद HSBC की रिपोर्ट भी मानती है कि एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर में AI “सबऑर्डिनेट” भूमिका में रहेगा, यानी इंसानों के साथ मिलकर काम करेगा.
