प्रॉफिट कमाने के लिए ओला इलेक्ट्रिक ने कॉस्ट में 50 फीसदी कटौती करने का रखा टारगेट, जानें- क्या होगा असर
सॉफ्टबैंक के सपोर्ट वाली इस कंपनी को तिमाही में 4.87 अरब रुपये ($53.75 मिलियन) का नुकसान हुआ, क्योंकि इसके नए मॉडल्स को बनाने में कम खर्च आया, जिससे बिक्री में आई गिरावट की कुछ हद तक भरपाई हो गई. तीसरी तिमाही में नुकसान कम होने के बाद, कंपनी अब प्रॉफिटेबल होने की ओर बढ़ रही है.
घाटे में चल रही भारतीय टू-व्हीलर बनाने वाली कंपनी ओला इलेक्ट्रिक ने शुक्रवार को कहा कि वह आने वाली तिमाहियों में अपनी ऑपरेटिंग कॉस्ट 50 फीसदी तक कम करना चाहती है. तीसरी तिमाही में नुकसान कम होने के बाद, कंपनी अब प्रॉफिटेबल होने की ओर बढ़ रही है. सॉफ्टबैंक के सपोर्ट वाली इस कंपनी को तिमाही में 4.87 अरब रुपये ($53.75 मिलियन) का नुकसान हुआ, क्योंकि इसके नए मॉडल्स को बनाने में कम खर्च आया, जिससे बिक्री में आई गिरावट की कुछ हद तक भरपाई हो गई.
50 फीसदी मार्केट शेयर
ओला, जो कभी अपने पीक पर 50 फीसदी मार्केट शेयर के साथ भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में सबसे आगे थी, पिछले साल अपने सर्विस सेंटर्स के बारे में शिकायतों की बाढ़ से लड़खड़ा गई, जिसकी वजह से रेगुलेटरी जांच हुई.
ऑपरेटिंग लेवरेज में सुधार
ओला ने शेयरहोल्डर्स को लिखे एक लेटर में कहा, ‘क्योंकि EV की पहुंच धीमी हो गई है और हमारी सर्विस एग्जीक्यूशन को मजबूत करने की जरूरत है, इसलिए हमने अपने रिटेल फुटप्रिंट, कॉस्ट स्ट्रक्चर और ऑपरेटिंग मॉडल को एक सस्टेनेबल स्थिर स्थिति में लाने का फैसला किया है. इसका नतीजा यह है कि स्ट्रक्चर के हिसाब से वॉल्यूम कम है और ऑपरेटिंग लेवरेज में काफी सुधार हुआ है.
ऑपरेटिंग खर्च
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बनाने वाली कंपनी का अब अगले कुछ क्वार्टर में ऑपरेटिंग खर्च 2.5 अरब रुपये से 3 अरब रुपये रहने का अनुमान है, जो तीसरे क्वार्टर में 4.84 अरब रुपये था. कंपनी ने कहा कि अगर वह यह टारगेट हासिल कर लेती है, तो ऑपरेटिंग प्रॉफिट के लिए जरूरी मंथली सेल्स घटकर 15,000 रह जाएगी. दिसंबर क्वार्टर में ओला इलेक्ट्रिक की एवरेज मंथली सेल्स 11,000 थी.
नौकरियों में कटौती
ओला ने हाल की तिमाहियों में ऑटोमेशन बढ़ाकर, नौकरियों में कटौती करके और EV सेल के इन-हाउस प्रोडक्शन को बढ़ाकर, साथ ही नए कॉस्ट-एफिशिएंट मॉडल्स की लाइनअप के जरिए अपनी ऑपरेटिंग कॉस्ट कम की है. कंपनी ने कहा कि उसके सर्विस सेंटर्स की दिक्कतों को ठीक करने की कोशिशों के साथ-साथ इन-हाउस EV सेल से चलने वाले मॉडल्स की ज्यादा रेंज से ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा.
कंपनी के डेटा के मुताबिक, दिसंबर तक तीन महीनों में सेल्स 61% गिरी, जिससे रेवेन्यू में 55% की गिरावट आई. कंपनी ने अपना पूरे साल का रेवेन्यू टारगेट 30 अरब से 32 अरब रुपये रखा, साथ ही अक्टूबर-मार्च तक 100,000 यूनिट्स का वॉल्यूम टारगेट भी रखा.
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