66 की उम्र में भी नहीं रुके कदम, रिटायर्ड क्लर्क ने Blinkit डिलीवरी से पूरे किए 10000 ऑर्डर, वजह कर देगा हैरान

अहमदाबाद के 66 साल के दिनेश महंत ठाकोरदास ने 26 साल तक नौकरी करने के बाद भी काम करना नहीं छोड़ा. खास बात यह है कि वह मजबूरी में नहीं, बल्कि अपने शौक के लिए काम कर रहे हैं. उन्होंने डिलीवरी पार्टनर बनकर एक नई शुरुआत की और अब तक हजारों ऑर्डर पूरे कर चुके हैं.

दिनेश महंत ठाकोरदास Image Credit: Canva/Money9 live

Blinkit Delivery Dinesh Mahant Thakordas: रिटायरमेंट के बाद ज्यादातर लोग आराम की जिंदगी चुनते हैं. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो उम्र को अपनी राह में रुकावट नहीं बनने देते. अहमदाबाद के 66 साल के दिनेश महंत ठाकोरदास की कहानी ऐसी ही है. उन्होंने 26 साल तक नौकरी करने के बाद भी काम करना नहीं छोड़ा. खास बात यह है कि वह मजबूरी में नहीं, बल्कि अपने शौक के लिए काम कर रहे हैं. उन्होंने डिलीवरी पार्टनर बनकर एक नई शुरुआत की और अब तक हजारों ऑर्डर पूरे कर चुके हैं.

उनकी कमाई घर खर्च के लिए नहीं, बल्कि घूमने-फिरने के लिए है. उनकी यह सोच और अनुशासन सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है. कुछ लोग इसे प्रेरणा मान रहे हैं तो कुछ लोग उनकी सेहत को लेकर चिंता भी जता रहे हैं. यह कहानी दिखाती है कि जिंदगी को अपने तरीके से जीने का नजरिया कितना अहम होता है.

रिटायरमेंट के बाद नई शुरुआत

दिनेश ठाकोरदास पहले एक बीमा कंपनी में क्लर्क थे. उन्होंने 26 साल नौकरी की और अपने परिवार को संभाला. उनके तीनों बच्चे अब अपने-अपने जीवन में सेट हैं. उनके ऊपर कोई आर्थिक जिम्मेदारी भी नहीं है. इसके बावजूद उन्होंने घर बैठने के बजाय काम करने का फैसला किया. उन्होंने Blinkit के साथ डिलीवरी पार्टनर के रूप में जुड़ना चुना.

रोजाना का तय रूटीन

न्यूज अलजेबरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिनेश का दिन सुबह 5 बजे शुरू होता है. वह 6 बजे तक कंपनी के स्टोर पहुंच जाते हैं. वह सुबह की शिफ्ट में काम करते हैं, जो करीब 11:30 बजे तक चलती है. इसके बाद वह खुद तय करते हैं कि आगे काम करना है या नहीं. पिछले दो साल में उन्होंने 10,000 से ज्यादा डिलीवरी पूरी कर ली हैं.

कमाई का खास मकसद

दिनेश की कमाई का मकसद अलग है. वह पैसे घर खर्च में नहीं लगाते. वह इस पैसे से देश और विदेश घूमने जाते हैं. उनके लिए काम सिर्फ कमाई नहीं, बल्कि जीवन को एक्टिव रखने का तरीका है. उनका मानना है कि अनुभव ही सबसे बड़ा शिक्षक होता है. उनकी कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई. कई लोगों ने उनकी मेहनत और अनुशासन की तारीफ की.
कुछ लोगों ने इसे प्रेरणा बताया और कहा कि उम्र सिर्फ एक संख्या है.

कुछ लोगों की चिंता भी

हालांकि सभी लोग इस फैसले से सहमत नहीं हैं. कुछ लोगों ने उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई. उनका मानना है कि ज्यादा काम करने से शरीर पर असर पड़ सकता है. दिनेश ठाकोरदास की कहानी एक अलग सोच को दिखाती है. यह बताती है कि उम्र के बाद भी जिंदगी को अपने तरीके से जिया जा सकता है. हालांकि संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है.

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