ताजमहल नहीं, चमड़े से चलता है आगरा! अमेरिका में ₹43,452 करोड़ के बिजनेस पर संकट, बजट से टिकी उम्मीदें
आगरा की पहचान सिर्फ ऐतिहासिक धरोहरों तक सीमित नहीं है. यह शहर भारत के निर्यात इंजन का एक अहम हिस्सा रहा है. लेकिन हाल के वैश्विक घटनाक्रमों ने इस उद्योग को नई चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है. अब सबकी नजरें 1 फरवरी पर हैं, जहां से इस बिजनेस की दिशा तय हो सकती है.
Agra Leather and Footwear Business: आगरा को अक्सर केवल ऐतिहासिक स्मारकों के शहर के रूप में देखा जाता है, लेकिन असल पहचान उस औद्योगिक ताकत की है जिसने इस शहर को भारत के सबसे बड़े फुटवियर निर्यात केंद्रों में खड़ा कर दिया है. चमड़ा और फुटवियर उद्योग आगरा की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, एक ऐसा सेक्टर जो न सिर्फ देश की घरेलू जरूरतें पूरी करता है, बल्कि अमेरिका और यूरोप जैसे कठिन अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी भारत का नाम मजबूती से रखता है.
आज आगरा में करीब 10,000 माइक्रो यूनिट, 150 छोटी, 30 मझोली और 15 बड़ी औद्योगिक इकाइयां सक्रिय हैं. ये इकाइयां मिलकर लगभग 1,00,000 लोगों को रोजगार देती हैं. उत्पादन का पैमाना इतना बड़ा है कि आगरा भारत की करीब 65% घरेलू फुटवियर मांग को पूरा करता है और देश के कुल leather footwear exports में लगभग 37% योगदान देता है.
₹43,452 करोड़ का निर्यात, लेकिन बढ़ता वैश्विक जोखिम
आगरा से हर साल करीब ₹5,000 करोड़ मूल्य के जूते विदेशों में निर्यात होते हैं. यूरोप लंबे समय से इसका मुख्य बाजार रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में अमेरिका आगरा के निर्यातकों के लिए सबसे तेजी से बढ़ता बाजार बनकर उभरा. चमड़े के फुटवियर पर अमेरिका में ड्यूटी को 5–8% से बढ़ाकर 25% कर दिया गया, और आगे और बढ़ोतरी की आशंका ने उद्योग में अनिश्चितता पैदा कर दी.
इसके अलावा भारत के चमड़ा निर्यात में बीते कुछ वर्षों में तेज बढ़त देखने को मिली है. वर्ष 2020–21 में जहां भारत का कुल चमड़ा निर्यात 3,681 मिलियन डॉलर था, वहीं 2024–25 तक यह बढ़कर 4,828 मिलियन डॉलर (43,452 करोड़ रुपये) पहुंच गया, यानी करीब 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. इसी अवधि में अमेरिका को होने वाला निर्यात भी तेजी से बढ़ा और 645 मिलियन डॉलर से उछलकर 1,045 मिलियन डॉलर हो गया, जो लगभग 62 फीसदी की बढ़त को दर्शाता है.
हालात ऐसे रहे कि पिछली तिमाही में ही आगरा के कुल निर्यात कारोबार का लगभग आधा हिस्सा, करीब 594 मिलियन डॉलर मूल्य का, अमेरिकी बाजार से जुड़ा रहा. लेकिन हाल के वर्षों में अमेरिका आगरा के निर्यातकों के लिए सबसे तेजी से बढ़ता बाजार बनकर उभरा. यही वजह है कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीय उत्पादों पर दोबारा सख्त टैरिफ लगाने का फैसला किया, तो इसका सीधा असर आगरा के कारोबार पर पड़ा.
उद्योग की चिंता
लेदर उद्योग से जुड़े वरिष्ठ जानकारों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ ऐसे समय में सामने आए हैं, जब भारतीय निर्यातक अमेरिकी बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे थे. हाल ही में चमड़ा उद्योग के प्रतिनिधियों ने चेन्नई में संसदीय स्थायी समिति (वाणिज्य) के समक्ष पेश होकर इन टैरिफ के संभावित असर को लेकर अपनी चिंताएं विस्तार से रखीं.
इस प्रतिनिधिमंडल में काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स के पूर्व चेयरमैन पी. आर. अकील अहमद सहित कई अनुभवी उद्योग प्रतिनिधि शामिल थे. परिषद की ओर से समिति को अवगत कराया गया कि अमेरिका द्वारा भारतीय चमड़ा उत्पादों पर लगाए गए करीब 50 प्रतिशत तक के शुल्क ने भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को कमजोर कर दिया है. नतीजतन, अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद अब पहले की तुलना में महंगे पड़ रहे हैं.
उद्योग अधिकारियों के अनुसार अमेरिका भारत के लिए चमड़ा और उससे जुड़े उत्पादों का एक प्रमुख गंतव्य रहा है, लेकिन टैरिफ बढ़ने के बाद भारतीय निर्यातकों को अन्य देशों के आपूर्तिकर्ताओं से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है. इसका असर ऑर्डर बुक और निर्यात मात्रा दोनों पर दिखाई देने लगा है.
प्रतिनिधियों ने समिति का ध्यान इस ओर भी दिलाया कि चमड़ा उद्योग देश में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करता है. यदि यह व्यापारिक दबाव लंबे समय तक बना रहता है, तो इसके दुष्परिणाम सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी महसूस किए जाएंगे.
यह भी पढ़ें: भारत ने रूस से कच्चे तेल का घटाया आयात, 30% कम लिया तेल, रिलायंस ने रोकी सप्लाई, IOC और नायरा ने बढ़ाई खरीदारी
बजट से उम्मीदें
1 फरवरी को पेश होने वाला बजट आगरा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. उद्योग की मांग है कि सरकार export-linked incentives, सस्ता और आसान वर्किंग कैपिटल, और ड्यूटी ड्रॉबैक व GST रिफंड की प्रक्रिया को तेज करे. साथ ही, अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए रूस, खाड़ी देशों और उभरते बाजारों के लिए ट्रेड प्रमोशन स्कीम को भी मजबूत किया जाए.