भारत ने रूस से कच्चे तेल का घटाया आयात, 30% कम लिया तेल, रिलायंस ने रोकी सप्लाई, IOC और नायरा ने बढ़ाई खरीदारी
अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात घट गया है, हालांकि IOC और नायरा एनर्जी ने रूस की ओर से कच्चे तेल पर दी जा रही छूट का फायदा उठाते हुए खरीद बढ़ाई है. वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज समेत कई निजी रिफाइनरों ने रूसी तेल की सप्लाई पूरी तरह रोक दी है.
India-Russia crude import: अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते भारत के रूसी कच्चे तेल आयात में बदलाव देखने को मिला है. इस महीने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी ने रूस से तेल की खरीद बढ़ाई है, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कोई भी सप्लाई नहीं ली है.
ग्लोबल डेटा और एनालिटिक्स फर्म क्लेर (Kpler) के अनुसार, इस महीने के पहले पखवाड़े में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात औसतन 11.8 लाख बैरल प्रतिदिन रहा. यह एक साल पहले और 2025 के औसत स्तर से करीब 30% कम है. दिसंबर के मुकाबले आयात में लगभग 3% की गिरावट दर्ज की गई है.
प्रतिबंध का दिखा असर
अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत में रूस से तेल के खरीदारों की संख्या सीमित हो गई है. इस महीने अब तक केवल इंडियन ऑयल, नायरा एनर्जी और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने ही रूस से तेल के कार्गो उठाए हैं.
इंडियन ऑयल को करीब 5 लाख बैरल प्रतिदिन तेल मिला, जो रूस से भारत भेजे गए कुल तेल का लगभग 43% है. यह मई 2024 के बाद कंपनी का सबसे बड़ा औसत आयात है और 2025 के औसत से 64% अधिक है.
नायरा एनर्जी इस अवधि में दूसरा सबसे बड़ा खरीदार रहा. कंपनी ने औसतन 4.71 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी तेल आयात किया, जो भारत आने वाले कुल रशियन तेल का करीब 40% है. यह पिछले कम से कम दो वर्षों में नायरा का सबसे ऊंचा स्तर है और 2025 के औसत से 56% ज्यादा है.
BPCL को रूस से करीब 2 लाख बैरल प्रतिदिन तेल मिला, जबकि पिछले साल उसका औसत आयात 1.85 लाख बैरल प्रतिदिन था. वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, HPCL-मित्तल एनर्जी और मंगलौर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड को इस महीने के पहले पखवाड़े में कोई कार्गो नहीं मिला.
डिस्काउंट बढ़ा
इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय और चीन के खरीदारों की मांग घटने से रूस ने तेल पर छूट बढ़ाई है. रूस के प्रमुख यूराल्स क्रूड पर भारतीय बंदरगाहों तक डिलीवरी के लिए छूट बढ़कर 5-6 डॉलर प्रति बैरल हो गई है, जो पहले करीब 2 डॉलर थी. यह बढ़ोतरी अमेरिका की ओर से पिछले साल अक्टूबर में रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद देखी गई.
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अधिकारियों के अनुसार, इसी बढ़ी हुई छूट का फायदा उठाने के लिए इंडियन ऑयल ने जनवरी में रूस से तेल की खरीद बढ़ाई. हालांकि अमेरिकी आलोचना और अतिरिक्त टैरिफ की चेतावनियों के बाद कई भारतीय रिफाइनरों ने रूसी तेल के आयात को सीमित किया है.
रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद अधिकांश भारतीय रिफाइनरों ने प्रतिबंधित रूसी सप्लायरों से तेल लेना बंद कर दिया है. रिलायंस इंडस्ट्रीज, जिसका रोसनेफ्ट के साथ लॉन्ग टर्म करार है, ने भी रूसी कंपनियों से कच्चे तेल की आपूर्ति रोक दी है.
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