एयर इंडिया को ₹10000 करोड़ के नए लोन की जरूरत, कर्ज देने में हिचकिचा रहे कुछ बैंक; नहीं मिल रही ये जानकारी

मार्च 2026 में खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में एयर इंडिया का कुल घाटा दोगुने से अधिक बढ़कर 22,238 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले 10,858 करोड़ रुपये था. जून में टाटा संस के बोर्ड ने एयर इंडिया में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की नई पूंजी लगाने को मंजूरी दी.

एयर इंडिया Image Credit: tv9 bharatvarsh

Highlights

  • एयर इंडिया के कैशफ्लो और सुधार की योजनाओं के बारे में जानकारी की मांग.
  • एयर इंडिया का कुल घाटा दोगुने से अधिक बढ़कर 22,238 करोड़ रुपये हो गया.
  • टाटा संस एयरलाइन में कम से कम 51% हिस्सेदारी बनाए रखेगी.

एयर इंडिया अपने बेड़े को बढ़ाने, विमानों को अपग्रेड करने और कामकाज के खर्चों के लिए बैंकों से लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नया लोन लेना चाहती है. हालांकि, कुछ लेंडर घाटे में चल रही एयरलाइन को नया क्रेडिट देने में हिचकिचा रहे हैं, क्योंकि उन्हें इसके कैशफ्लो के बारे में साफ जानकारी नहीं है. मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने यह बात बताई. यह हिचकिचाहट टाटा ग्रुप की एयरलाइन की AAA क्रेडिट रेटिंग होने के बावजूद है.

कैशफ्लो की चिंता

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि कुछ प्राइवेट सेक्टर के बैंकों ने नया लोन देने से पहले एयर इंडिया के कैशफ्लो और सुधार की योजनाओं के बारे में और साफ जानकारी मांगी है. हालांकि, सरकारी बैंक मौजूदा क्रेडिट लाइनों को रिन्यू करने के लिए तैयार हैं, क्योंकि टाटा ग्रुप के साथ उनके संबंध अच्छे हैं और एयर इंडिया का क्रेडिट स्कोर भी बहुत अच्छा है, जो सबसे कम जोखिम का संकेत देता है.

टाटा ग्रुप ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की. ग्रुप के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि टाटा ब्रांड की मजबूती के कारण ग्रुप को अपनी किसी भी कंपनी, जिसमें एयर इंडिया भी शामिल है, के लिए फंड जुटाने में कभी कोई मुश्किल नहीं हुई है.

चल रही है बातचीत

मामले से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, ‘सभी नए बिजनेस, खासकर एविएशन सेक्टर में मुनाफा कमाने में कुछ समय लगता है और मुनाफे के मामले में कोई असामान्य स्थिति नहीं है. लोन की दरों पर बातचीत चल रही है और एयरलाइन ने पहले ही एक बड़े बैंक से काफी बड़ा लोन हासिल कर लिया है.’

एयर इंडिया का घाटा

मार्च 2026 में खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में एयर इंडिया का कुल घाटा दोगुने से अधिक बढ़कर 22,238 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले 10,858 करोड़ रुपये था. यह गिरावट कुछ हद तक विदेशी मुद्रा के नुकसान के कारण हुई, जो FY25 में 1,545 करोड़ रुपये से बढ़कर FY26 में 7,388 करोड़ रुपये हो गया.

एयर इंडिया में हिस्सेदारी का पैटर्न

लेंडर्स के लिए राहत की बात यह भरोसा है कि टाटा संस एयरलाइन में कम से कम 51% हिस्सेदारी बनाए रखेगी. हालांकि, लेंडर्स को चिंता है कि लोन का पेमेंट प्रमोटर द्वारा लगातार इक्विटी डालने पर निर्भर हो सकता है. एयर इंडिया में टाटा संस की हिस्सेदारी 74.9% है, जबकि सिंगापुर एयरलाइंस के पास बाकी 25.1% हिस्सेदारी है.

जून में टाटा संस के बोर्ड ने एयर इंडिया में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की नई पूंजी लगाने को मंजूरी दी.

सबसे बड़ा निवेश प्लान

2021 में कंपनी को खरीदने के लिए 18,000 करोड़ रुपये लगाने के बाद से एयरलाइन में यह उनका सबसे बड़ा निवेश है. लेंडर (कर्ज देने वाले) टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर एन. चंद्रशेखरन के बने रहने के बारे में भी अधिक स्पष्टता चाहते हैं. चंद्रशेखरन एयर इंडिया के बोर्ड के चेयरमैन भी हैं.

एयरलाइन पर कितना है कर्ज?

एयरलाइन पर लगभग 40,000 करोड़ रुपये का बकाया कर्ज है. मई के आखिर में रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की जानकारी के अनुसार, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया इसका सबसे बड़ा लेंडर है, इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक का नंबर आता है.

टाटा ग्रुप के लिए एयर इंडिया रणनीतिक रूप से बहुत अहम है. सरकार के विनिवेश कार्यक्रम के तहत, ग्रुप की पूरी तरह से अपनी सब्सिडियरी ‘टैलस प्राइवेट लिमिटेड’ के जरिए सरकार से इस एयरलाइन को खरीदा गया था. इस अधिग्रहण के बाद टाटा ग्रुप इंडिगो के बाद भारत की दूसरी सबसे बड़ी एविएशन कंपनी बन गई है.

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