टैरिफ वॉर के बीच भारत ने बढ़ाई अमेरिका से तेल की खरीदारी, सरकारी से लेकर प्राइवेट तक सब कंपनियां शामिल
India-US Oil Import: यह कदम दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने और साथ ही अमेरिका के साथ देश के व्यापार घाटे को भी कम करने में मदद कर सकता है. एशिया के लिए अमेरिकी कच्चे तेल के आर्बिट्रेज विंडो खुलने के बाद, भारतीय रिफाइनरियों और अन्य एशियाई रिफाइनरियों ने खरीदारी बढ़ा दी है.
India-US Oil Import: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर के बीच एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. खबर है कि प्रतिस्पर्धी कीमतों के कारण भारतीय रिफाइनरियों ने इस महीने अमेरिका से कच्चे तेल की खरीदारी बढ़ा दी है. यह कदम दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने और साथ ही अमेरिका के साथ देश के व्यापार घाटे को भी कम करने में मदद कर सकता है. ट्रेड सोर्स के अनुसार, देश की टॉप रिफाइनरी कंपनी, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने अक्टूबर और नवंबर में डिलीवरी के लिए टेंडर के जरिए 50 लाख बैरल अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड (WTI) खरीदा है.
सरकारी और प्राइवेट दोनों कंपनियों ने की खरीदारी
ईटी ने अन्य सूत्रों के हवाले से लिखा कि यह तब हुआ जब एक अन्य सरकारी रिफाइनर भारत पेट्रोलियम कॉर्प ने 2 मिलियन बैरल अमेरिकी WTI क्रूड खरीदा, जबकि प्राइवेट रिफाइनर रिलायंस इंडस्ट्रीज ने विटोल से 2 मिलियन बैरल WTI क्रूड खरीदा है.
एशियाई रिफाइनरियों ने खरीदारी बढ़ाई
एशिया के लिए अमेरिकी कच्चे तेल के आर्बिट्रेज विंडो खुलने के बाद, भारतीय रिफाइनरियों और अन्य एशियाई रिफाइनरियों ने खरीदारी बढ़ा दी है. भारत पर भी अधिक अमेरिकी तेल खरीदने का दबाव है, क्योंकि अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद का हवाला देते हुए भारतीय इंपोर्ट पर टैरिफ दोगुना करके 50 फीसदी कर दिया है.
सूत्रों ने बताया कि यूरोपीय व्यापारियों गनवोर और इक्विनोर ने 2-2 मिलियन बैरल बेचे, जबकि मर्कुरिया ने आईओसी को 1 मिलियन बैरल बेचे. इस बीच, बीपीसीएल ने नाइजीरियाई यूटापेट तेल की भी पहली खरीद की है क्योंकि वह अपने कच्चे तेल के भंडार में नए ग्रेड शामिल कर रही है.
अमेरिका का भारत पर आरोप
अमेरिकी अधिकारियों ने भारत पर डिस्काउंट वाले रूसी तेल से मुनाफा कमाने का आरोप लगाया है, जबकि भारतीय अधिकारियों ने पश्चिमी देशों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है, क्योंकि यूरोपीय संघ और अमेरिका अभी भी अरबों डॉलर मूल्य के रूसी सामान खरीदते हैं.
रूस से भारत का तेल आयात
पिछले साल भारत के कच्चे तेल के आयात का एक-तिहाई से अधिक हिस्सा रूस से आया था. इस व्यापारिक रिश्ते की अमेरिका ने आलोचना की है. ट्रंप के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने पिछले हफ्ते पत्रकारों से कहा था कि ‘ऐसा लगता है कि भारत यूक्रेन में हुए रक्तपात में अपनी भूमिका स्वीकार नहीं करना चाहता.’
यूक्रेन में युद्ध के मद्देनजर भारत ने रियायती रूसी तेल के आयात को बढ़ाकर अरबों डॉलर बचाए हैं. रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषकों का अनुमान है कि भारत ने 2022 की शुरुआत से रूस से तेल आयात बढ़ाकर कम से कम 17 अरब डॉलर की बचत की है.