अनिल अंबानी ग्रुप पर ED का बड़ा एक्‍शन, ₹1,885 करोड़ की संपत्ति की अटैच, फर्जीवाड़े और पैसों की हेराफेरी का आरोप

ED ने अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़ी ₹1,885 करोड़ की संपत्तियों को फर्जीवाड़े और पैसों की हेराफेरी के आरोप में अस्थायी रूप से अटैच किया है. यह कार्रवाई रिलायंस की कई कंपनियों और यस बैंक से जुड़े कथित बैंकिंग फ्रॉड मामलों में की गई है. पहले की कार्रवाई को मिलाकर अब तक कुल जब्त संपत्तियों का आंकड़ा करीब ₹12,000 करोड़ पहुंच गया है.

ed action on anil ambani group Image Credit: money9 live

ED action on Anil Ambani group: अनिल अंबानी दोबारा मुसीबत में घिर गए हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर उनकी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की है. ईडी ने बुधवार, 28 जनवरी को अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़ी ₹1,885 करोड़ की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच करने की बड़ी कार्रवाई की है. इन संपत्तियों में बैंक बैलेंस, रिसीवेबल्स, अनलिस्टेड निवेशों में शेयरहोल्डिंग और अचल संपत्तियां शामिल हैं. ED ने अपनी जांच के आधार पर आरोप लगाया है कि रिलायंस अनिल अंबानी समूह की कई कंपनियों ने सार्वजनिक धन का धोखाधड़ी से डायवर्जन किया है.

इन कंपनियों पर कार्रवाई

नई कार्रवाई चार अलग-अलग आदेशों के जरिए की गई है. ये मामले रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड और यस बैंक, तथा रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड से जुड़े हुए हैं. ED के मुताबिक, जब्त की गई संपत्तियों में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की BSES यमुना पावर लिमिटेड, BSES राजधानी पावर लिमिटेड और मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड में हिस्सेदारी शामिल है. इसके अलावा वैल्यू कॉर्प फाइनेंस एंड सिक्योरिटीज लिमिटेड के नाम ₹148 करोड़ का बैंक बैलेंस और ₹143 करोड़ के रिसीवेबल्स भी कुर्क किए गए हैं. साथ ही रिलायंस समूह के दो वरिष्ठ कर्मचारियों अंगराई सेतुरमन के नाम एक आवासीय मकान और पुनीत गर्ग के नाम शेयर व म्यूचुअल फंड के रूप में चल संपत्तियां भी अस्थायी रूप से अटैच की गई हैं.

फर्जीवाड़े और हेराफेरी का आरोप

ED ने अपनी जांच के आधार पर आरोप लगाया है कि रिलायंस अनिल अंबानी समूह की कई कंपनियों ने सार्वजनिक धन का धोखाधड़ी से डायवर्जन किया. इनमें RCom, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL), रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर लिमिटेड शामिल हैं.

जानें क्‍या था मामला

एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2017 से 2019 के बीच यस बैंक ने RHFL के इंस्ट्रूमेंट्स में ₹2,965 करोड़ और RCFL में ₹2,045 करोड़ का निवेश किया था. दिसंबर 2019 तक ये निवेश नॉन-परफॉर्मिंग हो गए. उस समय RHFL पर ₹1,353.50 करोड़ और RCFL पर ₹1,984 करोड़ बकाया था. जांच में यह भी सामने आया कि RHFL और RCFL को कुल मिलाकर ₹11,000 करोड़ से अधिक का सार्वजनिक धन मिला.

ED का आरोप है कि यस बैंक की ओर से निवेश से पहले ये बड़ी राशि पहले रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड से प्राप्त हुई थी. सेबी के नियमों के तहत रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड सीधे अनिल अंबानी समूह की वित्तीय कंपनियों में निवेश नहीं कर सकता था, क्योंकि यह हितों के टकराव का मामला था. इसलिए सार्वजनिक धन को दूसरे तरीके यानी यस बैंक के जरिए अनिल अंबानी समूह की कंपनियों तक पहुंचाया गया.

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बैंकिंग फ्रॉड का भी इल्‍जाम

ED ने यह भी बताया कि वर्ष 2010-12 के बाद से RCom और उसकी समूह कंपनियों ने घरेलू और विदेशी बैंकों से भारी कर्ज लिया, जिसमें से करीब ₹40,185 करोड़ अब भी बकाया है. नौ बैंकों ने इन खातों को धोखाधड़ी वाला घोषित कर दिया है. जांच में यह भी आरोप है कि समूह की कंपनियों ने करीब ₹13,600 करोड़ का इस्तेमाल लोन की एवरग्रीनिंग के लिए किया, ₹12,600 करोड़ से ज्यादा की राशि संबंधित पक्षों को ट्रांसफर की गई और ₹1,800 करोड़ से अधिक रकम फिक्स्ड डिपॉजिट, म्यूचुअल फंड जैसे निवेशों में लगाई गई.

पहले भी हुई थी कार्रवाई

ED इससे पहले भी रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी मामलों में ₹10,117 करोड़ से अधिक की संपत्तियां जब्त कर चुका है. अब इन सभी मामलों में कुल जब्‍त की गई संपत्तियों का मूल्य करीब ₹12,000 करोड़ तक पहुंच गया है.