चीन ने 17 साल के निचले स्तर पर घटाई US ट्रेजरी होल्डिंग, गोल्ड रिजर्व बढ़ाए, क्या सोने की कीमतें फिर पकड़ेंगी रफ्तार?
वैश्विक बाजार में एक बड़े देश के हालिया कदम ने निवेशकों का ध्यान खींचा है. विदेशी परिसंपत्तियों के संतुलन में हो रहे बदलाव से सुरक्षित निवेश विकल्पों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है. इसका असर किन बाजारों पर पड़ सकता है और आगे की दिशा क्या होगी, इस पर नजर जरूरी है.
China gold reserves increase: वैश्विक अर्थव्यवस्था में बदलते समीकरणों के बीच चीन ने एक बार फिर बड़ा और संकेत देने वाला कदम उठाया है. बीजिंग ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार की रणनीति में बदलाव करते हुए अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में निवेश घटा दिया है और सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दिया है. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका के साथ चीन के रिश्तों में तनाव बना हुआ है और वैश्विक वित्तीय जोखिमों को लेकर चिंता बढ़ रही है.
17 साल के निचले स्तर पर चीन की अमेरिकी बॉन्ड होल्डिंग
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक नवंबर 2025 में चीन की अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग घटकर 682.6 अरब डॉलर रह गई. अक्टूबर में यह आंकड़ा 688.7 अरब डॉलर था. यह स्तर साल 2008 के बाद सबसे कम है. जानकार मानते हैं कि यह गिरावट सिर्फ एक महीने की नहीं, बल्कि चीन की लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह अमेरिकी परिसंपत्तियों पर निर्भरता कम करना चाहता है.
अमेरिका का कर्ज, लेकिन दूसरे देश बढ़ा रहे निवेश
दिलचस्प बात यह है कि जिस समय चीन अमेरिकी कर्ज से दूरी बना रहा है, उसी दौरान अमेरिका के कर्ज में विदेशी निवेश रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. जापान और ब्रिटेन ने अपने निवेश में इजाफा किया है. जापान की अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग बढ़कर 1.2 ट्रिलियन डॉलर हो गई है, जबकि ब्रिटेन का निवेश 888.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. इससे साफ है कि वैश्विक निवेशकों का नजरिया एक जैसा नहीं है.
चीन के पास इस समय दुनिया का सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार है. दिसंबर 2025 के अंत तक इसका आकार 3.3579 ट्रिलियन डॉलर था. विशेषज्ञों के मुताबिक चीन अब इस बड़े रिजर्व को ज्यादा सुरक्षित और संतुलित बनाने की दिशा में काम कर रहा है.
सोने की ओर बढ़ता झुकाव
अमेरिकी बॉन्ड में कटौती के साथ-साथ चीन लगातार अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहा है. चीन के केंद्रीय बैंक People’s Bank of China के अनुसार दिसंबर 2025 के अंत तक देश का गोल्ड रिजर्व 74.15 मिलियन औंस पहुंच गया है. यह लगातार 14वां महीना है जब चीन ने अपने सोने के भंडार में बढ़ोतरी की है.
जब ऐसा देश अमेरिकी बॉन्ड से पैसा निकालकर सोने की हिस्सेदारी बढ़ाता है, तो यह वैश्विक बाजार को यह संकेत देता है कि बड़े निवेशक अब सुरक्षित संपत्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं. दूसरे देश भी अपने रिजर्व में गोल्ड का हिस्सा बढ़ाने लगते हैं. इससे वैश्विक स्तर पर मांग का आधार मजबूत होता है, जो कीमतों के लिए सपोर्ट का काम करता है.
अर्थशास्त्री फैसले पर क्या कहते हैं
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि चीन अब अपने विदेशी निवेश को सोना, गैर-अमेरिकी मुद्राएं और विदेशी इक्विटी जैसे विकल्पों में फैलाना चाहता है. इससे न सिर्फ उसके रिजर्व ज्यादा सुरक्षित होंगे, बल्कि बाहरी झटकों से निपटने की क्षमता भी बढ़ेगी. मौजूदा हालात में यह कदम चीन की आर्थिक रणनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है.
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