EU से ट्रेड डील से पहले भारत को झटका, यूरोप जाने वाले सामान होंगे महंगे; 87% एक्सपोर्ट पर खत्म हुई GSP छूट
EU की GSP यानी जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंस के तहत Developing countries को कम टैक्स पर यूरोप में सामान बेचने की इजाजत मिलती है. भारत को भी इसका फायदा मिलता था. लेकिन EU के नियमों के अनुसार जब किसी देश का किसी खास प्रोडक्ट में Exports बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो कुछ समय के लिए यह सुविधा हटा ली जाती है.
यूरोप जाने वाले भारतीय सामान अब पहले से महंगे पड़ सकते हैं. European Union (EU) ने भारत समेत तीन देशों को मिलने वाली खास व्यापार सुविधा को कुछ बड़े सेक्टरों में रोक दिया है. इसका असर सीधे भारत के कपड़ा, प्लास्टिक, स्टील और मशीनरी जैसे इंडस्ट्री पर पड़ेगा. 1 जनवरी 2026 से लागू हुए इस फैसले से भारतीय Exporters को अब पहले से ज्यादा टैक्स देना होगा.
इससे भारत की Competition कमजोर हो सकती है, खासकर उन देशों के मुकाबले जिन्हें अभी भी टैक्स में छूट मिल रही है. ऐसे समय में यह फैसला आया है, जब भारत और EU के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट समझौते पर बातचीत लगभग पूरी होने वाली है. इसलिए यह मुद्दा सरकार, इंडस्ट्री और कारोबारियों के लिए बेहद अहम बन गया है.
EU ने क्यों रोकी GSP सुविधा
EU की GSP यानी जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंस के तहत Developing countries को कम टैक्स पर यूरोप में सामान बेचने की इजाजत मिलती है. भारत को भी इसका फायदा मिलता था. लेकिन EU के नियमों के अनुसार जब किसी देश का किसी खास प्रोडक्ट में Exports बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो कुछ समय के लिए यह सुविधा हटा ली जाती है. इसी नियम के तहत EU ने साल 2026 से साल 2028 तक भारत, इंडोनेशिया और केन्या के कई सेक्टरों से यह छूट खत्म कर दी है.
87% भारतीय एक्सपोर्ट पर असर
GTRI रिसर्च के अनुसार अब भारत के करीब 87 फीसदी निर्यात पर पहले जैसी टैक्स छूट नहीं मिलेगी. यानी ज्यादातर सामान अब पूरे MFN टैक्स पर जाएगा. केवल करीब 13 फीसदी निर्यात, जैसे कुछ कृषि प्रोडक्ट और चमड़े से जुड़े सामान, अभी इस सुविधा में बने रहेंगे. पहले जिस कपड़े पर 12 फीसदी टैक्स लगता था, उस पर GSP के कारण सिर्फ 9.6 प्रतिशत देना पड़ता था. अब पूरा 12 प्रतिशत देना होगा.
इन इंडस्ट्री को बड़ा झटका
इस फैसले से कपड़ा उद्योग को सबसे ज्यादा नुकसान होने की आशंका है. कपड़ों जैसे सस्ते बाजार में थोड़ा सा टैक्स बढ़ना भी बड़ा फर्क डाल देता है. इससे यूरोपीय खरीदार बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों की ओर रुख कर सकते हैं, जहां अभी टैक्स कम है या नहीं के बराबर है. इसके अलावा खनिज, केमिकल, प्लास्टिक, लोहा, स्टील, मशीनरी और इलेक्ट्रिकल सामान भी अब पूरे टैक्स के दायरे में आ गए हैं.
FTA की उम्मीद
भारत और EU के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर जल्द घोषणा हो सकती है, लेकिन उसके लागू होने में अभी वक्त लग सकता है. तब तक भारतीय निर्यातकों को हाई टैक्स और नए पर्यावरण नियमों, जैसे कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म, का सामना करना पड़ेगा. इससे लागत और बढ़ सकती है. 2024-25 में भारत और EU के बीच करीब 136 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था. इसमें भारत का निर्यात लगभग 76 अरब डॉलर रहा. EU भारत के कुल निर्यात का करीब 17 प्रतिशत हिस्सा है.
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