ऑल टाइम हाई के बाद 1088 रुपये लुढ़का सोना, अब 1.60 लाख के तरफ होगी उड़ान या टूटेगा, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

सोना ऐसे मोड़ पर है जहां एक खबर कीमतों की दिशा बदल सकती है. वैश्विक तनाव, नीतिगत संकेत और निवेशकों का मूड, सब एक साथ असर डाल रहे हैं. बाजार में चर्चा है कि आगे की चाल सीधी नहीं होगी. क्या गिरावट मौका बनेगी या तेजी की नई कहानी लिखेगी?

सोने की कीमत Image Credit: OsakaWayne Studios/Moment/Getty Images

Gold Outlook: दुनिया भर में अनिश्चितता, ब्याज दरों की दिशा और भू-राजनीतिक घटनाओं के बीच सोना निवेशकों के फोकस में बना हुआ है. बीते एक साल से गोल्ड ने मजबूत रफ्तार पकड़ी है और अब बाजार में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है, क्या सोना सीधे 5000 डॉलर (भारतीय बाजार में ये आंकड़ा 10 ग्राम के लिए 1.60 लाख) की ओर बढ़ेगा या फिर पहले 4600 डॉलर तक की गिरावट देखने को मिलेगी. वेंचुरा के कमोडिटी एक्सपर्ट एन.एस. रामास्वामी की मानें तो मौजूदा हालात सोने के लिए मौके और चुनौतियां, दोनों लेकर आए हैं.

2026 में सोने की मजबूत शुरुआत

सोना नए साल में मजबूत मोमेंटम के साथ आगे बढ़ रहा है. ढीली मौद्रिक नीतियां, सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग, वैश्विक व्यापार तनाव और सप्लाई साइड की चुनौतियां सोने के पक्ष में माहौल बना रही हैं. इसके अलावा ETF में लगातार निवेश और डॉलर की कमजोरी भी सोने को सपोर्ट दे रही है. कई सेंट्रल बैंक अमेरिकी एसेट्स से दूरी बनाकर गोल्ड की तरफ झुक रहे हैं, जिससे लॉन्ग टर्म आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि ओवरबॉट स्तरों से आने वाली गिरावट को निवेश के मौके के रूप में देखा जाना चाहिए.

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में रिकॉर्ड तेजी के बाद गुरुवार 22 जनवरी की सुबह सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली. MCX पर फरवरी एक्सपायरी वाला सोना 1088 रुपये की गिरावट के बाद 1,51,774 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ.

बुधवार को सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला. दिन के कारोबार में सोना Rs 7,910 या 5.25 प्रतिशत की जोरदार तेजी के साथ बढ़कर Rs 1,58,475 प्रति 10 ग्राम के ऑल टाइम हाई स्तर तक पहुंच गया। हालांकि, ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली के चलते कीमतों में दबाव आया और सोना गिरकर Rs 1,52,862 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जो अपने उच्च स्तर से 3.54 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है.

ट्रंप के बयान से बदला ग्लोबल सेंटिमेंट

हाल ही में वैश्विक जोखिम भावना को तब राहत मिली, जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ग्रीनलैंड को लेकर अपने सख्त रुख से यू-टर्न लिया. World Economic Forum में दिए बयान में उन्होंने यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने और सैन्य कार्रवाई की धमकियों से पीछे हटने का संकेत दिया. उन्होंने NATO के साथ ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्र को लेकर भविष्य के समझौते का ढांचा तय होने की बात कही. इससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच टकराव का खतरा कम हुआ और ट्रेड वॉर की आशंकाएं भी कुछ हद तक घटीं.

मुनाफावसूली और डॉलर की भूमिका

इन घटनाओं के बाद सोने में मुनाफावसूली देखने को मिली, खासतौर पर तब जब कीमतें पहले ही रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब थीं. साथ ही, अमेरिकी डॉलर में भी हल्की मजबूती आई क्योंकि बाजार को उम्मीद है कि Federal Reserve 2026 की पहली तिमाही तक ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा. हालांकि, फेड की स्वतंत्रता को लेकर राजनीतिक दबाव की आशंका डॉलर की तेजी पर ब्रेक लगा सकती है. 2026 में दो बार ब्याज दर कटौती की संभावना अभी भी बनी हुई है.

सोने की तेजी में क्या हैं रुकावटें

रिपोर्ट के मुताबिक, आगे चलकर सोने के लिए कुछ चुनौतियां भी साफ दिख रही हैं. अगर भू-राजनीतिक तनाव और कम हुए तो सोने से रिस्क प्रीमियम निकल सकता है. ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली, मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी, ये सभी सोने पर दबाव बना सकते हैं. इसके अलावा भारत और चीन जैसे बड़े बाजारों में ऊंची कीमतों के कारण फिजिकल डिमांड कमजोर पड़ सकती है. सेंट्रल बैंकों की खरीद भी अगर धीमी हुई, तो सोने को मिलने वाला स्ट्रक्चरल सपोर्ट कम हो सकता है.

कुल मिलाकर, सोना अभी एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहां आगे की दिशा वैश्विक घटनाओं और नीतिगत संकेतों पर निर्भर करेगी.

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