RBI की ‘गोल्ड शील्ड’… सोने की चमक से मजबूत हुआ भारत का विदेशी मुद्रा भंडार, 20 साल में सबसे हाई
RBI के आंकड़ों के अनुसार, 9 जनवरी को खत्म हुए सप्ताह में भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign exchange reserves) 392 मिलियन डॉलर बढ़कर 687.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया. इससे पहले वाले सप्ताह में रिजर्व में 9.8 अरब डॉलर की गिरावट आई थी.
RBI Forex Reserves: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की तस्वीर तेजी से बदल रही है. पहले जहां डॉलर और विदेशी करेंसी का दबदबा था, अब सोना धीरे-धीरे केंद्रीय भूमिका निभा रहा है. हाल के सालों में RBI ने लगातार सोने की खरीद बढ़ाई है, जिससे रिजर्व का बैलेंस मजबूत हुआ है. जनवरी 2026 तक भारत के कुल फॉरेक्स रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई, जो पिछले दो दशकों में सबसे अधिक है.
यह बदलाव केवल कीमतों में तेजी का नतीजा नहीं है, बल्कि सोने की Actual quantity में बढ़ोतरी का भी परिणाम है. Global uncertainties, डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश और रुपये पर दबाव के बीच RBI ने रणनीतिक रूप से सोने को अहमियत दी है. एक्सपर्ट मानते हैं कि यह कदम भारत की वित्तीय सुरक्षा को और मजबूत करेगा और संकट के समय एक स्थिर सहारा देगा.
फॉरेक्स रिजर्व में हल्की बढ़त
RBI के आंकड़ों के अनुसार, 9 जनवरी को खत्म हुए सप्ताह में भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign exchange reserves) 392 मिलियन डॉलर बढ़कर 687.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया. इससे पहले वाले सप्ताह में रिजर्व में 9.8 अरब डॉलर की गिरावट आई थी. इस बार की बढ़त मुख्य रूप से सोने की कीमतों में तेजी के कारण हुई.
सोने ने संभाला रिजर्व, विदेशी करेंसी घटी
फॉरेन करेंसी एसेट्स 1.1 अरब डॉलर घटकर 550.8 अरब डॉलर रह गए. यह गिरावट मुख्य रूप से यूरो, पाउंड और येन में उतार-चढ़ाव के कारण हुई. वहीं, सोने का कीमत 1.6 अरब डॉलर बढ़कर 112.8 अरब डॉलर हो गया. SDR में 39 मिलियन डॉलर की हल्की गिरावट आई और IMF रिजर्व पोजीशन 13 मिलियन डॉलर घटकर 4.8 अरब डॉलर रह गई.
दो दशक में सबसे ज्यादा सोने की हिस्सेदारी
भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी जनवरी 2026 में बढ़कर 16.2 प्रतिशत हो गई. यह 20 साल में सबसे ज्यादा है. साल 2007 में यह केवल 2.8 प्रतिशत थी. इस बढ़ोतरी का बड़ा कारण सिर्फ कीमतें नहीं, बल्कि सोने की वास्तविक खरीद भी है. RBI के पास सोना 2000 के दशक की शुरुआत में करीब 357 टन था, जो साल 2025 के अंत तक बढ़कर लगभग 880 टन हो गया. खासकर वित्त वर्ष 2025 में सोने की खरीद तेज हुई.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की तेजी का असर
पिछले हफ्ते अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 2.5 प्रतिशत बढ़ी. पिछले एक महीने में यह बढ़त लगभग 5.5 प्रतिशत रही. इसी वजह से भारत के रिजर्व में सोने का मूल्य तेजी से बढ़ा और कुल रिजर्व को सहारा मिला. RBI अब डॉलर पर निर्भरता धीरे-धीरे कम कर रहा है और सोने को Secured property के रूप में बढ़ा रहा है. सोना किसी देश या संस्था पर निर्भर नहीं होता, इसलिए इसे ‘काउंटरपार्टी-फ्री हेज’ माना जाता है. हालांकि विदेशी मुद्रा अभी भी रिजर्व का सबसे बड़ा हिस्सा है, लेकिन सोने की भूमिका लगातार बढ़ रही है.
अमेरिकी बॉन्ड में भारत की हिस्सेदारी घटी
RBI ने हाल के महीनों में अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड बेचकर डॉलर रिजर्व घटाया है. TOI के मुताबिक, भारत के पास अब 200 अरब डॉलर से कम के अमेरिकी बॉन्ड बचे हैं. बैंकर्स का कहना है कि RBI ने रुपये को संभालने के लिए डॉलर बेचकर बाजार में हस्तक्षेप किया, खासकर भारत पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ के बाद.
भारत विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में चीन, जापान और स्विट्जरलैंड के बाद चौथे नंबर पर है. लेकिन अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड होल्डिंग में भारत छठे स्थान पर है. इससे पहले जापान, ब्रिटेन, चीन, बेल्जियम और कनाडा आते हैं. भारत का बढ़ता गोल्ड रिजर्व आर्थिक सुरक्षा का संकेत है. यह न केवल संकट के समय मदद करेगा, बल्कि रुपये और वित्तीय स्थिरता को भी मजबूत करेगा.
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