गोल्ड-सिल्वर रेशियो में दिखी बड़ी गिरावट, चांदी ने सोने को पछाड़ा! निवेशकों के लिए क्या हैं मायने; रैली बाकी?

पिछले एक साल में चांदी की कीमतों में 200 फीसदी की जबरदस्त तेजी आई है, जबकि सोना करीब 80 फीसदी चढ़ा है. इस तेजी से गोल्ड-सिल्वर रेशियो 127 से घटकर 50 के आसपास आ गया है. जानिए इस बदलाव का मतलब, आगे सोना या चांदी- किसमें दिख सकता है ज्यादा दम?

गोल्ड और सिल्वर रेशियो Image Credit: @Money9live

Gold and Silver Ratio Falls: पिछले 12 महीनों में चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. इस दौरान सिल्वर करीब 200 फीसदी चढ़ चुका है, जबकि सोने में लगभग 80 फीसदी की तेजी आई है. चांदी की इस तेज रफ्तार ने सोने को भी पीछे छोड़ दिया है और इसी वजह से गोल्ड-सिल्वर रेशियो में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. यह रेशियो निवेशकों के लिए सोने और चांदी की आपसी मजबूती को समझने का एक अहम पैमाना माना जाता है. दोनों धातुओं में रैली अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है. मौजूदा समय में सोना 5000 डॉलर प्रति औंस के बड़े आंकड़े को पार कर चुका है.

क्या है गोल्ड-सिल्वर रेशियो?

गोल्ड-सिल्वर रेशियो यह बताता है कि 1 औंस सोना खरीदने के लिए कितनी औंस चांदी चाहिए. अगर यह रेशियो ज्यादा होता है, तो माना जाता है कि चांदी सस्ती है. वहीं, रेशियो कम होने का मतलब होता है कि चांदी ने सोने के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है. महामारी के समय यह रेशियो करीब 127 के ऊंचे स्तर पर था, लेकिन 2026 की शुरुआत में यह घटकर लगभग 50 के आसपास आ गया है.

सोने के मुकाबले चांदी की ताकत

मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2025 में अगर कोई निवेशक 1 किलो सोना बेचता, तो उसे बदले में करीब 110 किलो चांदी मिलती थी. आज वही 1 किलो सोना बेचने पर सिर्फ 47 किलो चांदी मिल रही है. यानी यह बदलाव मामूली नहीं, बल्कि सोने के मुकाबले चांदी की कीमत में आई संरचनात्मक मजबूती को दिखाता है. ऐसा आमतौर पर तब होता है जब कीमती धातुओं का बुल मार्केट अपने मजबूत चरण में पहुंच जाता है और चांदी, सोने से ज्यादा तेजी दिखाने लगती है.

रिकॉर्ड ऊंचाई पर सोना और चांदी

फिलहाल दोनों ही कीमती धातुएं अपने ऑल टाइम हाई स्तर पर ट्रेड कर रही हैं. सोने की कीमत 5000 डॉलर प्रति औंस के पार निकल चुकी है, जबकि चांदी करीब 108 डॉलर प्रति औंस के आसपास बनी हुई है. यह साफ संकेत देता है कि निवेशकों का रुझान कीमती धातुओं की ओर लगातार बढ़ रहा है.

गोल्ड-सिल्वर रेशियो में गिरावट का क्या मतलब?

गोल्ड-सिल्वर रेशियो के गिरने के दो बड़े मायने निकाले जा रहे हैं. पहला, निवेशक अब चांदी की पूरी क्षमता को पहचानने लगे हैं. दूसरा, आगे चलकर सोना भी एक बार फिर बेहतर प्रदर्शन कर सकता है. दरअसल, चांदी को इस समय दोहरी मांग का फायदा मिल रहा है. एक तरफ यह महंगाई और करेंसी जोखिम से बचाव का साधन है, वहीं दूसरी तरफ इसका इस्तेमाल सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), बैटरी और पावर ग्रिड जैसे इंडस्ट्रियल सेक्टर में तेजी से बढ़ रहा है.

क्या फिर बढ़ सकता है गोल्ड-सिल्वर रेशियो?

रिपोर्ट के मुताबिक, गोल्ड-सिल्वर रेशियो का लंबी अवधि का औसत करीब 70 के आसपास रहता है. मौजूदा स्तर 50 इसके निचले दायरे में आता है, जो इतिहास में ज्यादा समय तक टिकाऊ नहीं रहा है. ऐसे में अगर यह रेशियो दोबारा 65-70 की ओर बढ़ता है, तो इसका मतलब होगा कि आने वाले समय में सोना, चांदी के मुकाबले बेहतर रिटर्न दे सकता है.

आगे की क्या हो सकती है राह?

चांदी में लंबी अवधि की संभावनाएं मजबूत हैं, लेकिन मौजूदा स्तरों पर नजदीकी रिस्क बढ़ गया है. इससे इतर, सप्लाई की कमी और मजबूत मांग के चलते चांदी की तेजी अभी जारी रह सकती है और गोल्ड-सिल्वर रेशियो 40 या इससे भी नीचे जा सकता है. इतिहास में कुछ कमोडिटी बुल साइकिल्स के दौरान यह रेशियो 30 तक भी फिसल चुका है. इससे इतर, एक और थ्योरी है जिसे सोने-चांदी के संबंध में देखा जा रहा है. थ्योरी के मुताबिक, हमेशा से देखा जाता रहा है कि जब-जब चांदी ने तेजी दिखाई है, एक पाइंट पर आकर इसमें बड़ी गिरावट दिखी है. इसको समझने के लिए आप इस आर्टिकल को पढ़ सकते हैं. 

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