India-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत पूरी, कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने की पुष्टि; इन सेक्टर्स को मिलेगा बूस्ट!

भारत और यूरोपीय संघ के बीच 18 साल बाद फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति बन गई है. इस ऐतिहासिक समझौते से भारत के निर्यात, निवेश और रोजगार को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है, जबकि EU के साथ आर्थिक रिश्ते और मजबूत होंगे. इसको लेकर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को पुष्टी की.

भारत-ईयू एफटीए Image Credit: @Money9live

India EU FTA Concludes: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर बड़ी सफलता हाथ लगी है. करीब 18 साल लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने इस अहम व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी कर ली है. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार, 26 जनवरी को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह डील भारत के नजरिए से संतुलित और भविष्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जिससे भारत और EU के बीच आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे.

कहां पहुंची बातचीत?

उन्होंने बताया कि यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार और निवेश को नई रफ्तार देगा. फिलहाल FTA के कानूनी दस्तावेजों की जांच (लीगल स्क्रबिंग) की जा रही है और कोशिश है कि जल्द से जल्द सभी प्रक्रियाएं पूरी कर समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए जाएं. उम्मीद है कि इस साल के भीतर इस डील पर साइन हो जाएगा, जबकि इसे लागू होने में थोड़ा समय लग सकता है. EU में इसे यूरोपीय संसद की मंजूरी चाहिए, जबकि भारत में केवल केंद्रीय कैबिनेट की स्वीकृति जरूरी होगी. संभावना है कि यह समझौता अगले साल की शुरुआत से लागू हो सकता है.

‘मदर ऑफ ऑल डील्स’

इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अब तक की “मदर ऑफ ऑल डील्स” बताया है. इस डील की औपचारिक घोषणा मंगलवार यानी 27 जनवरी को होने वाले भारत-EU शिखर सम्मेलन में की जाएगी. इस बैठक में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत करेंगे.

किन सेक्टर्स को मिलेगा बूस्ट?

FTA के लागू होने से भारत के कई श्रम-प्रधान सेक्टर्स को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है. टेक्सटाइल्स, केमिकल्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, लेदर और फुटवियर जैसे सेक्टर्स को EU बाजार में ड्यूटी-फ्री या कम शुल्क पर पहुंच मिल सकती है. फिलहाल EU भारत से आने वाले कई प्रोडक्ट पर करीब 10 फीसदी तक आयात शुल्क लगाता है, जबकि औसतन टैरिफ 3.8 फीसदी है. दूसरी ओर, भारत में EU से आने वाले सामान पर औसतन 9.3 फीसदी ड्यूटी लगती है, जिसमें ऑटोमोबाइल और उनके पार्ट्स पर शुल्क काफी ज्यादा है.

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत आमतौर पर दोनों पक्ष 90 फीसदी से ज्यादा व्यापारिक वस्तुओं पर आयात शुल्क घटाने या खत्म करने पर सहमत होते हैं. इसके अलावा, टेलीकॉम, ट्रांसपोर्ट, अकाउंटिंग और ऑडिटिंग जैसे सर्विस सेक्टर्स में भी नियमों को आसान बनाया जाता है. साल 2014 के बाद से भारत अब तक ऑस्ट्रेलिया, यूके, यूएई, न्यूजीलैंड, ओमान, EFTA ब्लॉक और मॉरीशस के साथ ऐसे समझौते कर चुका है.

अहम समय में होगी डील

यह डील ऐसे समय में बेहद अहम मानी जा रही है, जब अमेरिका की ऊंची टैरिफ नीतियों के चलते वैश्विक व्यापार प्रभावित हो रहा है. भारत पर भी कुछ मामलों में 50 फीसदी तक टैरिफ लगाए गए हैं. ऐसे में यह FTA भारतीय निर्यातकों को नए बाजार तलाशने में मदद करेगा और चीन पर निर्भरता कम करने में भी सहायक साबित हो सकता है. व्यापार आंकड़ों की बात करें तो 2024-25 में भारत और EU के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 136.53 अरब डॉलर रहा, जिससे EU भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है. वहीं, सेवाओं का व्यापार करीब 83 अरब डॉलर का रहा. इस दौरान भारत को EU के साथ 15.17 अरब डॉलर का व्यापार सरप्लस भी हासिल हुआ.

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