कोकिंग कोल बना क्रिटिकल मिनरल, जानें इस फैसले के क्या हैं मायने, झारखंड-बंगाल समेत इन राज्यों को फायदा

सरकार ने कोकिंग कोल को क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल घोषित कर आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. इस फैसले का मकसद स्टील उद्योग की जरूरतें घरेलू स्तर पर पूरी करना, आयात पर निर्भरता घटाना और विदेशी मुद्रा की बचत करना है, जिससे अर्थव्यवस्था और औद्योगिक आधार दोनों मजबूत होंगे.

Coking Coal as Critical & Strategic Mineral Image Credit: Canva/AI

Coking Coal as Critical & Strategic Mineral: सरकार ने कोकिंग कोल को क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल घोषित कर दिया है. यह फैसला माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957 (MMDR Act) के तहत लिया गया है. इसका मकसद देश में स्टील उद्योग की जरूरतों को पूरा करना, आयात कम करना और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम बढ़ाना है. यह कदम आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत@2047 के विजन के अनुरूप है. भारत में कोकिंग कोल के बड़े भंडार हैं, लेकिन अभी भी स्टील बनाने के लिए ज्यादातर कोल विदेश से आयात करना पड़ता है. इस घोषणा से घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी.

क्यों लिया गया यह फैसला?

भारत में कोकिंग कोल के करीब 37.37 अरब टन संसाधन हैं, जो मुख्य रूप से झारखंड में हैं. इसके अलावा मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में भी कुछ भंडार हैं. लेकिन स्टील सेक्टर की जरूरत का लगभग 95% कोकिंग कोल आयात से पूरा होता है. 2020-21 में आयात 51.20 मिलियन टन था, जो 2024-25 में बढ़कर 57.58 मिलियन टन हो गया. इससे काफी विदेशी मुद्रा बाहर जाती है.

नीति आयोग और हाई-लेवल कमिटी की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने यह कदम उठाया है. अब कोकिंग कोल को क्रिटिकल मिनरल्स की लिस्ट में शामिल कर दिया गया है, जिससे इसे प्रोटेक्शन मिलेगी.

क्या फायदे होंगे?

राज्यों को क्या लाभ?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि खनन से होने वाली रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम और अन्य पेमेंट राज्य सरकारों को ही मिलते रहेंगे, भले ही नीलामी केंद्र सरकार करे. इससे झारखंड जैसे राज्यों को फायदा होगा, जहां कोकिंग कोल के सबसे बड़े भंडार हैं. यह कदम राष्ट्रीय स्टील नीति (National Steel Policy) के लक्ष्यों को सपोर्ट करेगा और भारत को मजबूत, आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा.

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