100 अमृत भारत ट्रेनें, सीनियर सिटीजन को टिकट में छूट, कमाई-खर्च का बैलेंस बना चैलेंज, बजट में दिखेगा रोडमैप?
भारतीय रेलवे की वित्तीय सेहत को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं. कमाई और खर्च के बीच संतुलन बनाना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा. हाल के वर्षों में कुछ आंकड़े जरूर बदले हैं, लेकिन इनके पीछे की असली वजहें और आगे की रणनीति क्या है, समझने के लिए पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
Railway Budget Expectations 2026: भारतीय रेलवे लंबे समय तक ऐसी स्थिति में रहा है, जहां उसकी ऑपरेटिंग कमाई का बड़ा हिस्सा रोजमर्रा के खर्चों में ही खत्म हो जाता था. कई सालों तक ऑपरेटिंग रेशियो 100 फीसदी के आसपास या उससे ऊपर बना रहा, यानी रेलवे जितना कमा रहा था, उससे ज्यादा खर्च कर रहा था. इसका सीधा असर यह होता था कि सिस्टम के विस्तार, नई तकनीक और सेफ्टी जैसे क्षेत्रों में निवेश की गुंजाइश सीमित रह जाती थी. लेकिन हाल के वर्षों में यह तस्वीर धीरे-धीरे बदलती दिख रही है.
ऑपरेटिंग रेशियो में कैसे आया सुधार
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2022-23 में भारतीय रेलवे ने 2,517.38 करोड़ रुपये का नेट सरप्लस दर्ज किया, जबकि इससे पिछले साल 15,024.58 करोड़ रुपये का घाटा था. इसी अवधि में ऑपरेटिंग रेशियो 107.39 फीसदी से सुधरकर 98.10 फीसदी पर आ गया. इसका मतलब साफ है कि रेलवे ने अपनी कमाई के मुकाबले खर्च को नियंत्रित करने में कामयाबी हासिल की है. यह बदलाव के पीछे केंद्र सरकार की लगातार बजटीय मदद और संरचनात्मक सपोर्ट की बड़ी भूमिका रही है.
रेलवे बजट के आंकड़े भी यही संकेत देते हैं कि ऑपरेटिंग रेवेन्यू के मोर्चे पर स्थिति मजबूत हुई है. 2023-24 में रेलवे की कुल रेवेन्यू रिसीट 2.56 लाख करोड़ रुपये रही, जो 2025-26 के बजट अनुमान में बढ़कर 3.02 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने वाली है. इसी दौरान वर्किंग एक्सपेंस भी बढ़े हैं, लेकिन उनकी रफ्तार कमाई के मुकाबले सीमित रही है, जिससे ऑपरेटिंग रेशियो 98-99 फीसदी के दायरे में बना हुआ है. यह संतुलन इसलिए अहम है क्योंकि इससे रेलवे को विकास फंड और सेफ्टी फंड जैसे मदों में भी योगदान देने की गुंजाइश मिलती है.
| वित्त वर्ष | ऑपरेटिंग रेशियो (%) | स्थिति का संकेत |
|---|---|---|
| 2021-22 | 107.39 | कमाई से ज्यादा खर्च, भारी दबाव |
| 2022-23 | 98.10 | खर्च पर नियंत्रण, सरप्लस की वापसी |
| 2023-24 (Actual) | 98.43 | संतुलन बरकरार, स्थिर स्थिति |
| 2024-25 (Budget) | 98.22 | मामूली सुधार का अनुमान |
| 2024-25 (Revised) | 98.90 | खर्च में हल्का दबाव |
| 2025-26 (Budget) | 98.43 | नियंत्रित खर्च के साथ बढ़त |
इस टेबल से साफ दिखता है कि 2021-22 में रेलवे हर 100 रुपये की कमाई पर 107 रुपये से ज्यादा खर्च कर रहा था, जबकि 2022-23 से ऑपरेटिंग रेशियो लगातार 100 के नीचे बना हुआ है. यही वह टर्निंग पॉइंट है, जहां से रेलवे की फाइनेंशियल सेहत में सुधार शुरू होता है और मंत्रालय को खर्च मैनेज करते हुए एक्सपेंशन पर फोकस करने की जगह मिलती है
एक्सपेंशन पर शिफ्ट हो रहा फोकस
अब जब खर्च और कमाई के बीच का अंतर काबू में आता दिख रहा है, तो रेलवे मंत्रालय का फोकस धीरे-धीरे एक्सपेंशन की तरफ शिफ्ट हो रहा है. ब्रोकरेज फर्म PL Capital के मुताबिक, बजट 2026 में रेलवे के कैपेक्स में करीब 5 फीसदी की बढ़ोतरी संभव है, जिससे कुल पूंजीगत आवंटन 2.65 लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंच सकता है. सिग्नलिंग सिस्टम, ट्रैक अपग्रेड और सेमी-हाई-स्पीड कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स पर खर्च बढ़ने की उम्मीद है. FY26 में दिसंबर तक ही 80 फीसदी से ज्यादा कैपेक्स का इस्तेमाल इस बात का संकेत है कि एग्जीक्यूशन की रफ्तार मजबूत बनी हुई है.
वहीं Deloitte की रिपोर्ट यह भी इशारा करती है कि आगे की चुनौती प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ाने की होगी. अगर कंसेशन एग्रीमेंट और रिस्क-रिवॉर्ड स्ट्रक्चर में सुधार होता है और एसेट मॉनेटाइजेशन की रफ्तार रेलवे में तेज होती है, तो सरकार पर सीधा खर्च का दबाव और कम हो सकता है.
ऐसे में ये साफ है कि रेलवे अब उस दौर से निकलता दिख रहा है जहां कमाई सिर्फ खर्च चलाने तक सीमित थी, और एक ऐसे फेज में प्रवेश कर रहा है जहां संतुलित फाइनेंस के साथ विस्तार और ग्रोथ पर फोकस संभव हो पा रहा है.
आम आदमी को ट्रेन बजट से कैसे मिलेगी राहत
रेलवे की कमाई और खर्च में सुधार का मतलब सिर्फ सरकारी आंकड़े नहीं हैं, इसका असर सीधे यात्रियों के सफर पर पड़ता है. बजट 2026 से पहले जो संकेत मिल रहे हैं, उनसे साफ है कि रेलवे अब यात्रियों की सुविधा पर ज्यादा ध्यान दे रहा है. जनवरी से शुरू हुई वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें लंबी दूरी के सफर को आसान बनाने की कोशिश हैं.
100 से ज्यादा अमृत भारत नॉन-एसी ट्रेनों के नए रूट्स पर चलने की उम्मीद है, जिनका मकसद कम किराए में बेहतर सफर देना है. साफ कोच, बेहतर सीटिंग और थोड़ी ज्यादा रफ्तार से रोज सफर करने वालों और त्योहारों में यात्रा करने वालों को राहत मिल सकती है.
राजधानी और शताब्दी जैसी ट्रेनों में ट्रैक अपग्रेड और कवच सिस्टम के चलते समय की पाबंदी सुधरी है, जिससे देरी कम हो रही है. स्टेशन रीडेवलपमेंट, बेहतर वेटिंग एरिया और सेफ्टी टेक्नोलॉजी भी धीरे-धीरे आम यात्री का अनुभव बेहतर बना रही है. बजट एलोकेशन से इन विकास में तेजी आएगी. वहीं बजट में सीनियर सिटीजन कंसेशन की चर्चा भी हो रही है, अगर ऐसा होती है तो, तो बुजुर्ग यात्रियों को अपने टिकट पर बड़ी छूट मिल सकती है.