अब GST के लिए कोर्ट कचहरी के नहीं लगाने होंगे चक्कर, बन गया GSTAT; फटाफट होगा फैसला
केंद्र सरकार ने GST अपीलेट ट्रिब्यूनल (GSTAT) के लिए नए नियम नोटिफाई किए हैं जो 24 अप्रैल 2025 से लागू हो गए हैं. इन नियमों के तहत GST मामले ऑनलाइन फाइल किए जाएंगे और ट्रिब्यूनल में न्यायिक और तकनीकी सदस्य होंगे.
GST Rules: भारत के इनडायरेक्ट टैक्स यानी GST जैसे टैक्स विवादों को सुलझाने की व्यवस्था में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने GST अपीलेट ट्रिब्यूनल (GSTAT) के प्रोसीजर रूल्स, 2025 को नोटिफाई कर दिया है. ये नए नियम 24 अप्रैल 2025 से लागू हो गए हैं और इन्हें CGST एक्ट, 2017 के सेक्शन 111 के तहत लाया गया है. इन नियमों के जरिए एक डिजिटल-फर्स्ट और पारदर्शी सिस्टम बनाया गया है ताकि लंबित GST अपीलों को जल्दी और न्यायसंगत तरीके से निपटाया जा सके.
8100 से ज्यादा GST मामले लंबित
अब तक GSTAT के न होने से टैक्सपेयर्स को हाई कोर्ट जाना पड़ता था, जिससे समय भी लगता था और खर्चा भी बढ़ जाता था. हाल की रिपोर्ट के मुताबिक अभी भी 8,100 से ज्यादा GST मामले लंबित हैं, जिनमें से 2,800 से ज्यादा एक साल से भी पुराने हैं. सरकार अब तेजी से GSTAT के जजों और टेक्निकल मेंबर्स की नियुक्ति कर रही है, और साथ ही GST नेटवर्क (GSTN) डिजिटल अपील प्रोसेसिंग के लिए टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म भी तैयार कर रहा है.
GSTAT प्रोसीजर नियम 2025
- ये नियम सभी अपीलें जो GSTAT के सामने दायर होंगी उनपर लागू है
- ट्रिब्यूनल की संरचना ऐसी होगी कि प्रिंसिपल और स्टेट बेंच होंगी, जिनमें न्यायिक और तकनीकी सदस्य होंगे
- कोर्ट में पेश होने के लिए वकालतनामा या बाकी ऑथोराइज्ड पत्र देना होगा
- इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग- सारी अपीलें GSTAT पोर्टल पर ऑनलाइन तय फॉर्मेट में फाइल करनी होगी
- अपील में जरूरी बातें- फैक्ट्स, लीगल पॉइंट्स, GSTIN नंबर और ऑर्डर की अटेस्टेड कॉपी लगानी होगी
- पैराग्राफ स्ट्रक्चर- हर पैराग्राफ में अलग-अलग पॉइंट होना चाहिए
- टाइम की गिनती- छुट्टियों को समय में नहीं गिना जाएगा और देरी के मामले में अगर वाजिब कारण हो तो माफ किया जा सकता है
- रजिस्ट्रार की भूमिका- अपीलों की जांच, रिकॉर्ड रखना और केस लिस्ट बनाना
- दस्तावेजों का अनुवाद- अगर दस्तावेज हिंदी या अंग्रेजी में नहीं हैं, तो अंग्रेजी अनुवाद अनिवार्य
- सुनवाई: आमतौर पर ओपन कोर्ट होगी, लेकिन अगर कोई पार्टी मौजूद नहीं रहती तो उसके खिलाफ भी फैसला हो सकता है
- डेली कॉज लिस्ट- हर दिन ऑनलाइन पब्लिश होगी, जरूरी और अधूरे मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी
- मिसलेनियस एप्लिकेशन्स- लेट फाइलिंग, तारीख बदलवाने, या जल्दी सुनवाई के लिए अलग फॉर्म और एफिडेविट लगाना पड़ेगा
- ट्रिब्यूनल की पावर- गवाहों को बुलाना और कोर्ट जैसा आदेश जारी कर सकना
- इनहेरेंट पावर- सही न्याय देने के लिए विशेष आदेश पास करने का अधिकार
- रिक्यूसल- अगर किसी सदस्य को व्यक्तिगत या प्रोफेशनल कारणों से सुनवाई से हटना हो तो कर सकते हैं
- ऑर्डर पब्लिकेशन- सभी आदेश ऑनलाइन अपलोड होंगे
- फीस स्ट्रक्चर- निरीक्षण या एप्लिकेशन के लिए 5,000, प्रमाणित कॉपी के लिए 5 रुपये प्रति पेज
- केस रजिस्टर- अपीलों, निरीक्षणों और सुप्रीम कोर्ट मामलों के लिए अलग-अलग रजिस्टर रखे जाएंगे
- प्रोसीजरल फ्लेक्सिबिलिटी- कुछ मामलों में समय सीमा बढ़ाई जा सकती है
- एबेटमेंट- किसी पार्टी के मरने, दिवालिया होने या कंपनी बंद होने पर मामला बंद किया जा सकता है
- एरर करेक्शन- रजिस्ट्रार सामान्य टाइपिंग या गणना की गलतियां बिना नोटिस के सुधार सकता है
- हायर कोर्ट ऑर्डर- सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के आदेश का पालन ट्रिब्यूनल द्वारा किया जाएगा
- बैठक स्थान- केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित जगहों पर होंगी
- ऑफिस और सुनवाई का समय- सुनवाई सुबह 10:30 से दोपहर 1:30 और फिर 2:30 से शाम 4:30 बजे तक, ऑफिस समय 9:30 से 6:00 बजे तक रहेगा
- अतिरिक्त साक्ष्य- सिर्फ ट्रिब्यूनल की अनुमति से पेश किया जा सकेगा
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