India-EU FTA: यूरोप में ऑफिस खोलने से लेकर डेटा-सिक्योर कंट्री जैसे मिलेंगे बड़े फायदे, भारत के सर्विस सेक्टर को मिलेगा बूम
India-EU FTA: इस एग्रीमेंट से कई सेक्टर्स को फायदा मिलने की उम्मीद है. इसमें से एक सर्विसेज. सर्विसेज सेक्टर की डिमांड बड़े पैमाने पर है. वहीं, अमेरिका टैरिफ के बीच भारतीय आईटी सर्विसेज सेक्टर एक नए मार्केट की तलाश में भी है. सर्विसेज पर बातचीत से एक गहरा मतभेद सामने आया है.
India-EU FTA: भारत और यूरोपियन यूनियन लंबे समय से चल रही बातचीत को अंतिम दहलीज पर पहुंचाने के करीब नजर आ रहे हैं. उम्मीद है कि दोनों पक्ष मंगलवार को नई दिल्ली में होने वाले भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में लगभग तैयार फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA( पेश करेंगे. यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब दुनिया भर में व्यापार में रुकावटें बढ़ रही हैं, और दोनों पार्टनर साफ मार्केट एक्सेस और ज्यादा अनुमानित नियम चाहते हैं. इस एग्रीमेंट से कई सेक्टर्स को फायदा मिलने की उम्मीद है. इसमें से एक सर्विसेज. सर्विसेज सेक्टर की डिमांड बड़े पैमाने पर है. वहीं, अमेरिका टैरिफ के बीच भारतीय आईटी सर्विसेज सेक्टर एक नए मार्केट की तलाश में भी है. हालांकि, ऐसा नहीं है कि भारतीय सर्विसेज की यूरोप में पहुंच नहीं है, पर इस एग्रीमेंट के बाद हो सकता है कि इसे और बढ़ावा मिले.
क्रॉस-बॉर्डर डिलीवरी
सर्विसेज पर बातचीत से एक गहरा मतभेद सामने आया है. EU भारतीय फर्म्स को लोकल ऑफिस खोलने और भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए ज्यादा मिनिमम सैलरी की शर्तें लगाकर सर्विसेज की रिमोट डिलीवरी को सीमित करता है. भारत का तर्क है कि ये शर्तें डिजिटल ट्रेड के मकसद को खत्म करती हैं और उसके IT एक्सपोर्ट को कमजोर करती हैं, जो काफी हद तक क्रॉस-बॉर्डर डिलीवरी पर निर्भर हैं.
भारत की क्या है मांग?
GTRI के अनुसार, भारत EU के जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (GDPR) के तहत ‘डेटा-सिक्योर’ देश के रूप में EU से मान्यता भी चाहता है, जिससे EU नागरिकों के डेटा का ट्रांसफर आसान हो जाएगा. इसके बिना भारतीय फर्म्स को जापान या दक्षिण कोरिया के कंपटीटर्स की तुलना में अधिक कंप्लायंस कॉस्ट का सामना करना पड़ता है.
हालांकि, EU चाहता है कि भारत GDPR के करीब प्राइवेसी नियमों को अपनाए. नई दिल्ली का कहना है कि उसका डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 पहले से ही पर्याप्त सुरक्षा देता है और अधिक सख्त तालमेल उसकी तेजी से बढ़ती डिजिटल इकोनॉमी पर बोझ डालेगा.
शॉर्ट-टर्म बिजनेस वीजा
भारत आसान शॉर्ट-टर्म बिजनेस वीजा, डबल सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन से बचने के लिए टोटलाइजेशन एग्रीमेंट और प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन की आपसी मान्यता पर भी जोर दे रहा है, जबकि EU भारत के बैंकिंग, कानूनी और फाइनेंशियल सर्विस मार्केट में अधिक पहुंच चाहता है. EU सरकारें लेबर मोबिलिटी को लेकर सतर्क हैं, इसलिए भारत को सेवाओं में फायदा डेटा-सिक्योर स्टेटस, टोटलाइज़ेशन और प्रोफेशनल्स की अस्थायी आवाजाही में प्रगति पर निर्भर करेगा.
सर्विसेज का एक्सपोर्ट-इंपोर्ट
भारत से यूरोपीय संघ को मुख्य सर्विसेज एक्सपोर्ट में टेलीकॉम और आईटी, ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज और अन्य व्यावसायिक सर्विसेज शामिल हैं. वहीं, भारत द्वारा EU से मुख्य सर्विसेज इंपोर्ट में, अन्य व्यावसायिक सेवाएं, बौद्धिक संपदा सेवाएं, दूरसंचार और IT सर्विसेज शामिल हैं.
सर्विसेज का कारोबार
2019 और 2024 के बीच, भारत-EU के बीच सर्विसेज में द्विपक्षीय व्यापार में लगातार बढ़ोतरी हुई, जिसमें भारतीय एक्सपोर्ट 19 अरब यूरो से बढ़कर 37 अरब यूरो हो गया और EU का भारत को एक्सपोर्ट बढ़कर 29 अरब यूरो हो गया.
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