भारत-EU FTA से किस सेक्टर को कितना फायदा, किसे ज्यादा लाभ; क्यों कहा जा रहा ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’
भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर लंबे समय से चली बातचीत अब अंतिम चरण में है. इस डील से भारत के टेक्सटाइल लेदर मरीन और फार्मा सेक्टर को बड़ा फायदा मिल सकता है. वहीं EU को भारतीय बाजार में कार वाइन और मशीनरी की आसान एंट्री मिलेगी.
India EU FTA: भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच एक ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन होने की तैयारी है. इसे दोनों पक्ष मदर ऑफ ऑल डील्स बता रहे हैं. यह समझौता भारत के निर्यातकों और यूरोपीय कंपनियों दोनों के लिए नए अवसर खोल सकता है. कई सालों से अटकी बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंच गई है. इस डील से भारत के लेबर बेस्ड सेक्टर को राहत मिलने की उम्मीद है. वहीं EU को भारतीय बाजार में आसान एंट्री मिल सकती है. कुल मिलाकर यह डील आम लोगों और कारोबार दोनों के लिए अहम मानी जा रही है.
कई साल बाद क्यों बनी सहमति
भारत और EU के बीच ट्रेड बातचीत की शुरुआत 2007 में हुई थी. शुरुआती सालों में कई दौर की बातचीत हुई लेकिन सहमति नहीं बन पाई. टैरिफ बाजार पहुंच और नियमों को लेकर मतभेद बने रहे. इसके बाद बातचीत कई साल तक रुकी रही. 2022 में दोबारा बातचीत शुरू हुई. अब बदलते वैश्विक हालात ने इस डील को जरूरी बना दिया है.
भारत को क्या मिलेगा फायदा
इस डील से भारत के टेक्सटाइल लेदर और मरीन प्रोडक्ट जैसे सेक्टर को सीधा लाभ मिल सकता है. अभी इन पर EU में टैक्स लगता है जिससे कीमत बढ़ जाती है. टैक्स कम होने से भारतीय सामान सस्ता और कंपटीशन होगा. दवाइयों और केमिकल सेक्टर को भी फायदा मिल सकता है. इससे भारत का निर्यात और रोजगार दोनों बढ़ सकते हैं.
संवेदनशील सेक्टर सुरक्षित रहेंगे
इस समझौते में भारत ने अपने किसानों के हितों का ध्यान रखा है. एग्रीकल्चर और डेयरी जैसे संवेदनशील सेक्टर को पूरी तरह नहीं खोला गया है. सरकार की कोशिश रही है कि घरेलू उत्पादकों पर असर न पड़े. यही कारण है कि इस डील को संतुलित माना जा रहा है. इससे भारत को फायदा भी मिलेगा और जोखिम भी सीमित रहेगा.
| क्षेत्र | भारत को फायदा | EU को फायदा |
|---|---|---|
| टेक्सटाइल और गारमेंट | EU में टैक्स कम होने से निर्यात बढे़गा और रोजगार बढे़गा | भारतीय बाजार में फैशन और मशीनरी की मांग बढे़गी |
| लेदर और मरीन प्रोडक्ट | भारतीय उत्पाद ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे | प्रोसेसिंग और कोल्ड चेन से जुड़ी तकनीक की बिक्री बढे़गी |
| फार्मा और केमिकल | दवाइयों और केमिकल को EU बाजार में आसान मंजूरी | मेडिकल डिवाइस और केमिकल उत्पादों की भारत में एंट्री |
| ऑटो सेक्टर | लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा | लग्जरी कारों की भारत में आसान बिक्री |
| वाइन और स्पिरिट्स | घरेलू सेक्टर सुरक्षित रहेगा | वाइन और स्पिरिट्स पर कम टैक्स से बिक्री बढ़ेगी |
| निवेश और नौकरियां | मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन एनर्जी में निवेश | भारत में लॉन्ग टर्म बिजनेस और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश |
EU को भारतीय बाजार से क्या उम्मीद
EU के लिए भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है. इस डील से यूरोपीय वाइन और स्पिरिट्स भारत में सस्ती हो सकती हैं. यूरोप की लग्जरी कार कंपनियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा मशीनरी मेडिकल डिवाइस और केमिकल उत्पादों का निर्यात बढ़ सकता है. इससे EU कंपनियों की भारत में मौजूदगी मजबूत होगी.
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निवेश और नौकरियों पर असर
यह डील सिर्फ ट्रेड तक सीमित नहीं है. इसके जरिए यूरोपीय कंपनियां भारत में मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन एनर्जी में निवेश कर सकती हैं. डिजिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में भी नए प्रोजेक्ट आ सकते हैं. इससे भारत में नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे. आम लोगों के लिए इसका मतलब है ज्यादा विकल्प और बेहतर कीमतें.