रिकॉर्ड ऊंचाई पर भारत का विदेशी मुद्रा भंडार, गोल्ड रिजर्व में उछाल से 723 अरब डॉलर के पार

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने नया रिकॉर्ड कायम कर लिया है. RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 30 जनवरी को खत्म हुए सप्ताह में फॉरेक्स रिजर्व 14.36 अरब डॉलर बढ़कर 723.77 अरब डॉलर पर पहुंच गया. गोल्ड रिजर्व में तेज बढ़ोतरी इसकी सबसे बड़ी वजह रही, जिससे भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति और मजबूत हुई है.

फॉरेक्स रिजर्व Image Credit: @Money9live

Forex Reserve at Record High: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने एक बार फिर नया रिकॉर्ड बना लिया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 30 जनवरी को खत्म हुए सप्ताह में देश का फॉरेक्स रिजर्व 14.36 अरब डॉलर बढ़कर 723.77 अरब डॉलर पर पहुंच गया. यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है. इससे पहले वाले सप्ताह में भी भंडार में 8 अरब डॉलर से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जिसके बाद यह 709.41 अरब डॉलर तक पहुंचा था और सितंबर 2024 में बने पुराने रिकॉर्ड को पार कर गया था. लगातार दो हफ्तों की तेज बढ़त ने भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति को और मजबूत कर दिया है.

बढ़ते गोल्ड रिजर्व से आई तेजी

इस बार विदेशी मुद्रा भंडार में आई बड़ी उछाल के पीछे सबसे अहम वजह सोने के भंडार में तेज बढ़ोतरी रही. RBI के अनुसार, एक ही हफ्ते में गोल्ड रिजर्व की वैल्यू करीब 14.6 अरब डॉलर बढ़कर 137.68 अरब डॉलर हो गई. अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमतों में आई मजबूती का सीधा असर भारत के कुल भंडार पर पड़ा है, जिससे फॉरेक्स रिजर्व को मजबूत सहारा मिला. हालांकि, विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा माने जाने वाले फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) में इस दौरान हल्की गिरावट दर्ज की गई.

@RBI

आंकड़ों के मुताबिक, FCA 493 मिलियन डॉलर घटकर 562.39 अरब डॉलर रह गया. RBI ने साफ किया है कि FCA की गणना डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी मुद्राओं के मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर की जाती है, इसलिए इनमें गिरावट या बढ़त का असर कुल आंकड़ों पर पड़ता है.

SDR भी बढ़ा

इसके अलावा, दूसरे अंतरराष्ट्रीय असेट्स में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला. स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) में 216 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह 18.95 अरब डॉलर पर पहुंच गया. वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास भारत की रिजर्व पोजिशन भी 44 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.74 अरब डॉलर हो गई, जो वैश्विक वित्तीय संस्थानों में भारत की मजबूत स्थिति को दर्शाती है.

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी बात

अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, विदेशी मुद्रा भंडार का इस स्तर तक पहुंचना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है. मजबूत फॉरेक्स रिजर्व से न केवल रुपये को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलती है, बल्कि आयात बिल चुकाने, वैश्विक अस्थिरता से निपटने और विदेशी निवेशकों का भरोसा कायम रखने में भी सहूलियत मिलती है. कुल मिलाकर, भारत का बढ़ता विदेशी मुद्रा भंडार देश की मजबूत आर्थिक बुनियाद और वैश्विक मंच पर बढ़ती साख को दर्शाता है.

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