गल्फ देशों के साथ FTA में गोल्ड को शामिल नहीं करेगा भारत! ओमान जैसा रुख बरकरार रख सकती है सरकार

भारत सरकार GCC के साथ प्रस्तावित FTA में गोल्ड पर टैरिफ छूट देने के पक्ष में नहीं है. ओमान CEPA की तरह कीमती धातुओं को रियायत लिस्ट से बाहर रखा जा सकता है. UAE से गोल्ड इंपोर्ट में तेज बढ़ोतरी और रूल्स ऑफ ओरिजिन से जुड़े मुद्दों के बाद सरकार सतर्क है. इसके अलावा सरकार का लक्ष्य घरेलू बाजार और राजस्व हितों की सुरक्षा करना है.

भारत और गल्फ देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट Image Credit:

ग्लोबल ट्रेड एग्रीमेंट के दौर में भारत खाड़ी देशों के साथ बातचीत आगे बढ़ा रहा है, लेकिन गोल्ड जैसे संवेदनशील सेक्टर पर सावधानी बरतता दिख रहा है. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार Gulf Cooperation Council (GCC) के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) में गोल्ड पर किसी भी तरह की टैरिफ रियायत देने के मूड में नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, कीमती धातुओं को रियायत लिस्ट से बाहर रखने की स्ट्रेटजी बरकरार रह सकती है.

ओमान डील जैसा रुख GCC वार्ता में भी

सरकार ने ओमान के साथ हुए Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) में गोल्ड और सिल्वर बुलियन को टैरिफ कन्सेशन से बाहर रखा था. ऐसे में GCC के साथ बातचीत में भी यही नजरिया अपनाया जा सकता है. इसका मकसद घरेलू बाजार और राजस्व हितों की सुरक्षा बताया जा रहा है.

दरअसल, भारत ने 18 दिसंबर को मस्कट में ओमान के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते में सोना और चांदी की बुलियन सहित कुछ संवेदनशील प्रोडक्ट को टैरिफ छूट सूची से बाहर रखा गया था. सरकार का मानना है कि कीमती धातुओं पर छूट देने से इंपोर्ट में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे घरेलू उद्योग और व्यापार संतुलन प्रभावित हो सकता है.

GCC के साथ फिर शुरू हुई बातचीत

भारत और GCC, जिसमें कुल छह सदस्य हैं, के बीच वार्ता दोबारा शुरू हो गई है. GCC के सदस्य देशों में UAE, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन शामिल हैं. इन देशों ने हाल ही में टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर हस्ताक्षर किए हैं. इससे लंबे समय से ठहरी हुई FTA वार्ता औपचारिक रूप से फिर शुरू हुई है. समझौते में वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, निवेश, कस्टम प्रक्रियाएं और विवाद निपटान जैसे अहम क्षेत्र शामिल हैं.

UAE अनुभव ने बढ़ाई सतर्कता

भारत और यूनाइटेड अरब अमीरात के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) मई 2022 में लागू हुआ था. इस समझौते के तहत भारत ने सोने के इंपोर्ट पर 1 फीसदी की रियायती सीमा शुल्क दर के साथ एक निश्चित कोटा तय किया था. इस रियायत के बाद UAE से सोने का इंपोर्ट तेजी से बढ़ा. वित्त वर्ष 2022 में जहां इंपोर्ट 5.8 अरब डॉलर था, वहीं वित्त वर्ष 2025 तक यह बढ़कर करीब 16.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया. यानी लगभग तीन गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई. इस तेज बढ़ोतरी ने नीति निर्माताओं के बीच बाजार असंतुलन और राजस्व प्रभाव को लेकर चिंताएं बढ़ाईं.

रूल्स ऑफ ओरिजिन पर भी उठे सवाल

रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ बुलियन इंपोर्ट सख्त Rules of Origin मानकों पर खरे नहीं उतरे. रियायती टैरिफ के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए बाद में नियामकीय सख्ती की गई. यही वजह है कि गोल्ड को लेकर सरकार अब ज्यादा सतर्क नजर आ रही है. भारत और GCC के बीच द्विपक्षीय व्यापार FY25 में 179 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. भारत खाद्य उत्पाद, टेक्सटाइल, ज्वेलरी, फार्मास्यूटिकल्स और इंजीनियरिंग सामान का एक्सपोर्ट करता है, जबकि खाड़ी देशों से ऊर्जा इंपोर्ट व्यापार का अहम हिस्सा है. ऐसे में यह समझौता व्यापक आर्थिक प्रभाव डाल सकता है.

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