Tata-Foxconn की जोड़ी ने मचा दी हलचल, सरकार ने खोला ₹41863 करोड़ का खजाना; मोबाइल फोन की दुनिया में मास्टरस्ट्रोक

सरकार ने ECMS की तीसरी किस्त में कुल 22 प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दी है. इन प्रोजेक्ट्स में कुल निवेश ₹41,863 करोड़ का होगा. इनसे अनुमान है कि ₹2.58 लाख करोड़ का प्रोडक्शन होगा. इसके साथ ही करीब 33,791 लोगों को सीधे रोजगार मिलने की उम्मीद है.

ECMS के तहत ₹41,863 करोड़ के 22 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी Image Credit: Canva/Money9 live

Electronics Components scheme: भारत अब मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में सिर्फ असेंबली करने वाला देश नहीं रहना चाहता. सरकार की नई योजना में साफ संदेश है कि मोबाइल फोन के सबसे महंगे और जरूरी पार्ट्स अब देश में ही बनेंगे. इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने Electronics Components Manufacturing Scheme यानी ECMS के तहत ₹41,863 करोड़ के 22 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है. इसमें देश की दिग्गज कंपनियां जैसे Tata Electronics, Motherson Group और Foxconn की भारतीय यूनिट Yuzhan Technology सबसे आगे हैं.

इन प्रोजेक्ट्स से न सिर्फ मोबाइल फोन के जरूरी पार्ट्स देश में बनेंगे, बल्कि करीब 34 हजार लोगों को सीधे रोजगार भी मिलेगा. सरकार का फोकस खास तौर पर मोबाइल फोन के एनक्लोजर यानी बाहरी ढांचे पर है, जिसमें सबसे ज्यादा निवेश किया जा रहा है. यह फैसला भारत को ग्लोबल मोबाइल सप्लाई चेन में मजबूत बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

ECMS के तहत क्या मंजूर हुआ

सरकार ने ECMS की तीसरी किस्त में कुल 22 प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दी है. इन प्रोजेक्ट्स में कुल निवेश ₹41,863 करोड़ का होगा. इनसे अनुमान है कि ₹2.58 लाख करोड़ का प्रोडक्शन होगा. इसके साथ ही करीब 33,791 लोगों को सीधे रोजगार मिलने की उम्मीद है. इन सभी प्रोजेक्ट्स में मोबाइल फोन एनक्लोजर सबसे बड़ा फोकस एरिया बनकर उभरा है. अकेले एनक्लोजर से जुड़े प्रोजेक्ट्स में ₹27,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया जाएगा. इसका मतलब है कि सरकार स्मार्टफोन के सबसे महंगे और बड़े हिस्से को देश में ही बनाने पर जोर दे रही है.

कहां लगेंगे प्लांट और कितनी नौकरियां

Foxconn की भारतीय यूनिट Yuzhan Technology से करीब 16,210 नौकरियां पैदा होंगी. Tata Electronics लगभग 1,500 लोगों को रोजगार देगी. वहीं Motherson Electronic Components से 5,741 नौकरियां मिलने की उम्मीद है. ये सभी यूनिट्स मुख्य रूप से तमिलनाडु में मोबाइल एनक्लोजर बनाएंगी.

इसके अलावा लिथियम आयन बैटरी, PCB, कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले मॉड्यूल और एल्युमिनियम एक्सट्रूजन से जुड़े प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी दी गई है. ये प्रोजेक्ट्स आठ राज्यों में लगाए जाएंगे, जिनमें तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश शामिल हैं.

क्या बोले केंद्रीय मंत्री

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री Ashwini Vaishnaw ने कहा कि अब कंपनियों को डिजाइन क्षमता, लोकल सोर्सिंग, क्वालिटी और स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान देना होगा. आगे की मंजूरी इसी बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां जमीन पर कितना काम कर पाती हैं. उन्होंने बताया कि इस स्कीम से भारत अपनी जरूरत का 100 प्रतिशत मोबाइल एनक्लोजर और लैमिनेट देश में ही बना सकेगा. लिथियम आयन सेल्स की करीब 55 प्रतिशत मांग भी घरेलू उत्पादन से पूरी होगी.

सेमीकंडक्टर पर भी बड़ी तैयारी

मंत्री ने यह भी बताया कि इस साल Kaynes Technology, CG Semi, Tata Group और Micron जैसी कंपनियां सेमीकंडक्टर चिप्स का कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू करेंगी. असम में Tata का प्लांट साल के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि अब दुनिया का भरोसा भारत पर बढ़ा है और ताइवान, जापान और साउथ कोरिया जैसी बड़ी टेक इकॉनमी भारत की ओर देख रही हैं. सरकार का लक्ष्य साफ है कि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप मैन्युफैक्चरिंग में एक ग्लोबल हब बने.

डेटा सोर्स: FE

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