मिल गया होर्मुज का तोड़! खाड़ी देशों को दिखा नया रास्ता; भारत को भी मिल जाएगी राहत

ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक एनर्जी सिस्टम पर साफ दिख रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर खतरे के कारण तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है. इस स्थिति से निपटने के लिए खाड़ी देश नए ऑयल ट्रांसपोर्ट रूट, पाइपलाइन और मल्टी-मोडल नेटवर्क पर काम कर रहे हैं.

ग्लोबल ऑयल सप्लाई Image Credit: AI/canva

Hormuz Strait Crisis: ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव का असर पूरी दुनिया पर देखने को मिल रहा है. तेल और गैस के दाम में बढ़ोतरी हो रही है, वहीं फर्टिलाइजर की कीमत भी आसमान छू रही है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से खाड़ी देशों को भी परेशानी हो रही है और ये देश नए ऑयल ट्रांसपोर्ट रूट पर काम करने की तैयारी कर रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता कम करने के लिए पाइपलाइन, रेल और सड़क नेटवर्क का नया ढांचा तैयार करने पर चर्चा तेज हो गई है. इसमें भारत से जुड़ा आईएमईसी कॉरिडोर भी अहम भूमिका निभा सकता है, जिससे भारत, मिडिल ईस्ट और यूरोप के बीच सीधा कनेक्शन स्थापित होगा.

होर्मुज पर निर्भरता कम करने की रणनीति

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय से खाड़ी देशों के लिए तेल निर्यात का मुख्य मार्ग रहा है, लेकिन हाल के तनावों ने इसकी कमजोरी उजागर कर दी है. यह एक संकरा समुद्री रास्ता है, जहां किसी भी तरह की रुकावट से वैश्विक तेल सप्लाई कुछ ही दिनों में प्रभावित हो सकती है. यही वजह है कि अब गल्फ देश वैकल्पिक मार्ग विकसित करने पर जोर दे रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी भी संकट से बचा जा सके.

सऊदी अरब का मॉडल बना उदाहरण

सऊदी अरब पहले ही इस दिशा में कदम उठा चुका है. उसका ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन नेटवर्क तेल को सीधे रेड सी तक पहुंचाता है, जिससे होर्मुज की जरूरत खत्म हो जाती है. इस इंफ्रास्ट्रक्चर ने क्षेत्रीय तनाव के दौरान भी तेल सप्लाई को स्थिर बनाए रखा है. अब अन्य देश भी इसी तरह के समाधान पर विचार कर रहे हैं, जिससे सप्लाई चेन मजबूत हो सके.

हाइफा रूट और मल्टी-मोडल नेटवर्क पर फोकस

फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नई योजना के तहत अरेबियन पेनिनसुला से इजराइल के हाइफा पोर्ट तक पाइपलाइन बिछाने का विचार सामने आया है. इससे यूरोप तक तेल पहुंचाने का सीधा रास्ता तैयार हो सकता है. इसके अलावा, केवल पाइपलाइन ही नहीं बल्कि रेलवे और रोड नेटवर्क को भी इस योजना में शामिल किया जा रहा है, ताकि कई विकल्प मौजूद रहें और किसी एक मार्ग पर निर्भरता कम हो.

IMEC कॉरिडोर से बढ़ी उम्मीदें

इसी रणनीति के केंद्र में इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी IMEC है, जिसे G20 समिट 2023 के दौरान पेश किया गया था. यह प्रोजेक्ट भारत, यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन और इजराइल को जोड़ते हुए एक मजबूत ट्रेड और एनर्जी नेटवर्क तैयार करेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हाल ही में इस प्रोजेक्ट को लेकर सहयोग बढ़ाने पर जोर दे चुके हैं. हालांकि, इसमें राजनीतिक सहमति सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.

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