मिडिल ईस्ट तनाव से झटका! इंडस्ट्रियल डीजल 22 रुपये महंगा, आम लोगों के लिए पेट्रोल-डीजल के रेट में कोई बदलाव नहीं

पश्चिम एशिया तनाव का असर अब भारत पर भी दिखने लगा है. वैश्विक स्‍तर पर कच्‍चा तेल होने के चलते भारतीय तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है.नतीजतन शुकवार को इंडस्ट्रियल डीजल की कीमत में करीब 22 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का ऐलान किया गया है. हालांकि आम लोगों के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम फिलहाल स्थिर रखे गए हैं.

industrial diesel price hike Image Credit: canva/AI image

Petrol and diesel price today: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के ईधन बाजार पर भी दिखने लगा है. शुक्रवार को इंडस्ट्रियल यानी बल्क डीजल की कीमत में करीब 22 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी कर दी गई. हालांकि राहत की बात यह है कि आम लोगों के लिए पेट्रोल और डीजल के दाम फिलहाल नहीं बढ़ाए गए हैं.

दिल्ली में बल्क डीजल की कीमत 87.67 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 109.59 रुपये प्रति लीटर हो गई है. वहीं आम उपभोक्ताओं के लिए डीजल अब भी 87.67 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है.

क्यों बढ़ी कीमतें?

इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है. ईरान से जुड़े तनाव के चलते शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 112.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी. पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने साफ कहा कि आम लोगों के लिए कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है. सिर्फ प्रीमियम या इंडस्ट्रियल कैटेगरी में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, जिसका असर कुल बाजार के बहुत छोटे हिस्से पर पड़ता है.

सरकार का क्या है रुख?

सरकार फिलहाल वैश्विक हालात पर नजर बनाए हुए है, लेकिन रिटेल पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ाने का कोई तत्काल प्लान नहीं है. सरकार चाहती है कि आम उपभोक्ताओं पर बोझ न बढ़े, इसलिए फिलहाल ऑयल मार्केटिंग कंपनियां ही लागत का दबाव झेल रही हैं.

भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें पहले ही डिरेगुलेट हो चुकी हैं. यानी इनके दाम तय करने का अधिकार IOC, BPCL और HPCL जैसी कंपनियों के पास है. इसके बावजूद, अप्रैल 2022 से रिटेल कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं.

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कंपनियों पर दबाव

वैश्विक तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा हो गया है. ऐसे में ऑयल कंपनियां घाटा उठा रही है. मगर जब कीमतें कम होंगी तब कंपनियां मुनाफा कमाकर उसकी भरपाई करती हैं. इसी रणनीति के चलते FY24 में इन कंपनियों ने करीब 81,000 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड मुनाफा कमाया था. चालू वित्त वर्ष में भी दिसंबर तिमाही में इनका मुनाफा 23,743 करोड़ रुपये रहा.

88 फीसदी तेल होता है आयात

भारत अपनी जरूरत का करीब 88 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा हॉर्मुज मिडवॉटर्स के रास्ते आता है. ईरान से जुड़े तनाव के कारण इस रास्ते पर भी खतरा बना हुआ है, जिससे सप्लाई पर असर पड़ सकता है. अभी आम लोगों को राहत जरूर है, लेकिन अगर वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले समय में इसका असर पेट्रोल-डीजल के दाम और महंगाई दोनों पर पड़ सकता है.