Crude Oil Price Today: ब्रेंट $112 प्रति बैरल के पार, WTI में भी तेज उछाल; इन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है. सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से बाजार में चिंता गहरा गई है. इसका असर कंपनियों की लागत, मुनाफे और आम लोगों की जेब पर साफ नजर आ रहा है, जिससे महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है.
Crude Oil Price Today: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध ने वैश्विक कच्चे तेल बाजार को अस्थिर कर दिया है, जिसके चलते कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है. सप्लाई बाधित होने के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ी है और तेल महंगा होता जा रहा है. इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है, जहां कंपनियों की लागत बढ़ रही है और मुनाफे पर दबाव बन रहा है. साथ ही, महंगे तेल का असर आम उपभोक्ताओं पर भी दिखने लगा है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा और गहरा गया है. ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने का नाम नहीं ले रहा है, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क इंडेक्स WTI भी 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ही कारोबार कर रहा है.
कच्चे तेल में मजबूती
अमेरिकी बेंचमार्क इंडेक्स WTI की कीमत करीब 98.09 डॉलर तक पहुंच गई है. इसमें 2.66% की रोजाना बढ़त दर्ज की गई है. खास बात यह है कि पिछले एक महीने में इसमें 47.93% की तेजी आई है, जबकि सालभर में यह 43.66% तक बढ़ चुका है. यह संकेत देता है कि बाजार में मांग लगातार मजबूत बनी हुई है और निवेशक इस सेक्टर में भरोसा जता रहे हैं. जैसे-जैसे युद्ध गहराता जाएगा तेल की कीमतों में आग लगती जाएगी.

ब्रेंट क्रूड ने दिखाई और ज्यादा ताकत
ब्रेंट क्रूड (Brent) भी तेजी के मामले में पीछे नहीं है. इसकी कीमत लगभग 112.50 डॉलर तक पहुंच गई है. इसमें 3.54% की बढ़त दर्ज हुई है. महीने भर में इसमें 57.36% का उछाल और सालभर में 55.90% की बढ़त देखने को मिली है. यह तेजी बताती है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की मांग मजबूत बनी हुई है, जिससे कीमतों को सहारा मिल रहा है. ध्यान रहे कि ब्रेंट की कीमत हाल ही में 119 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया था.
किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है?
जब कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है, तो इसका सीधा असर कंपनियों की लागत और मुनाफे पर पड़ता है. खासकर वे सेक्टर ज्यादा प्रभावित होते हैं जो कच्चे माल और ट्रांसपोर्ट पर ज्यादा खर्च करते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, जब भी तेल महंगा हुआ है, तब कंपनियों की कच्चे माल की लागत करीब 15% से 40% तक बढ़ गई, जबकि उनका ग्रॉस मार्जिन 78 से 658 बेसिस प्वाइंट तक घट गया. तेल की कीमतें तेजी से बढ़ने पर कई कंपनियां तुरंत अपने प्रोडक्ट के दाम नहीं बढ़ा पातीं. ऐसे में उनकी कमाई पर दबाव बढ़ जाता है और मुनाफा कम हो जाता है.

इस स्थिति में सबसे ज्यादा असर इन सेक्टरों पर देखा जाता है –
- केमिकल्स
- सीमेंट और बिल्डिंग मटेरियल
- ऑटो सेक्टर
- FMCG (रोजमर्रा के सामान वाली कंपनियां)

यानी, तेल महंगा होते ही इन सेक्टरों के लिए लागत संभालना मुश्किल हो जाता है और उनका मुनाफा प्रभावित होता है.
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