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LPG संकट से क्लाउड किचन ठप! IRCTC को इंडक्शन चूल्हे पर पकाना पड़ रहा खाना, ट्रेन में वर्षों से बंद थी सर्विस

व्यावसायिक LPG सिलेंडरों की भारी कमी के कारण IRCTC को रेलवे कैटरिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव करना पड़ा है. अब चलती ट्रेनों की पेंट्री कारों में इंडक्शन स्टोव की मदद से भोजन तैयार किया जा रहा है. रोजाना करीब 17 लाख यात्रियों के लिए 1,400 ट्रेनों में भोजन उपलब्ध कराने वाली IRCTC ने बड़े स्टेशनों पर भी इलेक्ट्रिक कुकिंग की व्यवस्था शुरू की है.

प्रतिकात्मक तस्वीर Image Credit: FreePik

पश्चिम एशिया में तनाव के चलते देश में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की भारी किल्लत हो गई है. ऐसे में ट्रेन यात्रियों को खाना डिलीवर कराने वाले रेस्टोरेंट और क्लाउड किचन ठप पड़ गए. इस संकट से निपटने के लिए भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (IRCTC) ने एक बड़ा फैसला लिया है. ट्रेनों में गैस पर खाना पकाने की प्रथा को कुछ साल पहले बंद करने के बाद, IRCTC अब चलती ट्रेनों में फिर से खाना पकाने की शुरुआत कर रही है. लेकिन इस बार खाना एलपीजी पर नहीं बल्कि बिजली से चलने वाले इंडक्शन चूल्हों पर पकेगा.

रोजाना 17 लाख भोजन परोसने की चुनौती

देशभर में हर दिन 1,400 ट्रेनों के जरिए लगभग 17 लाख यात्रियों को भोजन परोसा जाता है. इसके लिए रोजाना करीब 1,000 कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की जरूरत होती है. संकट को देखते हुए IRCTC ने राजधानी, शताब्दी, दुरंतो और वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों के आधुनिक एलएचबी (LHB) पैंट्री कारों को इलेक्ट्रिक कुकिंग के लिए तैयार कर दिया है.

ईटी रिपोर्ट के मुताबिक, IRCTC के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर संजय कुमार जैन ने कहा कि वेंडर्स को चलती ट्रेनों के सुरक्षित एलएचबी पैंट्री कारों में बिजली से खाना पकाने की अनुमति दे दी गई है. इसके साथ ही, बड़े स्टेशनों पर भी इंडक्शन कुकिंग शुरू कर दी गई है. सरकार के निर्देशों के बाद आईओसीएल (IOCL), बीपीसीएल (BPCL) और एचपीसीएल (HPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियों से रेलवे को प्राथमिकता के आधार पर गैस सप्लाई करने का तालमेल भी बनाया गया है.

रेलवे रसोई का 60% हिस्सा होगा इलेक्ट्रिक

सिर्फ चलती ट्रेनें ही नहीं, बल्कि स्टेशनों पर मौजूद फूड प्लाजा, रिफ्रेशमेंट रूम और जन आहार केंद्रों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे जल्द से जल्द इंडक्शन और माइक्रोवेव का इस्तेमाल शुरू करें. रेलवे का लक्ष्य है कि उसकी रसोइयों का करीब 60% काम बिजली आधारित कुकिंग पर शिफ्ट कर दिया जाए.

मुनाफे पर असर और किराए में बढ़ोतरी की चर्चा

इस अचानक आए संकट और बढ़ती इनपुट लागत के कारण IRCTC की वित्तीय सेहत पर भी असर पड़ा है. वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कैटरिंग सेगमेंट का मार्जिन पिछले साल के 10.4% से घटकर 6.3% रह गया है. बाजार जानकारों का कहना है कि साल 2019 के बाद से ट्रेन के खाने की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. घाटे से बचने के लिए रेलवे को या तो दाम बढ़ाने होंगे या फिर यात्रियों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी की जरूरत होगी. हालांकि, किराए में बढ़ोतरी को लेकर आईआरसीटीसी प्रमुख ने कहा कि इसका अंतिम फैसला रेल मंत्रालय ही करता है.

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रूट ब्लॉक होने से खड़ा हुआ संकट

गैस की यह भारी किल्लत 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने के बाद से पैदा हुई है. इस तनाव की वजह से पश्चिम एशिया का मुख्य समुद्री मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ पूरी तरह प्रभावित हुआ है, जहां से भारत अपनी जरूरत की भारी मात्रा में गैस और तेल आयात करता है. संसदीय आंकड़ों के अनुसार, देश में अभी भी 341 ऐसी ट्रेनें हैं जिनमें पैंट्री कार की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है.