एयरलाइंस मनमाने तरीके से नहीं बढ़ा पाएंगी किराया, सरकार ने जेट फ्यूल की कीमतों पर लगाई 25% की सीमा
सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए जेट फ्यूल यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में हर महीने होने वाली बढ़ोतरी पर सीमा तय कर दी है. इस फैसले का मकसद यह है कि किराए में अचानक बहुत ज्यादा उछाल न आए और हवाई यात्रा लोगों के लिए किफायती बनी रहे.

Air fare: हवाई यात्रा अब आम लोगों के लिए पहले से ज्यादा आसान हो गई है, लेकिन इसके किराए में अचानक बढ़ोतरी यात्रियों के लिए परेशानी बन जाती है. खासकर जब ईंधन महंगा होता है, तो एयरलाइंस कंपनियां किराया बढ़ा देती हैं और इसका सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ता है.
ऐसे में सरकार ने एक अहम कदम उठाया है ताकि लोगों को राहत मिल सके. सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए जेट फ्यूल यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में हर महीने होने वाली बढ़ोतरी पर सीमा तय कर दी है. इस फैसले का मकसद यह है कि किराए में अचानक बहुत ज्यादा उछाल न आए और हवाई यात्रा लोगों के लिए किफायती बनी रहे.
सरकार का फैसला क्या है
केंद्र सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए जेट फ्यूल की कीमत में हर महीने अधिकतम 25 प्रतिशत तक ही बढ़ोतरी की सीमा तय की है. यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं.
सरकार का कहना है कि जेट फ्यूल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से तय होती हैं और हाल के दिनों में इनमें तेजी आई है. अगर पूरी बढ़ोतरी एक साथ लागू की जाती, तो हवाई किराए में भारी उछाल आ सकता था. इसलिए कीमतों को धीरे-धीरे बढ़ाने का फैसला लिया गया है.
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यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा
रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने कहा कि इस फैसले से यात्रियों को अचानक बढ़ने वाले किराए से राहत मिलेगी. इससे एयरलाइंस कंपनियां भी एकदम से किराया नहीं बढ़ा पाएंगी.
एयरलाइंस का रुख
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo ने ईंधन महंगा होने के बाद अपने फ्यूल चार्ज बढ़ाए हैं. हालांकि कंपनी का कहना है कि उसने पूरी लागत यात्रियों पर नहीं डाली है, ताकि उन पर ज्यादा बोझ न पड़े.
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