कच्चे तेल से बनती हैं पैरासिटामोल समेत ये दवाइयां, होर्मुज संकट से लो लेवल पर स्टॉक! इलाज पर मंडराएगा खतरा
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रैट ऑफ होर्मूज के बंद होने से वैश्विक तेल सप्लाई पर गहरा असर पड़ा है. इसका असर अब पेट्रोल-डीजल से आगे बढ़कर दवा उद्योग तक पहुंच गया है. सच यह है कि रोजमर्रा की कई जरूरी दवाइयां पेट्रोलियम उत्पादों से बनती हैं, जिससे दवाओं की उपलब्धता पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं.
Medicine Crisis amid War in West Asia: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के बंद होने से वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई पर गंभीर असर पड़ा है. दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की आवाजाही इसी रास्ते से होती है. इसका असर अब सिर्फ पेट्रोल-डीजल या ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दवा उद्योग तक पहुंच चुका है. सच यह है कि हमारी रोजमर्रा की कई जरूरी दवाइयां सीधे या परोक्ष रूप से पेट्रोलियम उत्पादों से बनती हैं. ऐसे में तेल आपूर्ति में संकट का मतलब है – दवा बनाने वाली कंपनियों के कारोबार पर भी गंभीर संकट पैदा हो सकते हैं. साथ ही लंबी अवधि में ये कंपनियां अपना कारोबार बंद कर सकती है. कंपनियों के बंद होने के संकेत अभी से ही मिलने लगे हैं.
कच्चे तेल से दवा तक: कैसे जुड़ी है पूरी चेन?
कच्चा तेल रिफाइन होकर पेट्रोकेमिकल्स जैसे बेंजीन, टोल्यून, एथिलीन और प्रोपिलीन में बदलता है. यही केमिकल्स आगे दवाओं के एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) बनाने में इस्तेमाल होते हैं. यानी जो नाफ्था प्लास्टिक बनाने में जाता है, वही आगे चलकर दवाओं के निर्माण की बुनियाद भी बनता है. अगर पेट्रोकेमिकल क्रैकर्स बंद होते हैं, तो प्लास्टिक के साथ-साथ दवाओं का उत्पादन भी प्रभावित होता है.
रोजमर्रा की दवाइयां भी पेट्रोलियम आधारित
चीफ स्पेशलिस्ट Sarfaraz Ahmed के अनुसार, आम लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली कई दवाइयां पूरी तरह पेट्रोकेमिकल्स पर निर्भर हैं:
- पैरासिटामोल – फिनोल (पेट्रोलियम उत्पाद) से तैयार होता है.
- एस्पिरिन – बेंजीन से बनती है.
- इबुप्रोफेन – आइसोब्यूटिलबेंजीन जैसे पेट्रोकेमिकल्स से तैयार होता है.
- मेटफॉर्मिन – 80–90% तक पेट्रोकेमिकल आधारित दवा है.
इसके अलावा एंटीबायोटिक्स, एंटीहिस्टामिन और दर्द निवारक दवाओं के निर्माण में भी पेट्रोलियम आधारित इंटरमीडिएट्स की अहम भूमिका होती है.
सिर्फ दवा नहीं, पूरा मेडिकल सिस्टम तेल पर निर्भर
दवाओं के अलावा मेडिकल सेक्टर की कई जरूरी चीजें भी पेट्रोलियम पर आधारित हैं:
- कैप्सूल और टैबलेट की कोटिंग
- सिरिंज, IV बैग और पैकेजिंग प्लास्टिक
- दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले सॉल्वेंट (जैसे मेथनॉल, आइसोप्रोपेनॉल)
- यहां तक कि वैक्सीन निर्माण में इस्तेमाल होने वाले लिपिड नैनोपार्टिकल्स और पैकेजिंग भी पेट्रोकेमिकल्स से बनते हैं.
सप्लाई चेन पर खतरा
भारत दुनिया की लगभग 20% जेनेरिक दवाएं बनाता है और अमेरिका की 40% जेनेरिक जरूरत पूरी करता है, लेकिन भारत की मेथनॉल सप्लाई का करीब 87.7% हिस्सा होर्मुज मार्ग पर निर्भर है. यह रास्ता बंद होने से इस इंडस्ट्री पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. सरकार ने घरेलू LPG को प्राथमिकता दी है, जिससे इंडस्ट्रियल फीडस्टॉक की कमी बढ़ रही है. The Ascent Begins के लेखक और इंडिपेंडेंट एनालिस्ट Shanaka Anslem Perera ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में बताया कि कंपनियों के पास 3–6 महीने का स्टॉक तो है, लेकिन कच्चे माल की सप्लाई घटने से यह तेजी से खत्म हो सकता है. दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक सीरम इंस्टीट्यूट भी इसी पेट्रोकेमिकल चेन पर निर्भर है.
