क्या है Pax Silica, जो भारत को जल्द दे सकता है परमानेंट मेंबर बनने का न्योता, वैश्विक तकनीकी और सप्लाई चेन में इसके क्या मायने

वैश्विक तकनीकी सहयोग को लेकर एक अहम पहल में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. सप्लाई चेन, उभरती तकनीक और रणनीतिक साझेदारी से जुड़ा यह कदम देशों के बीच तालमेल को नई दिशा दे सकता है. आने वाले हफ्तों में इसके दूरगामी असर पर नजर रहेगी.

Pax Silica Image Credit: @SergioGor X

भारत-अमेरिका रिश्तों में तकनीक और सप्लाई चेन के मोर्चे पर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अमेरिका के नेतृत्व वाली रणनीतिक पहल Pax Silica में भारत को अगले महीने पूर्ण सदस्य के तौर पर शामिल होने का न्योता दिया जा सकता है. नई दिल्ली दौरे पर आए अमेरिका के नए राजदूत Sergio Gor ने इसकी जानकारी दी. यह कदम सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे भविष्य के अहम क्षेत्रों में भारत-अमेरिका सहयोग को नई दिशा दे सकता है.

Pax Silica क्या है

Pax Silica अमेरिका के नेतृत्व में शुरू की गई एक रणनीतिक पहल है, जिसका मकसद सिलिकॉन और उससे जुड़ी पूरी सप्लाई चेन को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है. इसमें क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा इनपुट, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर्स, AI इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं. इस पहल का उद्देश्य जबरन निर्भरता को कम करना, उभरती तकनीकों के लिए जरूरी संसाधनों की सुरक्षा करना और भरोसेमंद साझेदार देशों के साथ बड़े पैमाने पर तकनीकी सिस्टम विकसित करना है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह एक “पॉजिटिव-सम पार्टनरशिप” है, यानी इसका फोकस सहयोग पर है, किसी को बाहर रखने पर नहीं.

शुरुआत में भारत क्यों नहीं था शामिल

Pax Silica की शुरुआत दिसंबर में हुई थी. पहले शिखर सम्मेलन में जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड्स, यूनाइटेड किंगडम, इजरायल, UAE और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शामिल थे. इसके अलावा ताइवान, यूरोपीय संघ, कनाडा और OECD ने भी इसमें भाग लिया था. उस समय भारत को संस्थापक सदस्य के रूप में शामिल नहीं किया गया था. अमेरिकी अधिकारियों ने तब कहा था कि समूह उन देशों के साथ बनाया गया है जो पहले से सेमीकंडक्टर और AI सप्लाई चेन में अहम भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि भारत को “बेहद रणनीतिक संभावित साझेदार” माना गया था.

अब भारत को क्यों मिल रहा है न्योता

Sergio Gor के मुताबिक, जैसे-जैसे नई तकनीकें वैश्विक ताकत और मैन्युफैक्चरिंग को नया आकार दे रही हैं, भारत और अमेरिका का साथ काम करना बेहद जरूरी हो गया है. उन्होंने कहा कि इस पहल की शुरुआत से ही भारत और अमेरिका को साथ चलना चाहिए. Gor ने इसे “कूटनीति को नए सिरे से परिभाषित करने का एक बार मिलने वाला मौका” बताया और कहा कि “भारत से ज्यादा जरूरी साझेदार कोई नहीं है.”

Gor ने भारत-अमेरिका संबंधों के राजनीतिक पहलू पर भी बात की. उन्होंने Donald Trump और Narendra Modi के बीच व्यक्तिगत रिश्तों का जिक्र किया. Gor के मुताबिक, ट्रंप ने हाल ही में भारत यात्रा और प्रधानमंत्री मोदी के साथ दोस्ती को याद किया है और आने वाले एक-दो साल में भारत आने की इच्छा भी जताई है.

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ट्रेड डील और आगे की बातचीत

भारत को Pax Silica में शामिल करने की संभावनाएं ऐसे समय पर सामने आई हैं, जब भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापक व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है. अगला दौर जल्द होने वाला है. Gor ने माना कि बातचीत आसान नहीं है, लेकिन दोनों देश समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध हैं.