तीन महीने के उच्च स्तर पर खुदरा महंगाई, दिसंबर में 1.3% पर पहुंची, केरल में सबसे ज्यादा
ताजा महंगाई आंकड़ों में राज्यों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है. खाद्य कीमतों की चाल और बीते साल के बेस का असर अब साफ दिखने लगा है. आने वाले महीनों में महंगाई का रुख किस दिशा में जाएगा, इसे लेकर नीति स्तर पर सतर्क नजर रखी जा रही है.
India CPI inflation December: देश में महंगाई के मोर्चे पर एक बार फिर हलचल दिखने लगी है. लंबे समय से बेहद निचले स्तर पर बनी हुई खुदरा महंगाई अब धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ रही है. दिसंबर में रिटेल इन्फ्लेशन तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि महंगाई का वह दौर खत्म होने की ओर है, जिसमें कीमतों पर दबाव बहुत कम था.
दिसंबर में खुदरा महंगाई बढ़कर 1.3%
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 1.3% हो गई, जो नवंबर में 0.7% थी. यह बीते तीन महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. आंकड़े बताते हैं कि खाने-पीने की चीजों में आई गिरावट की रफ्तार अब धीमी पड़ने लगी है और पिछले साल के कम बेस का असर भी धीरे-धीरे खत्म हो रहा है.
हाल के महीनों में महंगाई लगातार Reserve Bank of India के 2-6% के टॉलरेंस बैंड से नीचे रही है. पिछले छह महीनों में से पांच महीनों में महंगाई 2% से कम रही. हालांकि अब यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले महीनों में महंगाई धीरे-धीरे 4% के मीडियम टर्म टारगेट की ओर बढ़ सकती है, क्योंकि बेस इफेक्ट अब अनुकूल नहीं रहा है.
अर्थशास्त्रियों के अनुमान के मुताबिक दिसंबर में महंगाई 1.6% तक जा सकती थी, लेकिन वास्तविक आंकड़ा इससे कम रहा. इसके बावजूद यह साफ है कि महंगाई ने अपना निचला स्तर छोड़ दिया है. खासतौर पर खाने-पीने की कीमतों में अब धीरे-धीरे मजबूती के संकेत दिखने लगे हैं.
फूड इनफ्लेशन अब भी निगेटिव, लेकिन राहत घट रही
कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स में करीब 40% हिस्सेदारी रखने वाली फूड इन्फ्लेशन दिसंबर में -2.7% रही. हालांकि नवंबर में यह -3.9% थी. यानी फूड प्राइस में गिरावट अभी बनी हुई है, लेकिन उसकी तीव्रता कम हो रही है. जून 2025 से शुरू हुई फूड डिफ्लेशन की स्थिति अब खत्म होने के करीब मानी जा रही है.
दिसंबर के आंकड़ों के साथ FY26 की तीसरी तिमाही में औसत खुदरा महंगाई 0.8% रही, जो RBI के 0.6% के अनुमान से थोड़ी ज्यादा है. इससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में केंद्रीय बैंक की नीति थोड़ी सतर्क हो सकती है.
किस शहर में हावी रही महंगाई
सरकारी आंकड़े के मुताबिक दिसंबर 2025 में सालाना आधार पर महंगाई के मामले में केरल सबसे ऊपर रहा, जहां महंगाई दर करीब 9.49% दर्ज की गई. इसके बाद कर्नाटक में 2.99%, आंध्र प्रदेश में 2.71%, तमिलनाडु में 2.67% और जम्मू-कश्मीर में 2.26% की महंगाई रही.
ब्याज दरों और आगे की नीति पर असर
CPI आंकड़ों पर Garima Kapoor, डिप्टी हेड ऑफ रिसर्च एंड इकोनॉमिस्ट, Elara Capital का कहना है कि भारत की CPI महंगाई उनके अनुमान के अनुरूप करीब 1.38% रही है, क्योंकि खाद्य कीमतों में नरमी बनी हुई है. उनका मानना है कि FY26 में CPI महंगाई RBI के अनुमान से 10–15 बेसिस प्वाइंट कम रह सकती है. इसी आधार पर वे फरवरी 2026 में 25 बेसिस प्वाइंट की ब्याज दर कटौती की उम्मीद जता रही हैं.
फरवरी 2025 से अब तक RBI कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर चुका है. कम महंगाई ने इस राहत को आसान बनाया था. लेकिन अब महंगाई में दिख रही हल्की बढ़त के चलते अगली मौद्रिक नीति बैठक में सतर्क रुख अपनाया जा सकता है. RBI की अगली बैठक 4 से 6 फरवरी को होनी है, जो बजट के ठीक बाद होगी, ऐसे में नीतिगत संकेतों पर बाजार की नजर बनी रहेगी.
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2012 बेस ईयर का आखिरी आंकड़ा
दिसंबर का महीना भारत के महंगाई आंकड़ों के लिहाज से एक अहम मोड़ भी रहा, क्योंकि यह 2012 बेस ईयर के तहत जारी होने वाला आखिरी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आंकड़ा है. फरवरी 12 को आने वाले जनवरी के आंकड़ों से CPI सीरीज 2024 के नए बेस ईयर पर शिफ्ट हो जाएगी, जिसमें इंडेक्स को अपडेट किया गया है, ज्यादा वस्तुओं को शामिल किया गया है और गैर-खाद्य मदों को पहले से ज्यादा वेटेज दिया गया है, जिससे मौजूदा CPI में खाद्य कीमतों के उतार-चढ़ाव से होने वाली ज्यादा अस्थिरता कम होने की उम्मीद है.