अब भी अटके हैं 50 लाख से ज्यादा रिफंड मामले! इस वजह से हो रही है ITR प्रोसेसिंग में देरी, अब क्या करें टैक्सपेयर्स
करोड़ों टैक्स रिटर्न प्रोसेस होने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग अब भी एक अहम अपडेट का इंतजार कर रहे हैं. सिस्टम में बढ़ी जांच, डेटा मिलान और नई प्रक्रिया ने इस बार समय-सीमा को प्रभावित किया है. ऐसे में टैक्सपेयर्स के लिए सतर्क रहना और जानकारी अपडेट रखना जरूरी हो गया है.
Income tax refund delay AY 2025-26: आयकर रिटर्न भरने वालों के लिए इस बार इंतजार कुछ ज्यादा लंबा हो गया है. Assessment Year 2025–26 के लिए करोड़ों रिटर्न प्रोसेस हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद लाखों टैक्सपेयर्स अब भी अपने रिफंड का इंतजार कर रहे हैं. कई लोगों के लिए यह सवाल परेशान करने वाला है कि जब रिटर्न फाइल और वेरिफाई हो चुका है, तो फिर प्रोसेसिंग और रिफंड में देरी क्यों हो रही है.
Income-tax Department के आंकड़ों के मुताबिक 11 जनवरी तक AY 2025–26 के लिए करीब 8.8 करोड़ ITR फाइल किए जा चुके हैं. इनमें से 8.68 करोड़ रिटर्न वेरिफाई हो चुके हैं और 8.15 करोड़ रिटर्न प्रोसेस भी किए जा चुके हैं. इसके बावजूद करीब 53 लाख रिटर्न अभी भी प्रोसेसिंग के लिए पेंडिंग हैं. इन पेंडिंग मामलों में बड़ी संख्या ऐसे टैक्सपेयर्स की है, जिन्हें रिफंड मिलना बाकी है.
इस साल प्रोसेसिंग धीमी क्यों है
इस बार देरी की सबसे बड़ी वजह आयकर विभाग की सख्त जांच प्रक्रिया मानी जा रही है. खासतौर पर उन रिटर्न्स पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, जिनमें बड़ा या असामान्य रिफंड क्लेम किया गया है. अब रिटर्न केवल ऑटोमैटिक सिस्टम से ही पास नहीं हो रहे, बल्कि कई मामलों में उन्हें मैन्युअल जांच के लिए अलग कर दिया जा रहा है.
डेटा एनालिटिक्स और रिस्क फिल्टर की भूमिका
इस साल आयकर विभाग ने डेटा एनालिटिक्स और ऑटोमेटेड रिस्क फिल्टर का इस्तेमाल काफी बढ़ा दिया है. जिन रिटर्न्स में घोषित इनकम और AIS या Form 26AS के आंकड़ों में अंतर दिखता है, वे सिस्टम द्वारा तुरंत फ्लैग कर दिए जाते हैं. ऐसे मामलों में प्रोसेसिंग रुक जाती है और टैक्सपेयर्स को रिविजन या स्पष्टीकरण देने के संकेत मिलते हैं. यही वजह है कि ऑटोमेटेड प्रोसेसिंग की रफ्तार पहले के मुकाबले धीमी हो गई है.
अन्य कारण जिन्होंने रफ्तार घटाई
देरी की एक और वजह NUDGE पहल का दूसरा चरण है, जिसे Central Board of Direct Taxes ने लागू किया है. इसके तहत विदेशी आय और विदेशी संपत्तियों से जुड़े डेटा की जांच की जा रही है. FY 2024–25 के AEOI डेटा के आधार पर यह देखा जा रहा है कि कहीं किसी टैक्सपेयर ने अपनी ITR में विदेशी इनकम या एसेट्स छिपाए तो नहीं हैं. इस प्रक्रिया में जिन रिटर्न्स पर शक है, उनकी प्रोसेसिंग ज्यादा सावधानी से की जा रही है, जिससे रिफंड में देरी हो रही है.
इन दो कारणों के अलावा रिफंड में देरी की कुछ और भी वजहें रहीं. इस साल रिटर्न फाइलिंग की अंतिम तारीख दो बार बढ़ाई गई थी. पहले 31 जुलाई से 15 सितंबर और फिर 16 सितंबर 2025 तक का समय दिया गया. इसका नतीजा यह हुआ कि सितंबर में अचानक बहुत ज्यादा रिटर्न फाइल हुए और प्रोसेसिंग सिस्टम पर दबाव बढ़ गया. इसके अलावा बैंक, नियोक्ता और म्यूचुअल फंड्स से मिले डेटा में अंतर भी प्रोसेसिंग को धीमा कर रहा है. कुछ जटिल और रिफंड-हैवी मामलों में अब अधिकारी स्तर पर जांच की जा रही है.
जिनका रिटर्न छूट गया, उनके लिए क्या विकल्प
जो टैक्सपेयर्स तय समय तक रिटर्न फाइल नहीं कर पाए थे, उनके लिए बिलेटेड रिटर्न की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2025 थी. अब उनके पास केवल अपडेटेड रिटर्न का विकल्प बचता है, जिसे सेक्शन 139(8A) के तहत फाइल किया जा सकता है. हालांकि यह विकल्प रिफंड क्लेम करने या बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि छूटी हुई आय बताने या गलती सुधारने के लिए है. इसमें अतिरिक्त टैक्स और पेनल्टी भी लग सकती है.
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रिफंड का इंतजार कर रहे टैक्सपेयर्स क्या करें
जिन लोगों का रिटर्न फाइल और वेरिफाई हो चुका है लेकिन प्रोसेस नहीं हुआ है, उन्हें आयकर पोर्टल पर नियमित रूप से स्टेटस चेक करते रहना चाहिए. बैंक अकाउंट वेरिफिकेशन पूरा होना जरूरी है. अगर विभाग की ओर से कोई ईमेल या SMS आए तो तुरंत जवाब देना चाहिए. अगर AIS या Form 26AS में गड़बड़ी है और संशोधन की अनुमति है, तो समय रहते रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करना बेहतर रहेगा.
सख्त जांच और बेहतर कंप्लायंस के दौर में रिफंड मिलने में समय लग सकता है, लेकिन सही जानकारी और समय पर कार्रवाई से अनावश्यक देरी से बचा जा सकता है.
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