रुपये की सेफ्टी को RBI ने बनाई 84 अरब डॉलर की शील्ड, FPI की वापसी तेज, क्या रैली को तैयार बाजार?
RBI ने अपने मासिक Bulletin में बताया है कि रुपये की स्थिरता के लिए रिजर्व बैंक ने 84 अरब डॉलर की बड़ी फॉरवर्ड सेल पोजिशन बना रखी है. इसके साथ ही बताया गया है कि अक्टूबर में FPIs ने तीन महीने की बिकवाली के बाद जोरदार वापसी की है. वहीं, IPO बूम, मजबूत फॉरेक्स रिजर्व और रिसाइलियंट डोमेस्टिक डिमांड बाजार को सपोर्ट कर रहे हैं.
ग्लोबल मार्केट्स में उथल-पुथल बढ़ रही है. AI स्टॉक्स में ओवरवैल्यूएशन का डर बना हुआ है. लेकिन इन दबावों के बीच भारतीय शेयर बाजार के लिए RBI के मासिक बुलेटिन में कई बड़े पॉजिटिव संकेत साफ दिखते हैं. मसलन, रुपये को बचाने के लिए RBI ने एक बड़ी करेंसी शील्ड तैयार की है, जिसके तहत 84 अरब डॉलर की फॉरवर्ड सेलिंग पोजिशन बनाई हुई है. इसके अलावा अक्टूबर में FPI इनफ्लो दोबारा मजबूत हुआ है.
RBI का बड़ा दांव
RBI Bulletin में खुलासा हुआ है कि रुपये पर बढ़ते दबाव को थामने के लिए रिजर्व बैंक ने फॉरवर्ड मार्केट में 84 अरब USD की भारी नेट डॉलर सेल पोजिशन बनाई है. यह करेंसी स्टेबिलिटी के लिए अब तक की सबसे बड़ी शील्ड मानी जा रही है. डॉलर इंडेक्स की मजबूती और रिकॉर्ड ट्रेड डिफिसिट के बीच यह पोजिशन बताती है कि RBI आगामी महीनों में भी करंसी वोलैटिलिटी को आक्रामक तरीके से कंट्रोल करेगा.
FPI की वापसी से सेंटीमेंट बदला
अक्टूबर में तीन महीनों की बिकवाली के बाद FPIs ने भारतीय बाजार में वापसी की है. RBI Bulletin के मुताबिक 2025–26 में अब तक (20 नवंबर तक) कुल नेट FPI इनफ्लो 4 करोड़ डॉलर रहा है, जिसमें सबसे बड़ा योगदान डेट सेग्मेंट का है. इक्विटी में इस अवधि में नेट आउटफ्लो दर्ज हुआ है. डेट में मजबूत इनफ्लो के चलते कुल FPI बैलेंस पॉजिटिव में रहा है. अक्टूबर में FPIs ने तीन महीने की बिकवाली रोकते हुए दोबारा खरीदारी की, जहां डेट सेग्मेंट में इनफ्लो करीब 3.6 अरब डॉलर रहा है.
IPO बूम ने लिक्विडिटी को संभाला
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि प्राइमरी मार्केट में IPO बूम ने तेजी के रुख को कायम रखा है. सितंबर के 13,000 करोड़ रुपये की तुलना में अक्टूबर में IPO से बाजार में 45,000 करोड़ की लिक्विडिटी आई है. IPO में FPIs और DIIs दोनों का हिस्सा लेना इस बात का संकेत है कि डोमेस्टिक लिक्विडिटी भारतीय बाजार की बैलेंसिंग फोर्स बनी हुई है, जो सैकंडरी मार्केट की वोलैटिलिटी को सह रही है.
रुपये की चाल में स्थिर संकेत
डॉलर स्ट्रेंथ के बावजूद रुपये की गिरावट सीमित रही. RBI के हस्तक्षेप और मजबूत फॉरवर्ड पोजिशन ने एक्सचेंज रेट को काबू में रखा है. करेंसी स्टेबिलिटी का सीधा फायदा इक्विटी मार्केट के सेंटिमेंट्स को मिलता है. क्योंकि, FPI फ्लो अचानक झटके से कम प्रभावित होते हैं और रेट सेंसिटिव सेक्टर्स को ब्रीदिंग स्पेस मिलता है.
फॉरेक्स रिजर्व मजबूत
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 11 महीनों के आयात को कवर कर रहा है. इसमें वोलैटाइल कैपिटल फ्लो का हिस्सा घटा है, जिससे बाहरी झटकों को झेलने की क्षमता पहले से बेहतर दिखती है. हालांकि, अक्टूबर का रिकॉर्ड हाई ट्रेड डेफिसिट चिंता का बड़ा कारण है, जो रुपये पर दबाव का बड़ा कारण बना हुआ है.
मार्केट का आगे का फ्लो
RBI की करंसी शील्ड और FPI इनफ्लो शॉर्ट टर्म में इक्विटी मार्केट को सपोर्ट करते दिखेंगे. इसके अलावा डोमेस्टिक लिक्विडिटी, IPO बूम भी बाजार को सपोर्ट कर रहा है. हालांकि, ग्लोबल AI स्टॉक्स बबल के फटने की स्थिति का असर भारतीय इक्विटी बाजार पर भी दिख सकता है. कुल मिलाकर, रिजर्व बैंक ग्लोबल रिस्क से रुपये और भारतीय बाजार को बचाने के लिए आक्रामक रुख अपनाए हुए है.
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