महंगा तेल, ग्लोबल कर्ज और बाजार में तनाव… RBI ने बढ़ते झटकों की चेतावनी दी, इन 5 सेक्टर्स में मजबूत बना हुआ है भारत

शुक्रवार को RBI के बुलेटिन में छपे भाषणों और लेखों में, गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम 'बहुत अधिक अनिश्चितता और चुनौतियों' के दौर से गुजर रहा है, जिसका असर आर्थिक गतिविधियों और फाइनेंशियल बाजारों, दोनों पर पड़ रहा है.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (फाइल फोटो) Image Credit: Getty image

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने तेल की कीमतों में अचानक उछाल, बढ़ते सरकारी कर्ज और फाइनेंशियल मार्केट में तनाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था को होने वाले बढ़ते जोखिमों की ओर इशारा किया है. साथ ही, RBI ने उन कई क्षेत्रों का भी जिक्र किया है जहां बाहरी अनिश्चितताओं के बढ़ने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है.

शुक्रवार को RBI के बुलेटिन में छपे भाषणों और लेखों में, गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम ‘बहुत अधिक अनिश्चितता और चुनौतियों’ के दौर से गुजर रहा है, जिसका असर आर्थिक गतिविधियों और फाइनेंशियल बाजारों, दोनों पर पड़ रहा है.

अनिश्चितता और चुनौतियां

शुक्रवार को RBI के बुलेटिन में छपे भाषणों और लेखों में, गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम ‘बहुत ज्यादा अनिश्चितता और चुनौतियों’ के दौर से गुजर रहा है, जिसका असर आर्थिक गतिविधियों और फाइनेंशियल बाजारों, दोनों पर पड़ रहा है.

उभरते हुए जोखिम

गवर्नर ने कहा कि टैरिफ, व्यापार प्रतिबंधों और औद्योगिक नीतियों के कारण पैदा हुआ भू-आर्थिक बंटवारा वैश्विक सप्लाई चेन को नया रूप दे रहा है और वैश्विक पूंजी प्रवाह को प्रभावित कर रहा है. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में लगातार बढ़ता सार्वजनिक कर्ज, कुछ एसेट क्लास में बढ़ी हुई वैल्यूएशन और निजी क्रेडिट बाजारों का तेजी से विस्तार वित्तीय स्थिरता के लिए उभरते हुए जोखिम हैं.

मैक्रोइकोनॉमिक मोर्चों पर मजबूती

मल्होत्रा ​​ने आगे कहा कि पश्चिम एशिया में हाल ही में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के कारण, ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान और सप्लाई चेन में आई रुकावटों के बीच, ऊर्जा की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह संकट बना रहता है, तो इससे महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है. इस पृष्ठभूमि में, RBI ने कहा कि भारत पांच मुख्य मैक्रोइकोनॉमिक मोर्चों पर मजबूती दिखाता रहा है- आर्थिक विकास, महंगाई पर काबू, राजकोषीय मजबूती, बैंकिंग सेक्टर की स्थिरता और बाहरी खाता.

सेंट्रल बैंक ने बताया कि महामारी के बाद से भारत सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक रहा है, जिसने 2021-25 के दौरान औसतन 8.2 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की है. अनुमान है कि 2025-26 में अर्थव्यवस्था 7.6 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी, जबकि 2026-27 के लिए ग्रोथ का अनुमान 6.9 प्रतिशत है.

मजबूत खपत और सार्वजनिक निवेश से सहारा

RBI ने कहा कि घरेलू मांग को मजबूत खपत और सार्वजनिक निवेश से सहारा मिला, और सरकार के पूंजीगत खर्च को बढ़ावा देने से निजी निवेश को आकर्षित करने और उत्पादन क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिली।

महंगाई के मुद्दे पर सेंट्रल बैंक ने कहा कि हाल के समय में हेडलाइन रिटेल महंगाई 4 फीसदी के लक्ष्य से नीचे रही है. इसमें फ्लेक्सिबल महंगाई टारगेटिंग फ्रेमवर्क से मदद मिली है, जिसने महंगाई की उम्मीदों को स्थिर रखने और उतार-चढ़ाव को कम करने में सहायता की है. RBI ने FY27 के लिए औसत CPI महंगाई 4.6 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है.

बैलेंस शीट में सुधार पर जोर

बुलेटिन में बैंकिंग और NBFC की बैलेंस शीट में सुधार पर भी जोर दिया गया है, जिसमें कैपिटल एडिक्वेसी, एसेट क्वालिटी और मुनाफे में बढ़त देखी गई है. कॉरपोरेट बैलेंस शीट भी मजबूत हुई हैं, जबकि पिछले दो साल में कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट के जरिए फंड जुटाना भी काफी मजबूत रहा है.

विदेशी मुद्रा भंडार

बाहरी मोर्चे पर, RBI ने कहा कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार आरामदायक स्थिति में बना हुआ है, जिसमें लगभग 11 महीनों का आयात कवर है. वहीं, ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों के दबाव के बावजूद चालू खाता घाटा (CAD) टिकाऊ बना हुआ है. केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि मजबूत सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रवाह और हाल के व्यापार समझौतों से आगे चलकर बाहरी क्षेत्र को समर्थन मिलने की उम्मीद है.

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