RBI का सरकार को गिफ्ट, दिया रिकॉर्ड ₹2.87 लाख करोड़ का डिविडेंड, खजाने को मिलेगी राहत!

घोषणा से पहले अर्थशास्त्रियों का अनुमान था कि RBI सरकार को 2.7 लाख करोड रुपये से 3 लाख करोड रुपये के बीच सरप्लस ट्रांसफर कर सकता है. पिछले साल केंद्रीय बैंक ने सरकार को 2.69 लाख करोड रुपये ट्रांसफर किए थे, जो उससे पिछले साल की तुलना में 27 फीसदी ज्यादा था.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया Image Credit: rbi

RBI Dividend : Reserve Bank of India ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को FY27 के लिए 2.87 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड सरप्लस ट्रांसफर यानी डिविडेंड दिया है. हालांकि, यह रकम वित्त मंत्रालय के अनुमान से थोड़ी कम रही है. इस साल के केंद्रीय बजट में सरकार ने सरकारी कंपनियों और RBI से मिलने वाले डिविडेंड व सरप्लस ट्रांसफर से कुल 3.16 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान लगाया था. 31 मार्च 2026 तक RBI की बैलेंस शीट 20.61 फीसदी बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई. जिस तरह युद्ध के हालात मिडिल ईस्ट में बने हुए हैं. इससे सरकार का आयात महंगा हुआ है. ऐसे में ये डिविडेंड सरकार को राहत दे सकती है.

अनुमान के दायरे में रहा RBI का सरप्लस

घोषणा से पहले अर्थशास्त्रियों का अनुमान था कि RBI सरकार को 2.7 लाख करोड़ रुपये से 3 लाख करोड़ रुपये के बीच सरप्लस ट्रांसफर कर सकता है. पिछले साल केंद्रीय बैंक ने सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे, जो उससे पिछले साल की तुलना में 27 फीसदी ज्यादा था. हालांकि रॉयटर्स के सर्वे में शामिल अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह रकम सरकार को 4.3 फीसदी के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त नहीं होगी. इसके बावजूद यह बड़ी रकम सरकार के लिए अहम सहारा साबित हो सकती है, खासकर ऐसे समय में जब ईरान से जुड़ा युद्ध तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है.

तेल महंगा होने से बढ़ा दबाव

ऊंचे क्रूड ऑयल दाम भारत के आयात बिल को बढ़ा सकते हैं, जिससे करंट अकाउंट डेफिसिट और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव भी बढ़ सकता है. इसका असर घरेलू बाजारों में भी दिख रहा है. देश की 10 साल की बॉन्ड यील्ड इस साल अब तक करीब 50 बेसिस पॉइंट बढ़कर 7.10 फीसदी तक पहुंच चुकी है. वहीं, रुपया भी करीब 7 फीसदी कमजोर हुआ है. रुपये में गिरावट के बाद सरकार और नीति निर्माताओं ने बाहरी घाटे को कम करने के लिए कई खर्च नियंत्रण उपाय भी शुरू किए हैं.

RBI को कहां से हुई कमाई

RBI को अपनी कमाई घरेलू निवेश, विदेशी मुद्रा भंडार और करेंसी नोट छापने से मिलने वाली फीस से होती है. FY26 में केंद्रीय बैंक को विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप और निवेश से मजबूत आय हुई, जिससे रिकॉर्ड सरप्लस ट्रांसफर संभव हो पाया. दरअसल FY26 के दौरान अमेरिकी डॉलर करीब 10 फीसदी कमजोर हुआ, जबकि सोने की कीमतों में करीब 60 फीसदी की तेजी आई. इससे RBI की अकाउंटिंग प्रॉफिटेबिलिटी में बड़ा उछाल देखने को मिला. इसके अलावा, RBI की बैलेंस शीट भी तेजी से बढ़ी. अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए करीब 9 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदे, जिससे FY26 में उसकी बैलेंस शीट लगभग 20 फीसदी बढ़ गई.

CRB ने तय किया डिविडेंड का आकार

RBI का सरप्लस ट्रांसफर उसके Economic Capital Framework यानी ECF के तहत तय होता है. इसके मुताबिक Contingent Risk Buffer यानी CRB को RBI की कुल बैलेंस शीट के 4.5 फीसदी से 7.5 फीसदी के बीच रखना जरूरी है. FY26 में RBI ने CRB को 7.5 फीसदी के ऊपरी स्तर पर बनाए रखने का फैसला किया. अगर केंद्रीय बैंक इस बफर को कम करता, तो सरकार को और ज्यादा डिविडेंड मिल सकता था. फिलहाल यह रिकॉर्ड ट्रांसफर सरकार की गैर-कर आय को मजबूत करेगा, लेकिन साथ ही RBI को अपनी वित्तीय मजबूती भी बनाए रखनी होगी.