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दुनिया में तेल की किल्लत से रिलायंस को बड़ा फायदा, विदेशों में बढ़ाया ईंधन कारोबार

वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष के कारण ग्लोबल एनर्जी सप्लाई प्रभावित हुई है. इसका फायदा मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज को मिला है. कंपनी ने अफ्रीका, यूरोप और भूमध्यसागरीय बाजारों में पेट्रोल, डीजल और एविएशन फ्यूल का निर्यात बढ़ाया है. जानिए रिलायंस की नई रणनीति, 25 जहाजों की तैनाती और रिफाइनिंग कारोबार की कमाई में बढ़ोतरी की पूरी कहानी.

एनर्जी मार्केट

Highlights

  • वेस्ट एशिया संघर्ष के बीच रिलायंस का ईंधन निर्यात बढ़ा
  • अफ्रीका और यूरोप के बाजारों में कंपनी की पकड़ मजबूत
  • रिफाइनिंग कारोबार का EBITDA 68 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष और सप्लाई चेन में आई रुकावटों के बीच मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है. कंपनी ने अफ्रीका, यूरोप और भूमध्यसागरीय देशों में पेट्रोल, डीजल और एविएशन फ्यूल का निर्यात बढ़ाया है. इससे इन बाजारों में रिलायंस की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी बढ़ गई है. कंपनी ने उन देशों को ज्यादा ईंधन सप्लाई किया है, जहां युद्ध के कारण तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कमी हो रही है.

अफ्रीका और यूरोप में बढ़ाया कारोबार

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी एक्सपोर्ट रणनीति में बदलाव करते हुए पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका, भूमध्यसागरीय क्षेत्र और यूरोप के दूसरे बाजारों पर ध्यान दिया है. कंपनी ने ऑस्ट्रेलिया, केन्या और तंजानिया जैसे बाजारों में प्रीमियम पेट्रोल की सप्लाई के मौके भी तलाशे हैं.

इसके अलावा भूमध्यसागरीय देशों में डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की सप्लाई बढ़ाई गई है. कंपनी के सप्लाई एंड ट्रेडिंग कारोबार के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर श्रीनिवासन तुत्तागुंटा के मुताबिक, डीजल और जेट फ्यूल की सप्लाई में आई कमी से भूमध्यसागरीय बाजार में नए अवसर बने हैं.

रिफाइनिंग कारोबार की कमाई में 68% उछाल

रिलायंस के ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) कारोबार को इस रणनीति का बड़ा फायदा मिला है. वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में कंपनी के इस कारोबार का EBITDA 68 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 25,203 करोड़ रुपये पहुंच गया. वहीं, इसका रेवेन्यू 44 फीसदी बढ़कर 2,31,601 करोड़ रुपये रहा. वेस्ट एशिया में संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में सालाना आधार पर 41 फीसदी और ट्रांसपोर्ट फ्यूल की कीमतों में 50 से 78 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है.

25 जहाजों से सप्लाई चेन संभाल रही कंपनी

तेल की सप्लाई में आ रही दिक्कतों के बीच रिलायंस ने अपना क्रूड ऑयल खरीदने का तरीका भी बदला है. कंपनी ने अमेरिका, खाड़ी देशों और दूसरे क्षेत्रों से कच्चा तेल खरीदकर रिफाइनिंग जारी रखी. बढ़ते मालभाड़े और बीमा खर्च से निपटने के लिए कंपनी ने 20 से ज्यादा जहाज तैनात किए हैं. कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की ढुलाई में इस्तेमाल होने वाले जहाजों की कुल संख्या करीब 25 पहुंच गई है.

कंपनी ने घरेलू मांग को पूरा करने के लिए सामान्य एलपीजी उत्पादन भी करीब दोगुना किया है. भारत में दूसरी तिमाही के दौरान पेट्रोल की खपत 8.5 फीसदी और डीजल की मांग 7.5 फीसदी बढ़ी. रिलायंस के मुताबिक, आने वाले समय में भी रिफाइनरी में उत्पादन संबंधी रुकावटों और रूस से ईंधन निर्यात पर पाबंदियों के कारण ग्लोबल मार्केट में सप्लाई सीमित रह सकती है. ऐसे में कंपनी की रणनीति बेहतर बाजारों में ईंधन बेचकर ज्यादा मुनाफा कमाने पर रहेगी.

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