Zee फाउंडर सुभाष चंद्रा की मुश्किलें बढ़ीं, रिपेमेंट प्लान पर NCLT ने मांगा CBI का जवाब; जानें पूरा मामला

Zee के संस्थापक सुभाष चंद्रा की पेमेंट योजना पर NCLT ने फिलहाल रोक लगा दी है. ट्रिब्यूनल ने CBI से चार हफ्ते में जवाब मांगा है क्योंकि CBI की जांच का असर इस मामले पर पड़ सकता है. मामला Chandra की व्यक्तिगत गारंटी, कर्जदाताओं को पेमेंट और विरोध करने वाले कर्जदाताओं पर योजना लागू होने से जुड़ा है.

सुभाष चंद्रा की पेमेंट योजना पर NCLT ने फिलहाल रोक लगा दी है.

Highlights

  • NCLT ने CBI से चार हफ्ते में जवाब मांगा है.
  • सुभाष चंद्रा की 6.5 करोड़ रुपये की रिपेमेंट प्लान पर सुनवाई जारी है.
  • भुगतान योजना को 80.81 फीसदी कर्जदाताओं का समर्थन मिला था.

Zee के संस्थापक सुभाष चंद्रा की कर्ज चुकाने की योजना पर एक बार फिर पेच फंस गया है. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी NCLT ने इस मामले में CBI से चार हफ्ते में जवाब मांगा है. ट्रिब्यूनल ने अगली सुनवाई तक सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने को कहा है. NCLT ने कहा कि CBI की जांच का असर इस मामले की कार्यवाही पर पड़ सकता है. चंद्रा की तरफ से CBI को इस मामले में पक्ष बनाने का विरोध किया गया है. अब इस मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी.

NCLT ने CBI से चार हफ्ते में जवाब मांगा

NCLT की पांच सदस्यीय विशेष पीठ ने बुधवार को CBI से इस मामले में जवाब मांगा है. ट्रिब्यूनल का कहना है कि CBI की जांच का इस मामले से संबंध हो सकता है. इसी वजह से एजेंसी का पक्ष जानना जरूरी माना गया है. सुनवाई के दौरान सुभाष चंद्रा की तरफ से CBI को मामले में पक्ष बनाने का विरोध किया गया. NCLT ने सभी पक्षों को अगली सुनवाई से पहले अपना जवाब दाखिल करने को कहा है.

किस मामले में फंसी है सुभाष चंद्रा की योजना

यह मामला सुभाष चंद्रा की पर्सनल गारंटी से जुड़ा हुआ है. उन्होंने Essel Group और Zee Group से जुड़ी कंपनियों द्वारा लिए गए कुछ कर्ज के लिए पर्सनल गारंटी दी थी. सरकारी अधिकारियों के अनुसार करीब 2574 करोड़ रुपये के दावे उन कर्ज से जुड़े हैं जिन पर चंद्रा की पर्सनल गारंटी थी. चंद्रा का कहना है कि उन्होंने पर्सनल तौर पर यह पैसा उधार नहीं लिया था. उन्होंने अपनी 31.79 करोड़ रुपये की नेटवर्थ के आधार पर पेमेंट योजना पेश की थी.

6.5 करोड़ रुपये की थी पेमेंट योजना

सुभाष चंद्रा की पेमेंट योजना में कुल 6.5 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव था. इसमें 6.25 करोड़ रुपये कर्जदाताओं को और 25 लाख रुपये दिवालिया प्रक्रिया की लागत के लिए रखे गए थे. इस योजना को कर्जदाताओं के मूल्य के आधार पर 80.81 फीसदी समर्थन मिला था. NCLT के सदस्य Nilesh Sharma ने योजना को मंजूरी देते हुए कहा था कि यह उन कर्जदाताओं पर भी लागू होगी जिन्होंने इसका विरोध किया था. कई बड़े कर्जदाता इस योजना के खिलाफ थे.

किन क्रेडिटर ने योजना का विरोध किया

पेमेंट योजना का विरोध करने वाले क्रेडिटर में LIC Housing Finance, IDBI Trusteeship Services, HDFC Bank और Axis Bank शामिल थे. इसके अलावा Canara Bank, Union Bank of India UK और RBL Bank ने भी योजना के खिलाफ वोट किया था. विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि क्या बहुमत से मंजूर पेमेंट योजना उन कर्जदाताओं पर भी लागू हो सकती है जिन्होंने इसके खिलाफ वोट दिया था. इसी सवाल पर NCLT में लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है.

NCLT में कैसे शुरू हुआ मतभेद

इस मामले में NCLT की पीठों के बीच भी मतभेद सामने आया था. फरवरी में दो सदस्यीय पीठ ने अलग- अलग राय दी थी कि क्या पेमेंट योजना का विरोध करने वाले कर्जदाताओं पर भी यह योजना लागू होगी. इसके बाद Nilesh Sharma को तीसरे सदस्य के तौर पर शामिल किया गया. उन्होंने योजना को मंजूरी देते हुए इसे विरोध करने वाले कर्जदाताओं पर भी लागू माना. हालांकि एक सितंबर को पांच सदस्यीय विशेष पीठ ने कहा कि 25 अगस्त का आदेश NCLT की बहुमत राय नहीं था.

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CBI जांच और रोक का क्या असर

इस मामले में CBI ने LIC Housing fraud मामले में सुभाष चंद्रा के खिलाफ FIR दर्ज की है. LIC Housing Finance इस मामले में कर्जदाताओं में शामिल है. इसी वजह से NCLT ने CBI से जवाब मांगा है. पांच सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान सुभाष चंद्रा को अपनी किसी भी संपत्ति को बेचने या ट्रांसफर करने से भी रोका है. इस बीच Chandra ने NCLAT का रुख किया है और पांच सदस्यीय NCLT पीठ के गठन तथा पेमेंट योजना पर लगी रोक को चुनौती दी है.