Tax Bill 2026 से खुलेगा निवेश का नया रास्ता! मैन्युफैक्चरिंग से फॉरेन इन्वेस्टमेंट तक कई सेक्टरों को मिलेगी बड़ी राहत

केंद्र सरकार Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 के जरिए मैन्युफैक्चरिंग, विदेशी निवेश और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की तैयारी में है. प्रस्तावित बिल में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए टैक्स प्रोत्साहन की अवधि बढ़ाने, REITs, InvITs, डेटा सेंटर, सरकारी बॉन्ड और विदेशी निवेशकों को टैक्स राहत देने जैसे कई अहम प्रावधान शामिल हैं.

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Highlights

  • Tax Bill 2026 के जरिए सरकार मैन्युफैक्चरिंग, फॉरेन इन्वेस्टमेंट और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की तैयारी में है.
  • इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, REITs, InvITs, डेटा सेंटर और गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में निवेश पर कई टैक्स राहत देने का प्रस्ताव.
  • विदेशी निवेशकों के लिए नियम आसान होंगे, जिससे भारत में निवेश और मैन्युफैक्चरिंग को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है.

Tax Bill 2026: केंद्र सरकार देश में मैन्युफैक्चरिंग, विदेशी निवेश और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए टैक्स व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है. सरकार जल्द ही Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 संसद में पेश कर सकती है. प्रस्तावित विधेयक में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए टैक्स प्रोत्साहन की अवधि बढ़ाने, विदेशी निवेश फंड से जुड़े नियम आसान बनाने, REITs, InvITs, डेटा सेंटर और सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को कर राहत देने जैसे कई अहम प्रावधान शामिल हैं.

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को 2040-41 तक मिल सकती है राहत

ET की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित विधेयक के तहत स्पेसिफाइड इलेक्ट्रॉनिक गुड्स के कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग पर मिलने वाली टैक्स छूट को FY2040-41 तक बढ़ाया जा सकता है. इसमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर, वियरेबल डिवाइस और उनसे जुड़े कंपोनेंट्स को शामिल किए जाने की संभावना है.

इसके अलावा, कस्टम्स बॉन्डेड वेयरहाउस में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स रखने वाली विदेशी कंपनियों को भी FY2040-41 तक टैक्स राहत मिलने का प्रस्ताव है. इससे भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूती मिलने और देश को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.

विदेशी निवेशकों के लिए आसान होंगे नियम

विधेयक में विदेशी निवेश फंड से जुड़े कई नियमों में ढील देने का भी प्रस्ताव है. इनमें निवेशकों की न्यूनतम संख्या, न्यूनतम कोष (Minimum Corpus), निवेश के विविधीकरण और संबद्ध संस्थाओं में निवेश से जुड़े कई प्रावधान शामिल हैं. माना जा रहा है कि इससे वैश्विक फंड मैनेजरों के लिए भारत में निवेश करना आसान होगा.

सरकारी बॉन्ड में निवेश होगा अधिक आकर्षक

सरकार विदेशी संस्थागत निवेशकों और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के पास मौजूद गवर्नमेंट सिक्योरिटीज से मिलने वाली ब्याज आय और पूंजीगत लाभ (Capital Gains) को टैक्स छूट देने का प्रस्ताव भी लाई है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय सरकारी बॉन्ड विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनेंगे और देश में दीर्घकालिक विदेशी पूंजी का फ्लो बढ़ सकता है.

REITs, InvITs और डेटा सेंटर को भी राहत

प्रस्तावित बिल में REITs और InvITs को मिलने वाले डिविडेंड पर टैक्स छूट फिर से बहाल करने का प्रस्ताव है. इसके अलावा, भारत के तेजी से बढ़ते डेटा सेंटर सेक्टर को भी राहत देने की तैयारी है. विधेयक के अनुसार, भारत में लीज पर संचालित डेटा सेंटर सेवाएं लेने वाली विदेशी कंपनियों के लिए टैक्स नियम आसान किए जाएंगे. साथ ही, स्पेसिफाइड डेटा सेंटर की परिभाषा का दायरा भी बढ़ाया जाएगा, ताकि भारतीय कंपनियों के स्वामित्व या लीज पर संचालित डेटा सेंटर भी इसमें शामिल हो सकें.

हीरा कारोबार और SPV के लिए भी नए प्रावधान

विधेयक में अधिसूचित विशेष क्षेत्रों के माध्यम से रफ डायमंड की बिक्री करने वाली विदेशी कंपनियों को दीर्घकालिक टैक्स छूट देने का प्रस्ताव है. इसका लाभ डायमंड माइनिंग कंपनियों, साइटहोल्डर्स, ब्रोकर्स, एग्रीगेटर्स और ऑक्शन कंपनियों को मिल सकता है. वहीं, नई कॉरपोरेट टैक्स व्यवस्था चुनने वाले SPV के लिए सरचार्ज बढ़ाकर 25 फीसदी करने का प्रस्ताव है, जबकि अन्य घरेलू कंपनियों के लिए यह 10 फीसदी रहेगा.

निवेश बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित संशोधन केवल मौजूदा वैश्विक आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए नहीं, बल्कि भारत में कारोबार और निवेश के लिए अधिक भरोसेमंद और स्थिर टैक्स ढांचा तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है. यदि यह विधेयक संसद से पारित हो जाता है, तो इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, विदेशी निवेश, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, REITs, InvITs और सरकारी बॉन्ड जैसे कई रणनीतिक क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिल सकता है. इससे भारत को वैश्विक निवेश और मैन्युफैक्चरिंग केंद्र बनाने की सरकार की रणनीति को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.

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