सितंबर में IPO बाजार ने तोड़ा 30 साल का रिकॉर्ड, कंपनियों ने जुटाए ₹38785 करोड़; SME ने भी दिखाया दम

बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद, पिछले साल अक्टूबर के बाद कंपनियों ने आईपीओ के जरिए सबसे ज्यादा फंड जुटाया है. कई नए इश्यू की जबरदस्त मांग ने भी कंपनियों को प्राइमरी मार्केट में आने के लिए प्रोत्साहित किया है.

आईपीओ बाजार में धूम. Image Credit: Money9live

Highlights

  • मेनबोर्ड IPO के जरिए लगभग 38,785 करोड़ रुपये जुटाए गए.
  • छोटे और मध्यम उद्यम (SME) सेगमेंट में भी गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं.
  • NSE के 22,561 करोड़ रुपये के IPO का सबसे बड़ा योगदान.

सितंबर का महीना मेनबोर्ड इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए लगभग तीन दशकों में सबसे व्यस्त महीना रहा है. अब तक 30 IPO आ चुके हैं, जो दिसंबर 1996 (जब एक महीने में 33 IPO आए थे) के बाद सबसे अधिक मंथली संख्या है. इस महीने फंड जुटाने में भी जबरदस्त तेजी देखी गई है.

ईटी के अनुसार, मेनबोर्ड IPO के जरिए लगभग 38,785 करोड़ रुपये जुटाए गए, जो पिछले साल अक्टूबर (जब 10 IPO से 45,188 करोड़ रुपये जुटाए गए थे) के बाद सबसे अधिक मंथली फंड है.

NSE की बड़ी हिस्सेदारी

सितंबर में अब तक आए IPO में फंड के आधार पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के 22,561 करोड़ रुपये के IPO का सबसे बड़ा योगदान है, जो इस साल का अब तक का सबसे बड़ा IPO है. छोटे और मध्यम उद्यम (SME) सेगमेंट में भी गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं.

सितंबर में 37 IPO आए, जो पिछले साल इसी महीने के बाद सबसे अधिक है. इन IPO से लगभग 1,486 करोड़ रुपये जुटाए गए, जिससे छोटी कंपनियों को इक्विटी बाजार तक पहुंच मिली.

औसत साइज 400 करोड़ रुपये

प्राइमरी मार्केट में तेजी तब आई है जब सेकेंडरी मार्केट में उतार-चढ़ाव बना हुआ है. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, ग्लोबल मॉनेटरी हालात का सख्त होना और जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं.

इस महीने ओपन हुए 30 मेनबोर्ड IPO में से सिर्फ छह का इश्यू साइज 1,000 करोड़ रुपये से अधिक था, जबकि बाकी छोटे इश्यू थे, जिनका औसत साइज लगभग 400 करोड़ रुपये था.

बाजार में उतार चढ़ाव के बीच IPO की धूम

जानकारों का कहना है कि घरेलू स्तर पर पैसे की अच्छी उपलब्धता (लिक्विडिटी) IPO एक्टिविटी को सहारा देने वाला एक अहम कारण रही है, और SIP के जरिए इक्विटी में लगातार पैसा आ रहा है. कई नए इश्यू की जबरदस्त मांग ने भी कंपनियों को प्राइमरी मार्केट में आने के लिए प्रोत्साहित किया है, भले ही बड़े बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है.

इस साल मेनबोर्ड IPO के जरिए जुटाए गए पैसे में से आधे से अधिक हिस्सा ‘ऑफर-फॉर-सेल’ (OFS) ट्रांजैक्शन से आया है. इस साल अब तक मेनबोर्ड IPO के जरिए जुटाए गए कुल 1.12 लाख करोड़ रुपये में से 66,630 करोड़ रुपये OFS रूट से आए हैं.

SME सेगमेंट में भी तेजी

स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज (SME) सेगमेंट में भी इश्यू की संख्या में तेजी देखी गई है. हालांकि, जानकारों का कहना है कि यह रफ्तार कितनी बनी रहेगी, यह बाजार में आने वाली कंपनियों की क्वालिटी पर निर्भर करेगा.

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