अमेरिका का बड़ा फैसला! रिलायंस को वेनेजुएला से सीधे तेल खरीदने की मिली मंजूरी: रिपोर्ट

अमेरिका ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को जनरल लाइसेंस जारी कर वेनेजुएला से सीधे कच्चा तेल खरीदने की अनुमति दे दी है. इससे कंपनी को सस्ता हेवी क्रूड मिल सकेगा और वेनेजुएला के तेल निर्यात को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. यह कदम भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग और वैश्विक तेल बाजार के समीकरणों पर असर डाल सकता है.

वेनेजुएला और रिलायंस इंडस्ट्रीज Image Credit: @Money9live

US Reliance and Venezuelan Oil: अमेरिका ने भारत की दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) को एक “जनरल लाइसेंस” जारी किया है, जिसके तहत अब कंपनी सीधे वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीद सकेगी और उस पर अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा. रायटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में इस मामले से जुड़े दो सूत्रों के हवाले से लिखा है कि यह लाइसेंस खास तौर पर वेनेजुएला से तेल की खरीद, निर्यात और बिक्री की अनुमति देता है, बशर्ते वह तेल पहले से निकाला जा चुका हो. इसके अलावा ऐसे तेल को रिफाइन करने की भी मंजूरी दी गई है.

अमेरिका की भूमिका

इस महीने की शुरुआत में अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया था. इसके बाद अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया कि वे वेनेजुएला के एनर्जी सेक्टर पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में ढील देंगे. इसका मकसद करीब 2 अरब डॉलर के तेल डिमांड समझौते को आसान बनाना और वेनेजुएला के तेल इंडस्ट्री के पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित 100 अरब डॉलर के बड़े प्लानिंग को आगे बढ़ाना है. माना जा रहा है कि यह कदम दोनों देशों के बीच नए ऊर्जा सहयोग का रास्ता खोल सकता है.

बढ़ेगा वेनेजुएला का तेल निर्यात!

रिलायंस को लाइसेंस मिलने से वेनेजुएला के तेल निर्यात में तेजी आ सकती है. साथ ही, दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स का संचालन करने वाली रिलायंस को सस्ता कच्चा तेल मिल सकेगा. कंपनी ने इस लाइसेंस के लिए जनवरी की शुरुआत में आवेदन किया था. हालांकि, इस पर कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. वहीं, दूसरी ओर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के तहत आने वाला ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) की ओर से भी अभी तक इस मसले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

रूसी तेल का विकल्प बन सकता है वेनेजुएला?

हाल ही में रिलायंस ने ट्रेडिंग कंपनी विटोल से 20 लाख बैरल वेनेजुएलाई तेल खरीदा था. विटोल और ट्रैफिगुरा जैसी कंपनियों को भी अमेरिका की ओर से वेनेजुएला का तेल बेचने और बाजार में उतारने के लिए विशेष अनुमति दी गई थी. अब सीधे खरीद की मंजूरी मिलने से रिलायंस बिचौलियों पर निर्भर हुए बिना वेनेजुएला से तेल ले सकेगी. रिपोर्ट के मुताबिक, वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल (हेवी क्रूड) आमतौर पर छूट पर मिलता है, जिससे इसकी कीमत प्रतिस्पर्धी रहती है.

ऐसे में यह तेल रिलायंस के लिए रूसी तेल का एक सस्ता और व्यावहारिक विकल्प बन सकता है. हाल के महीनों में भारतीय रिफाइनरियां, जिनमें रिलायंस भी शामिल है, अप्रैल डिलीवरी के लिए रूसी तेल खरीदने से बच रही हैं. ऐसा माना जा रहा है कि आगे भी यह रुख जारी रह सकता है. इससे भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते को मजबूती मिल सकती है.

अमेरिका और 25 फीसदी टैरिफ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत पर लगाए गए 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क को हटा दिया था. उन्होंने यह भी कहा था कि भारत अमेरिका से अधिक तेल खरीदेगा और संभव है कि वेनेजुएला से भी आयात बढ़ाए. इस बदलते परिदृश्य में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को विविध स्रोतों से पूरा करने की रणनीति अपना रहा है.

पहले भी खरीदार था रिलायंस

रिलायंस पहले भी अपने एडवांस्ड रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स के लिए वेनेजुएला से नियमित रूप से तेल खरीदती थी, लेकिन 2025 की शुरुआत में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उसे यह खरीद बंद करनी पड़ी थी. कंपनी दो रिफाइनरियों का संचालन करती है, जिनकी कुल कैपेसिटी लगभग 14 लाख बैरल प्रतिदिन है. अब नए लाइसेंस के साथ कंपनी को फिर से वेनेजुएला के सस्ते और भारी कच्चे तेल तक सीधी पहुंच मिल जाएगी, जिससे उसकी लागत घटेगी और मुनाफे की संभावनाएं बढ़ेंगी.

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