अगले 18 महीनों में खत्म हो सकती है व्हाइट कॉलर जॉब! AI दिग्गज मुस्तफा सुलेमान ने बता दी इनसाइड स्टोरी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दफ्तरों के कामकाज को तेजी से बदलने वाली है. Microsoft के AI चीफ मुस्तफा सुलेमान के मुताबिक, अगले 12 से 18 महीनों में AI कई रूटीन व्हाइट-कॉलर कंप्यूटर टास्क अपने आप करने लगेगा. इस अनुमान ने वकील, अकाउंटेंट और मार्केटिंग जैसे प्रोफेशन में काम करने वालों के बीच नई बहस छेड़ दी है.

AI impact on jobs Image Credit: Money9 Live

रात दो बजे तक एक्सेल शीट्स पर काम करना या किसी प्रोजेक्ट प्रपोजल का पंद्रहवां ड्राफ्ट तैयार करना, अगर आप इन कामों में हैं तो आपके जॉप पर खतरा मंडरा रहा है. Microsoft के AI चीफ मुस्तफा सुलेमान का कहना है कि अगले 12 से 18 महीनों में AI ज्यादातर रूटीन व्हाइट-कॉलर कंप्यूटर टास्क खुद संभाल लेगा और लोगों की फायरिंग बड़े स्तर पर हो सकती है.

मुस्तफा सुलेमान DeepMind के सह-संस्थापक रह चुके हैं, जिसे बाद में Google ने खरीदा. इसके बाद उन्होंने Inflection AI की शुरुआत की और मार्च 2024 में Microsoft के कंज्यूमर AI डिवीजन के CEO बने. AI की दुनिया में उनकी बात इसलिए अहम मानी जाती है क्योंकि वे तकनीक को लैब से निकालकर असली यूजर्स तक पहुंचाने में अग्रणी रहे हैं.

किन नौकरियों पर पड़ेगा सबसे पहले असर?

Financial Times से बातचीत में सुलेमान ने कहा कि वकील, अकाउंटेंट, प्रोजेक्ट मैनेजर और मार्केटिंग प्रोफेशनल्स जैसे पेशों में रूटीन काम सबसे पहले ऑटोमेट होंगे. उनका अनुमान Anthropic के CEO डारियो अमोडेई से काफी अलग है, जिन्होंने एंट्री-लेवल जॉब्स पर असर के लिए करीब पांच साल का समय बताया था.

सुलेमान का विजन सिर्फ जॉब ऑटोमेशन तक सीमित नहीं है. उनका मानना है कि अगले 2 से 3 वर्षों में AI एजेंट्स पूरे संगठन के वर्कफ्लो को मैनेज करने लगेंगे, प्रोजेक्ट प्लानिंग से लेकर रिपोर्टिंग और क्लाइंट कम्युनिकेशन तक.

इतना ही नहीं, वे यह भी कहते हैं कि जल्द ही कस्टम AI मॉडल बनाना पॉडकास्ट रिकॉर्ड करने या ब्लॉग लिखने जितना आसान हो जाएगा. यानी हर कंपनी, हर संस्थान और यहां तक कि हर व्यक्ति अपनी जरूरत के मुताबिक AI असिस्टेंट बना सकेगा.

क्यों है ये दावा

मुस्तफा सुलेमान की भविष्यवाणी यूं ही नहीं आई है. इसके पीछे Microsoft की एक सोची-समझी रणनीति काम कर रही है. कंपनी अब उस दिशा में बढ़ रही है, जिसे सुलेमान “professional-grade AGI” कहते हैं, यानी ऐसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जो इंसानों द्वारा किए जाने वाले लगभग सभी कंप्यूटर-आधारित प्रोफेशनल काम संभाल सके.

यह सिर्फ बेहतर चैटबॉट बनाने की बात नहीं है. Microsoft का मकसद है कि एंटरप्राइज ग्राहकों को जल्दी से जल्दी अपने AI इकोसिस्टम से जोड़ लिया जाए, इससे पहले कि कोई दूसरी टेक कंपनी उन्हें लॉक-इन कर ले.

OpenAI से दूरी, खुद की AI पर जोर

इस रणनीति का एक अहम पहलू यह भी है कि Microsoft अब OpenAI पर निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. कंपनी अपने इन-हाउस AI मॉडल्स के विकास पर तेजी से काम कर रही है, ताकि वह भविष्य में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो सके.

इसका सीधा संकेत है कि आने वाले समय में Microsoft सिर्फ AI टूल्स बेचने वाली कंपनी नहीं, बल्कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर और सॉल्यूशन प्रोवाइडर के रूप में खुद को स्थापित करना चाहता है.