वैल्यू क्रिएशन ही तय करेगा स्टार्टअप्स का भविष्य, कैपिटल का बहुत सोच-समझकर करना होगा इस्तेमाल; WITT इवेंट में बोले बिजनेस लीडर
TV9 नेटवर्क के ‘What India Thinks Today’ मंच पर ‘Values vs Valuation’ सत्र में विशेषज्ञों ने कहा कि स्टार्टअप्स को केवल वैल्यूएशन नहीं, बल्कि असली वैल्यू क्रिएशन और सस्टेनेबल ग्रोथ पर ध्यान देना चाहिए. AI को अपनाना जरूरी है, जबकि निवेशक भी अब मजबूत बिजनेस मॉडल और लॉन्ग-टर्म क्षमता को प्राथमिकता दे रहे हैं. निष्कर्ष यही रहा कि वैल्यू ही वैल्यूएशन तय करती है.
टीवी9 नेटवर्क के प्रतिष्ठित इवेंट ‘What India Thinks Today’ के तहत आयोजित ‘Values vs Valuation’ सेशन में स्टार्टअप इकोसिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और निवेश के बदलते पैमानों पर गहन चर्चा हुई. इस पैनल में TiE दिल्ली एनसीआर की एक्सक्यूटिव डायरेक्टर उपासना शर्मा, स्काई एयर मोबिलिटी के फाउंडर & सीईओ अंकित कुमार, फण्डामेंटम इन्वेस्टमेंट एडवाइजर के को-फाउंडर आशीष कुमार और Gabit की फाउंडर अर्पणा शाही शामिल रहीं. चर्चा का मुख्य फोकस यह रहा कि स्टार्टअप्स को वैल्यूएशन के पीछे भागना चाहिए या वैल्यू क्रिएशन को प्राथमिकता देनी चाहिए.
कैपिटल का बहुत सोच-समझकर इस्तेमाल करना होगा
अंकित कुमार के मुताबिक, आज के दौर में स्टार्टअप्स को कैपिटल का बहुत सोच-समझकर इस्तेमाल करना होगा क्योंकि फंडिंग अब पहले जितनी आसान नहीं रही. उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और इसका सीधा असर लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर पड़ रहा है. यह बदलाव स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर लेकर आया है, खासकर लोकल सॉल्यूशंस और नई तकनीकों के विकास में. उन्होंने सस्टेनेबिलिटी को समझाते हुए कहा कि इसका पहला पहलू है बिजनेस का खुद टिकाऊ होना और दूसरा है कैपिटल का सही और प्रभावी उपयोग.
उन्होंने कहा कि आज पूंजी पहले से कहीं ज्यादा महंगी हो चुकी है, इसलिए स्टार्टअप्स को हर पैसे का सोच-समझकर इस्तेमाल करना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि भारत में अब डीप टेक और स्पेस टेक जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ रहा है और सरकार भी इन क्षेत्रों को प्रोत्साहित कर रही है. उनकी कंपनी Skye Air Mobility ड्रोन डिलीवरी के जरिए न सिर्फ लागत घटा रही है बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी ला रही है, जो वैल्यू क्रिएशन का एक मजबूत उदाहरण है.
वैल्यू और वैल्यूएशन एक-दूसरे के पूरक
उपासना शर्मा ने कहा कि आज का समय अनिश्चितताओं से भरा हुआ है. यह सिर्फ युद्ध या जियोपॉलिटिकल तनाव का मामला नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया एक फ्लक्स यानी बदलाव के दौर में है. उन्होंने कहा कि बिजनेस बनाने वालों के लिए यह अनिश्चितता अब स्थायी वास्तविकता बन चुकी है. इसके साथ ही AI ने टेक्नोलॉजी की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है. पिछले 25-30 वर्षों से जिस तकनीकी ढांचे पर काम हो रहा था, उसमें अब बुनियादी बदलाव आ रहा है.
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद स्टार्टअप्स और उद्यमी आशावादी बने हुए हैं, क्योंकि यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वैल्यू किसी कंपनी के भीतर की कल्चर, काम करने के तरीके और सोच से बनती है, जबकि वैल्यूएशन उसी वैल्यू का परिणाम होता है. वैल्यू और वैल्यूएशन को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता, बल्कि दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं.
वैल्यूएशन को नकारात्मक नजरिए से नहीं देखना चाहिए
आशीष कुमार ने निवेशकों के दृष्टिकोण को विस्तार से समझाया. उन्होंने कहा कि किसी भी निवेश का मूल उद्देश्य रिटर्न हासिल करना होता है, लेकिन यह तभी संभव है जब कंपनी में वास्तविक वैल्यू हो. उन्होंने कहा कि वैल्यूएशन को नकारात्मक नजरिए से नहीं देखना चाहिए, क्योंकि यह कंपनी के वर्तमान प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाओं का मिश्रण होता है. उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में कंपनियों को ज्यादा पूंजी इसलिए दी जाती है ताकि वे अपनी क्षमताओं का निर्माण कर सकें. निवेशक यह समझते हैं कि शुरुआत में ग्रोथ से ज्यादा जरूरी है मजबूत नींव बनाना. जब कंपनी सही तरीके से अपनी क्षमता विकसित कर लेती है, तब ग्रोथ अपने आप तेजी से आती है.
AI निवेश के ट्रेंड पर उन्होंने बताया कि आज 30-40 प्रतिशत वेंचर कैपिटल AI स्टार्टअप्स में जा रहा है, क्योंकि AI को नई इंफ्रास्ट्रक्चर टेक्नोलॉजी के रूप में देखा जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि आज निवेशक पहले से ज्यादा समझदारी से निवेश कर रहे हैं और लंबी अवधि के परिणामों पर ध्यान दे रहे हैं.
असली वैल्यू ग्राहक को केंद्र में रखकर ही बनाई जा सकती है
अर्पणा शाही ने D2C और हेल्थ टेक सेक्टर का उदाहरण देते हुए बताया कि असली वैल्यू ग्राहक को केंद्र में रखकर ही बनाई जा सकती है. उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी Gabit पूरी तरह कस्टमर-सेंट्रिक अप्रोच पर काम करती है. उन्होंने बताया कि कंपनी ने दो साल तक रिसर्च कर ऐसा प्रोडक्ट तैयार किया, जो भारतीय ग्राहकों के लिए किफायती और उपयोगी हो. उन्होंने कहा कि Gabit ने सब्सक्रिप्शन मॉडल से दूरी बनाई है और एक बार भुगतान के बाद ग्राहकों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. उनका मानना है कि भरोसा और पारदर्शिता ही लॉन्ग-टर्म वैल्यू बनाने का सबसे बड़ा आधार है.
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में हेल्थ वियरेबल्स का बाजार अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन इसमें जबरदस्त संभावनाएं हैं. Gabit अपने प्लेटफॉर्म पर 150 से ज्यादा बायोमार्कर्स को AI के जरिए जोड़कर यूजर्स को पर्सनलाइज्ड हेल्थ इनसाइट्स देता है. उन्होंने AI को लेकर कहा कि इसका इस्तेमाल केवल ट्रेंड के तौर पर नहीं, बल्कि ग्राहकों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने के लिए होना चाहिए.
