दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी कर्मचारियों को हफ्ते में 2 दिन मिलेगा WFH; प्राइवेट सेक्टर के लिए कही ये बात

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरकारी कर्मचारियों को सप्ताह में 2 दिन वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देने की घोषणा की है. साथ ही प्राइवेट सेक्टर को भी हाइब्रिड वर्क मॉडल अपनाने की सलाह दी जाएगी. लेबर डिपार्टमेंट इस व्यवस्था की निगरानी करेगा.

दिल्ली के मुख्यमंत्री बनेंगी रेखा गुप्ता. Image Credit: @tv9

Delhi WFH: मध्य पूर्व में जारी अमेरिका-ईरान युद्ध के बढ़ते असर के बीच दिल्ली सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि अब राजधानी में सरकारी कर्मचारियों को सप्ताह में 2 दिन वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी जाएगी. इसके साथ ही सरकारी अधिकारियों के विदेशी दौरों पर भी रोक लगाने का फैसला लिया गया है. दिल्ली सरकार का यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के बाद सामने आया है, जिसमें पेट्रोलियम खपत कम करने और ईंधन बचाने पर जोर दिया गया था. सरकार ने ऑनलाइन मीटिंग्स को प्राथमिकता देने, सरकारी वाहनों के सीमित इस्तेमाल और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे कई निर्देश भी जारी किए हैं. इसके साथ ही दिल्ली सरकार ने निजी कंपनियों को भी वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू करने की सलाह देने का फैसला किया है.

ईंधन संकट और वैश्विक तनाव बना वजह

दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है. 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए होने वाले तेल सप्लाई पर असर पड़ा है. यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऑयल ट्रांजिट रूट्स में शामिल माना जाता है.

इस तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल आपूर्ति और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ी है. ऐसे में भारत समेत कई देशों ने ईंधन खपत कम करने और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर जोर देना शुरू कर दिया है.

सरकारी विभागों को जारी हुए निर्देश

दिल्ली सरकार के कई विभागों ने भी इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं. पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट, दिल्ली जल बोर्ड और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग को वर्चुअल मीटिंग्स को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं.

इसके अलावा इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने और हर सप्ताह “नो कार डे” मनाने की भी योजना बनाई गई है. सरकार चाहती है कि मंत्री, विधायक और अधिकारी निजी या सरकारी वाहनों के बजाय अधिक से अधिक मेट्रो, बस और कारपूलिंग का इस्तेमाल करें.

ट्रैफिक और प्रदूषण कम करने पर भी फोकस

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लोगों से भी सार्वजनिक परिवहन अपनाने की अपील की है. उनका कहना है कि यदि अधिक लोग निजी वाहनों के बजाय मेट्रो और बसों का उपयोग करेंगे तो इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि ट्रैफिक जाम और प्रदूषण भी कम होगा.

सरकार का मानना है कि वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन मीटिंग्स जैसे कदम आने वाले समय में ईंधन बचाने के साथ-साथ प्रशासनिक खर्च कम करने में भी मददगार साबित हो सकते हैं. दिल्ली सरकार के इस फैसले को राजधानी में एक बड़े नीतिगत बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है.

यह भी पढ़ें: केविन वॉर्श के नाम से थर्राया सोना, आहट से ही गिरते हैं दाम, जानें क्यों बन गए बुलियन विलेन