केविन वॉर्श के नाम से थर्राया सोना, आहट से ही गिरते हैं दाम, जानें क्यों बन गए बुलियन विलेन

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले चेयरमैन के तौर पर केविन वॉर्श का नाम सामने आते ही ग्लोबल गोल्ड मार्केट में हलचल मच गई है। निवेशकों को डर है कि वॉर्श की सख्त ब्याज दर नीति और मजबूत डॉलर एजेंडा सोने-चांदी की कीमतों पर भारी दबाव डाल सकता है।

केविन वॉर्श गोल्ड कनेक्शन Image Credit: FreePik

ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में इस वक्त सिर्फ एक ही नाम की गूंज है- केविन वॉर्श. अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले चेयरमैन के रूप में वॉर्श का नाम सामने आते ही बुलियन मार्केट में हड़कंप मच गया है. निवेशकों के बीच उन्हें सोने की कीमतों के लिए एक ‘खलनायक’ के तौर पर देखा जा रहा है. जैसे ही उनके चुने जाने की खबर पक्की हुई, सोने की कीमतों में एक बार फिर गिरावट का दौर शुरू हो गया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें गिरकर $4,694.48 प्रति औंस के स्तर पर आ गई हैं.

जब जनवरी में ही मिल गई थी ‘चेतावनी’

यह पहली बार नहीं है जब वॉर्श के नाम ने बुलियन बाजार को डराया हो. जनवरी 2026 में जब पहली बार उनके नामांकन की चर्चा शुरू हुई थी, तब भी ग्लोबल मार्केट ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी. उस दौरान चर्चा मात्र से ही सोना 4% से ज्यादा टूट गया था. लेकिन असली धमाका 30 जनवरी 2026 को हुआ, जब उनके नामांकन का आधिकारिक ऐलान हुआ. उस एक दिन में चांदी 37% और सोना 9% तक गिर गया था, जो कीमती धातुओं के इतिहास के सबसे अस्थिर कारोबारी सत्रों में से एक था.

आखिर क्यों वॉर्श से डरता है गोल्ड मार्केट?

केविन वॉर्श को ‘साउंड मनी’ का कड़ा समर्थक माना जाता है. उनका मानना है कि फेडरल रिजर्व ने अपनी सीमाओं को लांघा है और वह बाजार का रक्षक बनने की कोशिश कर रहा है. वॉर्श का सीधा रुख है:

  • ब्याज दरों में सख्ती: वॉर्श एक ‘हॉकिश’ अर्थशास्त्री माने जाते हैं. उनके आने का मतलब है ऊंची ब्याज दरें और मजबूत डॉलर. चूंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए ऊंची दरें निवेशकों को सोने से दूर ले जाती हैं.
  • नोट छापने के खिलाफ: इंवेस्टिंग डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने सीनेट में स्पष्ट कहा है कि पैसे की कीमत बाजार तय करे, न कि प्रिंटिंग प्रेस. वह ‘क्वांटिटेटिव ईजिंग’ (QE) के दौर को खत्म करना चाहते हैं.
  • डॉलर की मजबूती: वॉर्श का मिशन डॉलर की वैल्यू को बचाना है. उनके लिए सोना और चांदी का बढ़ना इस बात का रिपोर्ट कार्ड है कि फेड डॉलर की रक्षा करने में विफल रहा है.

‘द एक्सोरसिस्ट’: लिक्विडिटी सुखाने का खतरनाक प्लान

बाजार उन्हें ‘एक्सोरसिस्ट’ (बुराई भगाने वाला) कह रहा है क्योंकि वह पिछले 18 सालों से सिस्टम में भरी अतिरिक्त नकदी (Liquidity) को बाहर निकालने का मन बना चुके हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, उनके पास $39 ट्रिलियन के कर्ज से निपटने का एक सख्त टूलकिट है:

  • MBS की बिक्री: वह फेड के पास मौजूद $2 ट्रिलियन के मॉर्टगेज-बैक्ड सिक्योरिटीज को बाजार में बेचने की तैयारी में हैं.
  • क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT): वह पुराने बॉन्ड्स को रिन्यू करने के बजाय उन्हें बेचकर बाजार से कैश सोख लेंगे.
  • जॉम्बी कंपनियों का सफाया: सस्ती दरों पर जिंदा रहने वाली हजारों कंपनियां 5% की ब्याज दर पर दिवालिया हो सकती हैं, जिसे वॉर्श ‘जॉम्बी पर्ज’ के रूप में देखते हैं.

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क्या सोना फिर करेगा वापसी?

भले ही वॉर्श के डर से सोने में गिरावट आई हो, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का एक धड़ा इसे खरीदारी का मौका मान रहा है. इसका कारण है दुनिया में जारी ‘फर्टिलाइजर और माइक्रोचिप का अकाल’. पश्चिम एशिया में जारी ब्लॉकेड की वजह से नाइट्रोजन और हीलियम की भारी कमी हो गई है. निवेशकों का मानना है कि वॉर्श बैलेंस शीट तो छोटी कर सकते हैं, लेकिन वह अनाज या ईंधन पैदा नहीं कर सकते. ऐसे में जब महंगाई बेकाबू होगी, तो लोग फिर से सोने की शरण में लौटेंगे.