स्लीपर बसों में मौत पर लगेगी लगाम… हर कोई नहीं कर पाएगा मॉडिफाई, बने नए नियम; 6 माह में 145 की गई जान
पिछले छह महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में स्लीपर बस हादसों में करीब 145 लोगों की मौत हो चुकी है. इन घटनाओं में सबसे ज्यादा चिंता का कारण बसों में आग लगने की घटनाएं रहीं. लगातार हो रहे हादसों के बाद केंद्र सरकार ने स्लीपर बसों की सुरक्षा को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है.
New Sleeper Bus Rule: देश में लंबी दूरी की बस यात्रा अब पहले जैसी सुरक्षित नहीं रह गई है. खासतौर पर स्लीपर बसों में लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है. बीते सिर्फ छह महीनों में स्लीपर बस हादसों में करीब 145 लोगों की जान चली गई है. कहीं आग लगने की घटनाएं हुईं, तो कहीं तेज रफ्तार और लापरवाही ने यात्रियों की जिंदगी छीन ली.
इन डरावने आंकड़ों ने सरकार को भी झकझोर दिया है. यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए अब केंद्र सरकार ने स्लीपर बसों को लेकर सख्त कदम उठाने का फैसला किया है. इसी वजह से स्लीपर बसों के Construction और operation से जुड़े नियमों को और कड़ा किया गया है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके.
छह महीने में 145 मौतें, सरकार का बड़ा फैसला
पिछले छह महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में स्लीपर बस हादसों में करीब 145 लोगों की मौत हो चुकी है. इन घटनाओं में सबसे ज्यादा चिंता का कारण बसों में आग लगने की घटनाएं रहीं. लगातार हो रहे हादसों के बाद केंद्र सरकार ने स्लीपर बसों की सुरक्षा को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है. सरकार का कहना है कि इन नियमों का मकसद लंबी दूरी की बस यात्राओं को ज्यादा सुरक्षित बनाना है.
अब केवल मान्यता प्राप्त कंपनियां ही बनाएंगी स्लीपर बस
केंद्रीय Road और Transport मिनिस्टर नितिन गडकरी ने नए नियमों की जानकारी देते हुए कहा कि अब केवल केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त ऑटोमोबाइल कंपनियां या निर्माता ही स्लीपर बस बना सकेंगे. अब स्थानीय और हाथ से बस बॉडी बनाने वाले कारीगरों को स्लीपर बस बनाने की अनुमति नहीं होगी. सरकार का मानना है कि इससे बसों की quality बेहतर होगी और सुरक्षा स्तर में बड़ा सुधार आएगा.
उन्होंने कहा कि अक्सर ट्रैवल एजेंसियां अपनी सुविधा के अनुसार स्थानीय बॉडी बिल्डरों से बस बनवाती थीं, जिसमें सुरक्षा मानकों की अनदेखी हो जाती थी. सरकार ने सिर्फ नई बसों के लिए ही नहीं, बल्कि देश में चल रही सभी स्लीपर बसों के लिए भी सख्त निर्देश जारी किए हैं. अब सभी मौजूदा स्लीपर बसों में जरूरी सुरक्षा उपकरण लगाना अनिवार्य होगा.
स्लीपर बसों में कौन-कौन से फीचर जरूरी होंगे
- फायर डिटेक्शन सिस्टम
- इमरजेंसी लाइटिंग सिस्टम
- ड्राइवर थकान अलर्ट सिस्टम यानी एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम
- इमरजेंसी एग्जिट
- सेफ्टी हैमर
AIS-052 बस बॉडी कोड का पालन अनिवार्य
नए नियमों के तहत सभी स्लीपर बसों को AIS-052 बस बॉडी कोड और संशोधित बस बॉडी कोड का पालन करना होगा. यह संशोधित कोड 1 सितंबर 2025 से लागू हो चुका है. जो भी स्लीपर बस इस कोड का पालन नहीं करेगी, उसे सड़क पर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी. AIS-052 यानी ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड-052, भारत का आधिकारिक बस बॉडी सुरक्षा और डिजाइन मानक है. इसमें बस की बनावट, ढांचा और सुरक्षा से जुड़े जरूरी नियम तय किए गए हैं.
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