1 मार्च 2026 से लागू होंगे नए नियम: रेलवे ऐप, LPG, सिम कार्ड और बैंकिंग बदलावों का आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर
1 मार्च 2026 से आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े कई अहम नियमों में बदलाव होने जा रहे हैं. सिम कार्ड से मैसेजिंग ऐप्स की लिंकिंग, रेलवे के नए ऐप की शुरुआत, एलपीजी और सीएनजी-पीएनजी की संभावित कीमतों में बदलाव से लेकर बैंकिंग और यूपीआई नियमों तक, इन फैसलों का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा.
Rule Change from 1 march 2026: हर महीने की पहली तारीख की तरह 1 मार्च 2026 से भी कई अहम बदलाव लागू होने जा रहे हैं. इन बदलावों का सीधा असर आम लोगों की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा. मोबाइल सिम कार्ड से लेकर रेलवे ऐप, एलपीजी, सीएनजी-पीएनजी की कीमतों और बैंकिंग नियमों तक कई नियम बदलने वाले हैं. आइए समझते हैं कि मार्च से क्या-क्या बदलने जा रहा है.
सिम बाइंडिंग नियम होगा लागू
1 मार्च 2026 से मोबाइल यूजर्स के लिए नया SIM Binding नियम लागू किया जाएगा. इस नियम के तहत अब व्हाट्सएप और अन्य मैसेजिंग ऐप्स को उसी मोबाइल नंबर से जोड़ना जरूरी होगा, जो उसी फोन में एक्टिव सिम के रूप में लगा हो. इसका मतलब है कि अगर किसी फोन में ऐप चल रहा है, तो उसी फोन में संबंधित सिम कार्ड का होना जरूरी होगा. इससे फर्जी अकाउंट और ऑनलाइन फ्रॉड पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.
Indian Railways बंद करेगा पुराना UTS App
1 मार्च 2026 से Indian Railways अपना पुराना UTS App बंद कर देगा. अब यात्रियों को टिकट बुकिंग के लिए RailOne ऐप का इस्तेमाल करना होगा. इस नए ऐप के जरिए यात्री अनारक्षित (Unreserved) टिकट, प्लेटफॉर्म टिकट आसानी से बुक कर सकेंगे. रेलवे का कहना है कि नया ऐप पहले से ज्यादा सुविधाजनक और सुरक्षित होगा.
एलपीजी सिलेंडर की नई कीमतें जारी होंगी
हर महीने की तरह 1 मार्च को एलपीजी सिलेंडर की नई कीमतें जारी की जाएंगी. होली के त्योहार को देखते हुए लोगों को उम्मीद है कि सरकार कीमतों में राहत दे सकती है. हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
CNG, PNG और ATF की कीमतों में बदलाव संभव
1 मार्च 2026 को सीएनजी (CNG) और पीएनजी (PNG) की नई दरें भी जारी की जा सकती हैं. इसके अलावा एयरलाइंस में इस्तेमाल होने वाले ATF (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) की कीमतों का भी ऐलान हो सकता है. अगर कीमतों में बदलाव होता है तो इसका असर परिवहन खर्च और हवाई यात्रा पर भी पड़ सकता है.
सरकारी बैंकों ने बदला मिनिमम बैलेंस नियम
देश के कई सरकारी बैंकों ने ग्राहकों को राहत देते हुए मिनिमम बैलेंस का नियम आसान किया है. अब खाते में न्यूनतम राशि का आकलन पूरे महीने के औसत बैलेंस के आधार पर किया जाएगा. इसका फायदा यह होगा कि अगर महीने की शुरुआत में बैलेंस कम है, तो ग्राहक महीने के अंत तक उसे मैनेज कर सकते हैं और पेनाल्टी से बच सकते हैं. हालांकि बैंकों को निर्देश दिया गया है कि 1 अप्रैल से ग्राहकों को ऐसे डिपॉजिट अकाउंट मुहैया कराएं जिसमें किसी मिनिमम बैलेंस रखने की बाध्यता न हो. यानी ग्राहक को अपने खाते में मिनिमम बैलेंस रखने की जरूरत नहीं होगी.
यूपीआई ट्रांजैक्शन पर बढ़ सकती है सुरक्षा
डिजिटल पेमेंट में बढ़ते फ्रॉड को देखते हुए सरकार और बैंक यूपीआई ट्रांजैक्शन के नियम और सख्त कर सकते हैं. संभव है कि बड़ी रकम के ट्रांजैक्शन के लिए सिर्फ यूपीआई पिन काफी न हो. इसके लिए अतिरिक्त वेरिफिकेशन या ऑथेंटिकेशन की जरूरत पड़ सकती है. इस कदम का मकसद ऑनलाइन धोखाधड़ी को कम करना और ग्राहकों का पैसा सुरक्षित रखना है.
